NEET UG पेपर लीक मामले में जांच के दौरान सामने आया कि यह सिर्फ एक लीक नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का संगठित रैकेट था. रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे ऊपर बैठे प्राइमरी सोर्स या सॉल्वर गैंग ने पूरा प्रश्नपत्र 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक में बेचा. इसके बाद बिचौलियों ने वही पेपर अलग-अलग छात्रों और परिवारों को 15 से 50 लाख रुपये तक में उपलब्ध कराया और भारी मुनाफा कमाया. वहीं पेपर सॉल्व करने वाले MBBS छात्र या रिसर्च स्कॉलर्स को हर सेशन के लाखों रुपये दिए जाते थे. सबसे नीचे लोकल एजेंट और टेलीग्राम-व्हाट्सएप चैनलों के जरिए एक-एक छात्र से हजारों से लाखों रुपये तक वसूले गए. जांच एजेंसियों को आशंका है कि सिर्फ एक रात में यह पूरा नेटवर्क 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर सकता था, जबकि लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया.