तिब्बत से निकलती-बिहार में कोसी बन जाती, भोटे कोशी नदी को जानें जो नेपाल में लाई तबाही, कहां कितनी तबाही और भारत में कहां-कहां अलर्ट
तिब्बत से आए अचानक सैलाब ने नेपाल के रसुवा में भोटे कोशी के किनारे भारी तबाही मचाई. अब गंडक-नारायणी के बढ़ते जलस्तर से बिहार और यूपी में भी अलर्ट है.
26 अगस्त की सुबह नेपाल के पहाड़ी इलाके में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही देर बाद तिब्बत की दिशा से आया पानी भोटे कोशी नदी में ऐसा उतरा कि देखते ही देखते तबाही का मंजर बन गया. रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में तेज बहाव अपने साथ वाहन, सामान, पुल और सड़कें बहा ले गया. कई बस्तियों में अफरातफरी मच गई और लोग लापता हो गए. अब इस अचानक आई बाढ़ की गूंज नेपाल से निकलकर भारत तक पहुंच रही है. बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गंडक और नारायणी के बढ़ते जलस्तर को लेकर अलर्ट जारी किया गया है.
फिलहाल, 55 लोगों के मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है. बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार 384 यात्री लापता बताए गए हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं. लापता विदेशी नागरिकों में कम से कम 105 भारतीय बताए गए हैं.
नेपाल में भोटे कोशी की बाढ़ से कहां-कहां असर पड़ा?
सबसे गंभीर नुकसान रसुवा जिले में हुआ है, जो तिब्बत सीमा के पास स्थित है. तिमुरे और स्याफ्रुबेसी के अलावा बेट्रावती, मैलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खालती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बत्तार समेत कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं. रसुवा के कस्टम्स परिसर में खड़े वाहन और सामान भी पानी में बह गए और हाल ही में बना एक पुल टूट गया.
अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है. इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल के अनुसार, 354 मेगावाट की कुल क्षमता वाली आठ चालू पनबिजली परियोजनाएं और निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका के पास त्रिशूली नदी से चार शव बरामद किए गए हैं. नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान चला रहे हैं.
बाढ़ अचानक क्यों आई, क्या यह GLOF था?
बाढ़ के कारण की अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक रसुवा में उस समय ऐसी स्थानीय बारिश नहीं हुई थी, जिससे इतनी बड़ी बाढ़ आ सके. आशंका है कि तिब्बत की तरफ भारी बारिश, हिमस्खलन या ग्लेशियर से जुड़ी किसी घटना के कारण अचानक बड़ी मात्रा में पानी भोटे कोशी में पहुंचा. अधिकारी अभी जांच कर रहे हैं कि कहीं यह ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF तो नहीं था. फिलहाल इसे निश्चित तौर पर GLOF कहना जल्दबाजी होगी.
GLO क्या होता है?
GLOF (ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़) एक अचानक और विनाशकारी बाढ़ है, जो तब आती है जब ग्लेशियर या मोरेन (ग्लेशियर द्वारा छोड़े गए चट्टान और मिट्टी के मलबे) से रुका हुआ पानी तेज़ी से नीचे की ओर बहने लगता है.
किन नेपाली जिलों को हाई अलर्ट किया गया है?
भोटे कोशी का पानी आगे त्रिशूली नदी तंत्र में पहुंचता है. इसी वजह से रसुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जैसे निचले इलाकों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है. इन जिलों को भोटे कोशी से सीधे तबाह हुआ बताना सही नहीं होगा; यहां मुख्य चिंता downstream जलस्तर बढ़ने और अचानक बाढ़ आने की है.
बिहार के किन जिलों में अलर्ट है?
बिहार में 26 अगस्त के मौजूदा अलर्ट के तहत पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. इन इलाकों में गंडक नदी के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन को तैयार रहने को कहा गया है.
सीतामढ़ी और शिवहर में भी निगरानी बढ़ाए जाने की खबरें हैं. इसलिए बिहार की स्थिति को इस तरह समझना ज्यादा सही है कि छह जिलों में गंडक को लेकर मुख्य सतर्कता है, जबकि कुछ अन्य जिलों में भी अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है.भोटे कोशी का पानी सीधे बिहार के इन जिलों में नहीं पहुंचता. भोटे कोशी आगे त्रिशूली और फिर नारायणी/गंडक नदी तंत्र से जुड़ती है. इसलिए बिहार में संभावित असर गंडक के बढ़ते जलस्तर और निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे के रूप में देखा जा रहा है.
यूपी के किन जिलों में खतरा है?
उत्तर प्रदेश में फिलहाल महराजगंज और कुशीनगर को लेकर सबसे स्पष्ट सरकारी सतर्कता है. नेपाल में आई बाढ़ के असर से गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है. इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. फिलहाल इन दोनों जिलों में समान स्तर की बाढ़ आ जाने की बात नहीं कही जा सकती. मुख्य चिंता नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी और निचले इलाकों में पानी पहुंचने की संभावना को लेकर है.
भोटे कोशी नदी कहां से निकलती है और आगे कहां जाती है?
भोटे कोशी तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र से निकलती है, जहां इसे पोइकू (Poiqu) के नाम से जाना जाता है. नेपाल-चीन सीमा पार करने के बाद इसे भोटे कोशी कहा जाता है. बारहबिसे के आसपास यह सुनकोशी में मिलती है. आगे सुनकोशी, अरुण और तमोर जैसी प्रमुख नदियां मिलकर सप्तकोशी नदी तंत्र बनाती हैं. यही नदी तंत्र आगे भारत में प्रवेश करता है और बिहार में कोसी के बड़े बाढ़ तंत्र का हिस्सा बनता है. भोटे कोशी का पहाड़ी भूगोल इसे बेहद संवेदनशील बनाता है. खड़ी घाटियां, ग्लेशियर, भूस्खलन और भारी मलबा नदी के बहाव को बहुत कम समय में खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकते हैं.
भोटे कोशी में पहले कब-कब आई बड़ी बाढ़?
भोटे कोशी-सुनकोशी क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने से आई बाढ़ का इतिहास पुराना है. अध्ययनों में 1935, 1964 और 1981 में बड़े GLOF का विनाशकारी असर देखने को मिला था. 1981 की घटना विशेष रूप से विनाशकारी थी. उस दौरान अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे आया, जिससे पांच लोगों की मौत हुई, 41 घर और दो हाईवे पुल बह गए तथा करीब 27 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई.
इसके बाद 2 अगस्त 2014 को सिंधुपालचोक के जुरे में विशाल भूस्खलन हुआ. भूस्खलन ने सुनकोशी का रास्ता रोककर प्राकृतिक बांध बना दिया. इस हादसे में करीब 156 लोगों की मौत हुई. बाद में बनी झील का प्राकृतिक बांध 7 सितंबर 2014 को टूट गया, जिससे नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हुआ.
2025 में भी आई थी भोटे कोशी में अचानक बाढ़
8 जुलाई 2025 को तिब्बत में एक supraglacial lake के तेजी से खाली होने के बाद भोटे कोशी में अचानक फ्लैश फ्लड आई थी. इसका असर रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन तक देखा गया था. इस घटना में भी मौतें हुईं और लोग लापता हुए थे. 2025 की घटना ने यह स्पष्ट किया था कि भोटे कोशी में अचानक आने वाला पानी कुछ ही घंटों में नदी के downstream इलाकों तक संकट पैदा कर सकता है.
क्या बिहार की पुरानी कोसी बाढ़ के लिए भोटे कोशी जिम्मेदार रही है?
बिहार की ऐतिहासिक कोसी बाढ़ को सीधे भोटे कोशी की बाढ़ कहना सही नहीं है. दोनों एक बड़े नदी तंत्र से जुड़ी जरूर हैं, लेकिन बिहार में आई बड़ी कोसी बाढ़ों के अपने अलग कारण रहे हैं. सबसे बड़ी घटनाओं में 18 अगस्त 2008 की कोसी बाढ़ शामिल है. उस समय नेपाल के कुशाहा के पास कोसी का तटबंध टूट गया और नदी ने अपना रास्ता बदल लिया. सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया और उत्तरी भागलपुर समेत उत्तर बिहार के बड़े हिस्से में भारी तबाही हुई और लाखों लोग प्रभावित हुए.
1963, 1968, 1971, 1980, 1984, 1991 और 2008 में भी कोसी क्षेत्र में बड़े बाढ़ संकट दर्ज किए गए हैं. इसलिए भोटे कोशी और बिहार की कोसी को एक ही नदी की सीधी बाढ़ के रूप में देखना भ्रामक होगा.
2026 में बिहार और यूपी के लिए खतरा कितना बड़ा?
फिलहाल नेपाल में गंभीर और वास्तविक फ्लैश फ्लड, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश में संभावित downstream बाढ़ के खतरे के रूप में समझना चाहिए. नेपाल में नुकसान काफी गंभीर है, लेकिन बिहार या यूपी में भोटे कोशी की वजह से बड़े पैमाने पर जलप्रलय शुरू हो चुका है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी.
अभी प्रशासन की प्राथमिकता गंडक, नारायणी और उनसे जुड़े नदी तंत्र के जलस्तर पर नजर रखने की है. नदी का पानी बढ़ने की स्थिति में नेपाल से लेकर बिहार और यूपी तक निचले इलाकों में खतरा बढ़ सकता है. स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन के अलर्ट और निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है.




