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ग्लेशियर टूटा या बांध? हिमालयी बाढ़ की वजह पर नेपाल के दावे को चीन ने बताया ‘फर्जी'

चीन ने Nepal-Tibet flood पर Nepal के geological disaster dam दावे को fake news बताया. Beijing ने glacier collapse और mudslides को तबाही की वजह बताया.

ग्लेशियर टूटा या बांध? हिमालयी बाढ़ की वजह पर नेपाल के दावे को चीन ने बताया ‘फर्जी
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हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र में ग्लेशियर ढहने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी. पानी, बर्फ, चट्टानों और कीचड़ के तेज बहाव ने रास्ते में आने वाली सड़कों, पुलों, इमारतों और वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया. कई इलाकों में भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया और बस्तियां प्रभावित हुईं.

इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि 1,000 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है. राहत और बचाव दल मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं. वहीं बाढ़ की वजह से चीन और नेपाल की बीच तलवारों भी खिंच गई हैं.

चीन और नेपाल के बीच बाढ़ की वजह को लेकर विवाद क्या?

आपदा के बाद बाढ़ की शुरुआत को लेकर चीन और नेपाल के दावों में अंतर सामने आया है. नेपाल की ओर से चीन की सीमा के पास एक ‘भू-वैज्ञानिक आपदा बांध’ के टूटने को बाढ़ की वजह बताया गया था.

चीन ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे ‘फर्जी खबर’ बताया है. नेपाल में चीनी दूतावास के मुताबिक, आपदा की शुरुआत तिब्बत में नहीं, बल्कि सीमा के नेपाली हिस्से में हुई थी.

चीन का कहना है कि 26 अगस्त की सुबह नेपाल में ग्लेशियर ढहने के बाद बड़े पैमाने पर कीचड़ और मलबे का बहाव शुरू हुआ, जिसने ग्यिरोंग-रासुवागढ़ी सीमा के दोनों ओर के इलाकों को प्रभावित किया.

क्या ग्लेशियर ढहने से शुरू हुआ था पूरा हादसा?

चीनी पक्ष के अनुसार, ऊंचे हिमालय में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा ढहकर लेंडे खोला नदी प्रणाली में जा गिरा. इसके बाद पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा और सीमावर्ती क्षेत्रों में तबाही फैल गई.

इस बहाव में भारी मात्रा में कीचड़, चट्टान और तलछट शामिल थी. कुछ ही समय में पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि पुल, सड़कें, वाहन और कई इमारतें इसकी चपेट में आ गईं.

शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना को संभावित भूकंप से जोड़कर देखा गया था. हालांकि, बाद के अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विश्लेषण में संकेत मिला कि दर्ज किए गए भूकंपीय संकेत पारंपरिक भूकंप के बजाय ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद मलबे की तेज हलचल से जुड़े हो सकते हैं.

क्या चीन ने नेपाल को पहले चेतावनी नहीं दी थी?

आपदा के बाद यह सवाल भी उठा कि क्या संभावित खतरे की पहले से चेतावनी दी गई थी और क्या समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता था.

चीनी दूतावास ने ऐसे आरोपों को भी खारिज किया है कि चीन ने आपदा से पहले नेपाल को पर्याप्त जानकारी या चेतावनी नहीं दी. दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि आरोप लगाने के बजाय दोनों देशों के बीच सहयोग जरूरी है और सहयोग से ही लोगों की जान बचाई जा सकती है.

बाढ़ से नेपाल और तिब्बत में कितना नुकसान हुआ?

बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी हिस्सों और चीन के तिब्बत क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है. कई सड़कें और पुल बह गए, जबकि बिजली परियोजनाओं और इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है.

कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. पहाड़ी भूगोल, क्षतिग्रस्त संचार नेटवर्क, बारिश और भूस्खलन के खतरे ने राहत एवं बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है.

चीनी अधिकारियों ने ग्यिरोंग क्षेत्र में सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी दी है, जबकि नेपाल में भी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है. बचाव दल के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की आशंका बनी हुई है.

क्या लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी हैं?

हां, प्रभावित क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक, ट्रेकर्स और तीर्थयात्री मौजूद थे. इसलिए लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है.

माउंट कैलाश की यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्रियों के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिकों के भी लापता होने की खबरें सामने आई हैं. इससे राहत एवं बचाव अभियान का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी बढ़ गया है.

अब कैसे चल रहा है राहत और बचाव अभियान?

नेपाल और चीन दोनों ने लापता लोगों की तलाश के लिए आपातकालीन कर्मियों, सैन्य टुकड़ियों और विशेष बचाव दलों को तैनात किया है. प्रभावित और कटे हुए इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है.

बचाव दल मलबे के नीचे लोगों की तलाश के साथ-साथ नदियों और अस्थिर पहाड़ी ढलानों पर भी निगरानी रख रहे हैं. मलबे से जलमार्गों के अवरुद्ध होने की स्थिति में अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है.

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों तक पहुंचना है जहां सड़क और संचार संपर्क पूरी तरह या आंशिक रूप से टूट चुका है. जैसे-जैसे बचाव दल दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, वैसे-वैसे आपदा से हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर भी सामने आ रही है.

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