देश में चुनावी शोर भले ही धीरे-धीरे थम रहा हो, लेकिन अब आम लोगों की चिंता पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बढ़ने लगी है. बाजार में ऐसी चर्चाएं तेज हैं कि 29 अप्रैल के बाद ईंधन की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना बताया जा रहा है, जिसने सरकार और तेल कंपनियों दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है. सूत्रों के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां महंगे कच्चे तेल की खरीदारी कर रही हैं, लेकिन चुनावी माहौल के चलते अब तक कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई. रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि कंपनियां फिलहाल नुकसान सहकर कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं. हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष में इन कंपनियों ने करीब 30,000 करोड़ रुपये का मुनाफा भी दर्ज किया था, जिससे फिलहाल कुछ राहत मिली है.