बिना गर्भाशय के जन्मी महिला, फिर बहन ने दान किया अपना यूटेरस, अब हुई प्रेग्नेंट, जानें क्या है MRKH सिंड्रोम
ब्रिटेन की एक महिला ने मेडिकल साइंस की मदद से मां बनने का सपना पूरा किया है. जन्म से गर्भाशय न होने के बावजूद बहन से यूटेरस ट्रांसप्लांट मिलने के बाद अब वह प्रेग्नेंट हैं.
ब्रिटेन की 36 साल की लॉरेन फाउलर इन दिनों अपने पहले बच्चे का इंतजार कर रही हैं. खास बात यह है कि लॉरेन बिना यूटेरस के पैदा हुई थी. उन्हें MRKH सिंड्रोम नाम की रेयर कंडीशन है, जिसमें गर्भाशय पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है. मां बनने की उनकी चाह तब पूरी होने की उम्मीद जगी, जब उनकी 40 साल की बड़ी बहन केली ने अपना गर्भाशय उन्हें दान करने का फैसला किया. अब यूटेरस ट्रांसप्लांट के बाद लॉरेन 26 हफ्ते की प्रेग्नेंट हैं और उनके बच्चे की डिलीवरी अक्टूबर में सी-सेक्शन से होने की योजना है.
यह अनोखा मामला अमेरिकी People मैगजीन की रिपोर्ट में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में दोनों बहनों की ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई थी. इसके बाद लॉरेन को कुछ परेशानियों के कारण दो और सर्जरी से गुजरना पड़ा. बाद में IVF के जरिए गर्भधारण हुआ और अब मां और बच्चा दोनों डॉक्टरों की निगरानी में ठीक हैं.
क्यों नहीं था लॉरेन के शरीर में यूटरेस?
लॉरेन को MRKH सिंड्रोम नाम की एक दुर्लभ बीमारी है. इस कंडीशन में जन्म से ही महिला का गर्भाशय पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता. लॉरेन की ओवर सामान्य रूप से काम करती थी और अंडे भी बनते थे, लेकिन गर्भाशय न होने की वजह से वह खुद बच्चे को जन्म नहीं दे सकती थीं. मां बनने की इच्छा होने के बावजूद उनके लिए प्रेग्नेंसी संभव नहीं थी.
बहन ने दान किया अपना गर्भाशय
लॉरेन की 40 साल की बहन केली पहले से तीन बच्चों की मां हैं. जब उनका परिवार पूरा हो गया तो उन्होंने अपनी बहन के लिए अपना गर्भाशय देने का फैसला किया. मई 2025 में दोनों बहनों की सर्जरी हुई. ट्रांसप्लांट के बाद लॉरेन को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके शरीर ने नए गर्भाशय को अपना लिया. इसके बाद IVF की मदद से भ्रूण गर्भाशय में डाला गया और अब लॉरेन प्रेग्नेंट हैं.
क्या कोई महिला अपना यूटरेस दान कर सकती है?
हां, कुछ मामलों में जीवित महिला अपना यूटरेस दान कर सकती है. हालांकि, यह प्रोसेस आसान नहीं होता है. इसके लिए डोनर की पूरी मेडिकल जांच की जाती है और उसकी शारीरिक और मेंटल कंडीशन भी देखी जाती है. आमतौर पर ऐसी महिला का खुद का परिवार पूरा हो चुका होना जरूरी माना जाता है. कुछ मामलों में मृत महिला से भी गर्भाशय लेकर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है.
यूटेरस दान करने से क्या नुकसान हो सकता है?
- गर्भाशय निकालने की सर्जरी काफी बड़ी होती है, इसलिए इसमें कुछ जोखिम भी रहते हैं. डोनर को खून बहने, संक्रमण, बेहोशी की दवा से परेशानी या ब्लड क्लॉट जैसी दिक्कत हो सकती है.
- सर्जरी के दौरान आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है.
- वहीं, जिस महिला में गर्भाशय ट्रांसप्लांट किया जाता है, उसके लिए भी कुछ खतरे होते हैं. शरीर नए गर्भाशय को न अपनाए, तो ट्रांसप्लांट फेल हो सकता है.
- ब्लड क्लॉट की समस्या भी हो सकती है और ट्रांसप्लांट के बाद होने वाली प्रेग्नेंसी को आमतौर पर ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है. नए गर्भाशय को शरीर में बनाए रखने के लिए इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं भी दी जाती हैं.




