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9 दिन की दुल्हन से 17 साल की न्याय-यात्रा तक, पूजा पाल की वो कहानी, जिसने बाहुबल के साम्राज्य को हिला दिया

9 दिन की नई नवेली दुल्हन… और फिर 17 साल तक अदालत, राजनीति और बाहुबल के खिलाफ चली न्याय की जंग. पूजा पाल की कहानी सिर्फ एक पत्नी के दर्द की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबल के सबसे बड़े साम्राज्य को चुनौती दे डाली.

9 दिन की दुल्हन से 17 साल की न्याय-यात्रा तक, पूजा पाल की वो कहानी, जिसने बाहुबल के साम्राज्य को हिला दिया
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योगी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार से पहले जिन 6 चेहरों की एंट्री की चर्चा हो रही है, उनमें पूजा पाल का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है. प्रयागराज की सियासत से निकलकर बाहुबल, हत्या, साजिश, कोर्ट और राजनीतिक संघर्ष के बीच अपनी अलग पहचान बनाने वाली पूजा पाल की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं मानी जाती.

एक साधारण परिवार की लड़की से लेकर माफिया राजनीति को खुली चुनौती देने वाली नेता तक का सफर आसान नहीं था. शादी के महज 9 दिन बाद पति की हत्या, फिर उसी आरोपी परिवार के खिलाफ चुनाव लड़ना, अदालतों में 17 साल तक न्याय की लड़ाई और अब योगी सरकार में मंत्री बनने की चर्चा… पूजा पाल की कहानी यूपी की राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में गिनी जाती है.

क्या 10 मई को योगी कैबिनेट में दिखेगा पूजा पाल का बड़ा प्रमोशन?

सूत्रों के मुताबिक 10 मई को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने हाल ही में राज्यपाल Anandiben Patel से मुलाकात की, जिसके बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. संभावित मंत्रियों की सूची में पूजा पाल के अलावा भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडे, अशोक कटारिया, कृष्णा पासवान और रोमी साहनी का नाम भी सामने आ रहा है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पूजा पाल की इसलिए हो रही है क्योंकि वह समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब पहुंच चुकी हैं और हाल ही में सीएम योगी से उनकी मुलाकात ने अटकलों को और तेज कर दिया.

कौन हैं पूजा पाल, जिनकी कहानी ने यूपी की राजनीति को हिला दिया?

प्रयागराज की गलियों में पली-बढ़ी पूजा पाल का राजनीति से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था. पिता साइकिल रिपेयरिंग का छोटा काम करते थे और जिंदगी बेहद सामान्य थी. लेकिन नियति ने उन्हें सीधे उस राजनीति के बीच ला खड़ा किया, जहां गोलियों, बाहुबल और सत्ता का खेल चलता था. साल 2005 में उनकी शादी बसपा विधायक राजू पाल से हुई. राजू पाल उस दौर में तेजी से उभरते युवा नेता थे जिन्होंने इलाहाबाद पश्चिम सीट से अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराकर सनसनी मचा दी थी. लेकिन शादी के सिर्फ 9 दिन बाद 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े राजू पाल की हत्या कर दी गई. प्रयागराज की सड़कों पर गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच राजू पाल का कत्ल यूपी की राजनीति का सबसे चर्चित हत्याकांड बन गया.

हत्या का आरोप माफिया Atiq Ahmed और उसके भाई अशरफ पर लगा.

कैसे ‘9 दिन की दुल्हन’ बन गई बाहुबल के खिलाफ सबसे बड़ी आवाज?

पति की हत्या के बाद पूजा पाल के सामने दो रास्ते थे. डरकर चुप बैठ जाना या लड़ाई लड़ना. उन्होंने दूसरा रास्ता चुना. राजू पाल की मौत के कुछ महीनों बाद हुए उपचुनाव में बसपा ने पूजा पाल को उम्मीदवार बनाया. राजनीति में उनका पहला कदम मजबूरी था, लेकिन धीरे-धीरे वही उनका मिशन बन गया. 2007 में उन्होंने अशरफ को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. फिर 2012 में खुद अतीक अहमद को चुनाव में मात देकर उन्होंने साबित कर दिया कि जनता का समर्थन बाहुबल से बड़ा होता है. पूजा पाल लगातार अदालतों में लड़ती रहीं. सीबीआई जांच, गवाही और कोर्ट की लंबी प्रक्रिया के बीच उन्होंने 17 साल तक न्याय की लड़ाई नहीं छोड़ी.

आखिर पूजा पाल ने दूसरी शादी को ‘ट्रैप’ क्यों बताया?

हाल के इंटरव्यू में पूजा पाल ने अपनी दूसरी शादी को लेकर बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा कि 'मैं पूजा पाल थी, हूं और मरते दम तक रहूंगी. क्योंकि ये शादी एक ट्रैप थी.” पूजा पाल का दावा है कि कुछ करीबी लोगों ने उन्हें भावनात्मक दबाव में शादी के लिए तैयार किया. उनका आरोप है कि इसके पीछे राजू पाल हत्याकांड के मुकदमे को कमजोर करने की साजिश थी. उन्होंने कहा कि 'शादी कोई अपराध नहीं है. लेकिन विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वो एक महिला के चरित्र पर हमला करते हैं.' पूजा पाल ने यह भी आरोप लगाया कि माफिया अतीक अहमद चाहता था कि उनकी शादी हो जाए ताकि राजू पाल हत्याकांड धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाए.

दूसरी शादी के पीछे क्या था पूरा विवाद?

पूजा पाल ने 2018 में हरदोई के पूर्व विधायक और सपा नेता बृजेश वर्मा से शादी की थी. यह शादी लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं हुई. बाद में 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन हलफनामे में उन्होंने इसका खुलासा किया. अब पूजा पाल का कहना है कि यह शादी उनके खिलाफ रची गई साजिश का हिस्सा थी. उन्होंने बताया कि परिवार के कुछ लोग भी इसमें शामिल थे और उन्हें लगातार भरोसा दिलाया गया कि यह फैसला उनके हित में है. लेकिन जब उनसे राजू पाल हत्याकांड का मुकदमा छोड़ने की बात कही गई, तब उन्हें पूरे षड्यंत्र का एहसास हुआ और उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया.

क्या पूजा पाल की एंट्री भाजपा के OBC समीकरण को मजबूत करेगी?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूजा पाल को मंत्रिमंडल में शामिल करने से भाजपा को पूर्वांचल में बड़ा फायदा मिल सकता है. पूजा पाल पाल-गड़ेरिया समुदाय से आती हैं और पूर्वांचल में इस समाज का बड़ा वोट बैंक माना जाता है. ऐसे में भाजपा उन्हें आगे कर OBC समीकरण को और मजबूत करना चाहती है. सपा से निकाले जाने के बाद पूजा पाल खुलकर योगी सरकार की तारीफ करती नजर आईं. विधानसभा में भी उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर सराहना की थी.

क्यों खास मानी जाती है पूजा पाल की राजनीतिक यात्रा?

पूजा पाल सिर्फ एक विधायक नहीं बल्कि यूपी की उस राजनीति का चेहरा बन चुकी हैं, जहां एक साधारण महिला ने बाहुबलियों के खिलाफ खड़े होकर अपनी पहचान बनाई. जिस दौर में लोग अतीक अहमद का नाम लेने से डरते थे, उस दौर में पूजा पाल अदालतों से लेकर चुनावी मैदान तक डटी रहीं. यही वजह है कि आज उनकी कहानी राजनीति से ज्यादा संघर्ष, साहस और न्याय की लड़ाई के तौर पर देखी जाती है. अगर योगी कैबिनेट में उनकी एंट्री होती है, तो यह सिर्फ राजनीतिक नियुक्ति नहीं बल्कि यूपी की राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर भी देखा जाएगा.

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