अमेरिका ने क्यों कसा Cognizant पर शिकंजा? ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप पर लगाई रोक, चेन्नई में शुरू हुई इस कंपनी के बारे में कितना जानते हैं आप?
मेरिका ने Cognizant की नई Green Card sponsorship filings पर रोक लगा दी है. जानें कार्रवाई की वजह, कंपनी की चेन्नई से शुरू हुई कहानी और US जांच से जुड़ी पूरी जानकारी.
अमेरिका ने भारतीय मूल की और अमेरिका में लिस्टेड टेक कंपनी Cognizant के लिए नई ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. अमेरिकी श्रम विभाग ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब कंपनी कथित वीजा धोखाधड़ी के मामले में जांच का सामना कर रही है. विभाग ने कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों के लिए किसी भी तरह का खतरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, "अमेरिकी कर्मचारियों के लिए खतरे को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा." उन्होंने बताया कि विभाग White House Fraud Task Force के साथ मिलकर तथ्यों, कथित धोखाधड़ी और वित्तीय पहलुओं की जांच कर रहा है. उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा.
Cognizant की ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप पर लगी रोक?
अमेरिकी श्रम विभाग ने Cognizant की ओर से नए ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप के लिए आवेदन करने की क्षमता को निलंबित कर दिया है. इसका मतलब है कि कंपनी फिलहाल नए विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी आवेदन नहीं कर सकेगी. यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब Cognizant कथित वीजा धोखाधड़ी को लेकर जांच के दायरे में है.
किस और कंपनी पर हुई कार्रवाई?
एंथनी डी'एस्पोसिटो ने एक अलग पोस्ट में बताया कि टेक कंपनी Cloudera के PERM filings पर भी रोक लगाई गई है. PERM अमेरिका के श्रम विभाग की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल विदेशी कर्मचारी के लिए Permanent Labor Certification हासिल करने के लिए किया जाता है.
Permanent Labor Certification रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का पहला कदम होता है. इसके जरिए किसी कंपनी को विदेशी कर्मचारी को अमेरिका में स्थायी रोजगार देने के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मिलती है.
कैसे हुई थी Cognizant की शुरुआत?
Cognizant की स्थापना 1994 में चेन्नई में हुई थी. कंपनी अब अमेरिका में मुख्यालय वाली एक बड़ी टेक कंपनी है और कॉरपोरेट अमेरिका में H-1B वीजा के सबसे बड़े आवेदकों में शामिल है. अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, Cognizant को 3,510 H-1B वीजा याचिकाओं की मंजूरी मिली है. इस मामले में वह Amazon, TCS, Infosys, Apple और Microsoft के बाद आती है.
क्या है H-1B वीजा?
H-1B वीजा एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां कुछ विशेष क्षेत्रों में अस्थायी तौर पर विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में काम करने के लिए नियुक्त कर सकती हैं. अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक, यह वीजा विशेष योग्यता वाले पेशों में विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है. इसके अलावा यह विशिष्ट योग्यता और क्षमता वाले फैशन मॉडल्स पर भी लागू होता है.
मौजूदा कानून के तहत हर साल अधिकतम 65,000 योग्य विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा या H-1B स्टेटस दिया जा सकता है. इसके अलावा अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों से एडवांस्ड डिग्री वाले लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा की छूट है.
ट्रंप प्रशासन ने शुरू किया था Project Firewall
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब ट्रंप प्रशासन विदेशी कर्मचारियों को लेकर H-1B वीजा कार्यक्रम पर सख्ती कर रहा है. पिछले साल सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने "Project Firewall" शुरू किया था. इसका उद्देश्य उन कंपनियों और नियोक्ताओं को निशाना बनाना था, जो कथित तौर पर H-1B वीजा कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल करते हैं.
अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत उन मामलों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां H-1B वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया जाता है.
Labor Day पर भी दिया था सख्त संदेश
Cognizant और Cloudera के खिलाफ कार्रवाई से पहले 7 सितंबर को अमेरिका के Labor Day के मौके पर एंथनी डी'एस्पोसिटो ने एक सख्त और रहस्यमय संदेश पोस्ट किया था. उन्होंने X पर लिखा था कि Labor Day उन अमेरिकी कर्मचारियों का सम्मान करता है, जिन्होंने देश का निर्माण किया है, न कि उन लोगों का जो धोखाधड़ी के जरिए उनकी नौकरियां छीनते हैं. उन्होंने आगे कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ उनका संकल्प और मजबूत हुआ है.
Cognizant के बारे में कितना जानते हैं आप?
- Cognizant की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी. 1996 में Dun & Bradstreet ने अपनी कई सहायक कंपनियों को अलग करके एक नई कंपनी बनाई, जिसका नाम Cognizant Corporation रखा गया. इसमें Erisco, IMS International, Nielsen Media Research, Pilot Software, Strategic Technologies और DBSS जैसी कंपनियां शामिल थीं. इस नई कंपनी का मुख्यालय चेन्नई, भारत में था.
- इसके करीब तीन महीने बाद, 1997 में DBSS का नाम बदलकर Cognizant Technology Solutions कर दिया गया. जुलाई 1997 में Dun & Bradstreet ने DBSS में Satyam की 24 फीसदी हिस्सेदारी 34 लाख डॉलर में खरीद ली. इसके बाद कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में स्थानांतरित कर दिया गया. मार्च 1998 में कुमार महादेवा को कंपनी का CEO बनाया गया. उस समय कंपनी ने मुख्य रूप से Y2K से जुड़े प्रोजेक्ट्स और वेब डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम किया.
- 1998 में Cognizant Corporation का दो कंपनियों- IMS Health और Nielsen Media Research में बंटवारा हो गया. इसके बाद Cognizant Technology Solutions, IMS Health की एक पब्लिक सब्सिडियरी बन गई. जून 1998 में IMS Health ने Cognizant के कुछ शेयर अलग किए और कंपनी का IPO यानी Initial Public Offering लेकर आई. इसके बाद Cognizant के शेयर सार्वजनिक रूप से कारोबार के लिए उपलब्ध हो गए.
- 2003 में IMS Health ने Cognizant में अपनी पूरी 56 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी. इसके बाद Cognizant ने कंपनी को किसी दूसरी कंपनी के जबरन अधिग्रहण यानी hostile takeover से बचाने के लिए 'poison pill' प्रावधान लागू किया. इसी साल कुमार महादेवा ने CEO पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह लक्ष्मी नारायणन को CEO बनाया गया.
- इसके बाद Cognizant ने अपने कारोबार का विस्तार किया. कंपनी ने IT सेवाओं के साथ-साथ बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) और बिजनेस कंसल्टिंग जैसी सेवाओं में भी काम शुरू किया. 2006 में लक्ष्मी नारायणन के बाद फ्रांसिस्को डिसूजा कंपनी के CEO बने.
- सितंबर 2014 में Cognizant ने हेल्थकेयर IT सर्विस देने वाली कंपनी TriZetto Corp को 2.7 अरब डॉलर में खरीदा. इस खबर के बाद Cognizant के शेयरों में प्री-मार्केट ट्रेडिंग के दौरान करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
- 24 जून 2015 को Cognizant ने भारत के Escorts Group के साथ करोड़ों डॉलर का समझौता किया. इसका उद्देश्य Escorts के कारोबार को डिजिटल तरीके से बदलना और उसके अलग-अलग बिजनेस से जुड़े कामकाज को आधुनिक बनाना था. इसके कुछ दिनों बाद 30 जून 2015 को Cognizant ने सिंगापुर की सुपरमार्केट कंपनी NTUC FairPrice के साथ साझेदारी की. इस साझेदारी का मकसद NTUC के कारोबार में डिजिटल बदलाव लाना और अलग-अलग चैनलों पर ग्राहकों को बेहतर और एक जैसी सेवाएं देना था.
- 1 अप्रैल 2019 को फ्रांसिस्को डिसूजा की जगह Brian Humphries को Cognizant का CEO बनाया गया. जनवरी 2022 में Cognizant ने अपनी कंपनी Oy Samlink को Kyndryl को और Mustache को DJE Holdings को बेच दिया.
- 2023 में Ravi Kumar S को Cognizant का CEO बनाया गया. इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को Cognizant ने Microsoft के साथ साझेदारी की घोषणा की. इस साझेदारी का उद्देश्य Generative AI और Copilot जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ाना, कर्मचारियों के अनुभव को बेहतर करना और अलग-अलग इंडस्ट्री में नए इनोवेशन को तेजी से आगे बढ़ाना था.




