सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील A. P. Singh ने सबरीमाला मंदिर विवाद पर कहा कि यह मामला सिर्फ कानून का नहीं बल्कि सनातन धर्म, आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है. उन्होंने दावा किया कि सदियों पुरानी नैष्ठिक ब्रह्मचारी परंपरा को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि महिलाएं स्वयं उन नियमों का पालन करती हैं. DR AP Singh ने कहा कि 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक धार्मिक रीति-रिवाज और मंदिर की पवित्रता से जुड़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 14 की समानता और अनुच्छेद 25 की धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन जरूरी है और अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संवैधानिक पीठ को करना है.