जेफरी एपस्टीन की संदिग्ध मौत के वर्षों बाद भी उसका मामला दुनिया की राजनीति और खुफिया एजेंसियों को झकझोर रहा है. हालिया रिपोर्ट्स और 2020 के एक FBI दस्तावेज़ के हवाले से यह दावा सामने आया है कि एपस्टीन इजराइल के लिए जासूसी करता था और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली नेताओं, उद्योगपतियों और हस्तियों को ब्लैकमेल के जरिए नियंत्रित करता था. इजराइल ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है, लेकिन एपस्टीन फाइल्स के खुलासों ने बहस को फिर से तेज कर दिया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस अंतरराष्ट्रीय कांड की आंच भारत तक भी पहुंच सकती है, और अगर ऐसा होता है तो इसके कानूनी, कूटनीतिक और नैतिक परिणाम क्या होंगे? इन्हीं पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए. पी. सिंह ने स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के साथ हुई बातचीत में विस्तार से अपनी राय रखी है.