उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी अब योगी सरकार के लिए चिंता का विषय बनती दिख रही है. बीते कुछ समय में कई ऐसे मामले सामने आए, जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर नेताओं की अनदेखी या कथित अभद्र व्यवहार के आरोप लगे. अब सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अफसरों के लिए नए प्रोटोकॉल तय कर दिए हैं. दरअसल, पिछले साल बुलंदशहर की तत्कालीन महिला जिलाधिकारी का मामला काफी चर्चा में रहा था. आरोप था कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के कई बार फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं की. मामला विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचा, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में भी इस घटना की काफी चर्चा हुई. उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी Sulkhan Singh ने भी एक पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि 1989 में रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी और एक बड़े नेता के बीच टकराव उन्होंने खुद देखा था. उनके मुताबिक, उस दौर में भी कुछ अफसर खुद को 'लाट साहब' समझने लगते थे और नेताओं से टकराव की स्थिति बन जाती थी.