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तेल के बाद अब ‘गोल्ड पावर’ बनेगा सऊदी अरब, रेत के नीचे मिला 'सोने का साम्राज्य'; चार इलाकों में 221 टन सोने का भंडार

सऊदी अरब के रेगिस्तान में बड़ी मात्रा में सोने का खजाना मिलने से देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलती दिख रही है. सरकारी खनन कंपनी मआदेन के अनुसार चार अलग-अलग इलाकों में करीब 7.8 मिलियन औंस (221 टन) सोने की खोज हुई है. यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति के लिए बड़ा बूस्ट मानी जा रही है, जिसका मकसद तेल पर निर्भरता कम करना है.

तेल के बाद अब ‘गोल्ड पावर’ बनेगा सऊदी अरब, रेत के नीचे मिला सोने का साम्राज्य; चार इलाकों में 221 टन सोने का भंडार
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 16 Jan 2026 8:44 AM

तेल के दम पर दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला सऊदी अरब अब एक नई ताकत की ओर बढ़ता दिख रहा है. रेगिस्तान की रेत के नीचे छिपे खजाने ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. सऊदी अरब की सरकारी खनन कंपनी मआदेन (Maaden) ने पुष्टि की है कि देश के चार बड़े इलाकों में की गई ताजा ड्रिलिंग और एक्सप्लोरेशन से करीब 78 लाख औंस सोना सामने आया है, जो वजन में लगभग 221 टन बैठता है.

यह खोज सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सऊदी अरब की तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था से बाहर निकलने की रणनीति को भी नई रफ्तार देने वाली मानी जा रही है.

किन-किन इलाकों में मिला सोना?

मआदेन के मुताबिक, जिन चार क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सोने के भंडार मिले हैं, वे हैं -

  • मंसूरा मस्सारा (Mansourah Massarah)
  • उरूक 20/21 (Uruq 20/21)
  • उम्म अस सलाम (Umm As Salam)
  • वादी अल जॉ (Wadi Al Jaw)

इनमें से वादी अल जॉ अकेला ऐसा इलाका है, जहां से अनुमानित कुल सोने का बड़ा हिस्सा निकलने की संभावना जताई जा रही है. कंपनी का कहना है कि यह खोज सिर्फ पुराने खनन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि नए और शुरुआती स्तर के इलाकों में भी बड़ी संभावनाएं सामने आई हैं.

अरबियन शील्ड: सोने की खान

खनिज विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब का Arabian Shield इलाका पहले से ही सोना, तांबा और अन्य कीमती धातुओं से भरपूर माना जाता रहा है. अब ताजा खोजों ने इस धारणा को और मजबूत कर दिया है. इतना ही नहीं, ऐतिहासिक महद गोल्ड माइन (Mahd Gold Mine) जैसे पुराने खनन क्षेत्रों के आसपास भी नई मिनरलाइज्ड ज़ोन मिलने के संकेत मिले हैं, जिससे भविष्य में सोने का उत्पादन और बढ़ सकता है.

Vision 2030 को मिला बड़ा बूस्ट

यह खोज ऐसे वक्त पर हुई है जब सऊदी अरब अपनी महत्वाकांक्षी Vision 2030 योजना पर तेजी से काम कर रहा है. इस योजना का मकसद देश की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालकर माइनिंग, टूरिज्म, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों को मजबूत करना है. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि सोने के भंडार में यह इजाफा माइनिंग सेक्टर को अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बना सकता है.

दुनिया की नजर, विदेशी निवेश की तैयारी

हालांकि यह खोज सऊदी अरब को तुरंत दुनिया के टॉप गोल्ड प्रोड्यूसर्स की कतार में खड़ा नहीं करती, लेकिन ग्लोबल लेवल पर इसे एक गेम-चेंजर संकेत जरूर माना जा रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी खोज के बाद अब - विदेशी माइनिंग कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आएगा और स्थानीय युवाओं के लिए ट्रेनिंग और रोजगार के मौके बनेंगे.

रेगिस्तान के गांवों की बदलेगी तकदीर?

इन खनन स्थलों के आसपास बसे कस्बों और गांवों के लिए यह खोज किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही. नई सड़कें, बेहतर सुविधाएं, रोजगार और विकास की उम्मीदें अब जमीन पर उतरती दिख सकती हैं.

तेल के बाद सोना- नई पहचान की ओर सऊदी अरब

आज सऊदी अरब सिर्फ तेल की ताकत नहीं, बल्कि सोना, तांबा, निकल और दूसरे खनिजों के दम पर भी अपनी वैश्विक पहचान बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. रेगिस्तान की रेत के नीचे छिपा यह सोना इस बात का संकेत है कि सऊदी अरब अब भविष्य की अर्थव्यवस्था को नए स्तंभों पर खड़ा करने के लिए पूरी तरह गंभीर है. तेल से आगे निकलकर ‘गोल्ड पावर’ बनने की यह कहानी अब पूरी दुनिया की नजरों में है.

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