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उत्तराखंड के इस जिले में धान की खेती पर लगी रोक, हजारों किसान परिवारों पर मंडराया खतरा; जानें क्यों लिया ये फैसला

उत्तराखंड के अन्न भंडार कहे जाने वाले उधम सिंह नगर जिले में इस बार ग्रीष्म ऋतु के दौरान धान की खेती नहीं हो सकेगी. जिला प्रशासन ने 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है. यह फैसला भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए लिया गया है.

उत्तराखंड के इस जिले में धान की खेती पर लगी रोक, हजारों किसान परिवारों पर मंडराया खतरा; जानें क्यों लिया ये फैसला
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( Image Source:  AI: Sora )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 13 Jan 2026 1:09 PM

उत्तराखंड के अन्न भंडार कहे जाने वाले उधम सिंह नगर जिले में इस बार ग्रीष्म ऋतु के दौरान धान की खेती नहीं हो सकेगी. जिला प्रशासन ने 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है. यह फैसला भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए लिया गया है और इसे जिले में भूजल संरक्षण से जुड़ा पहला स्पष्ट और सख्त प्रतिबंध माना जा रहा है.

इस फैसले का सीधा असर जिले के करीब 15 हजार किसानों पर पड़ेगा, जबकि लगभग 150 करोड़ रुपये की फसल खतरे में पड़ने का अनुमान है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम भले ही मौजूदा समय में किसानों के लिए कठिन हो, लेकिन आने वाले समय में जल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.

धान की बुवाई से रोपाई तक सब पर रोक

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई की प्रक्रिया पर भी लागू होगा. उन्होंने बताया कि भविष्य में यह प्रतिबंध तराई क्षेत्र के अन्य हिस्सों नैनीताल और हरिद्वार के कुछ इलाकों तक भी बढ़ाया जा सकता है. डीएम ने साफ शब्दों में कहा "इस साल कोई छूट नहीं दी जाएगी."

पिछले साल भी कुछ समय के लिए लगी थी रोक

साल 2024 में भी ग्रीष्म धान पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई थी, लेकिन तब किसानों से बातचीत के बाद प्रशासन ने उसे हटा लिया था. इस बार प्रशासन किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है. फिलहाल राज्य के किसी अन्य जिले में ग्रीष्म धान पर ऐसा स्पष्ट प्रतिबंध लागू नहीं है.

अन्य राज्यों से अलग उत्तराखंड का फैसला

देश के अन्य राज्यों की बात करें तो हरियाणा में भूमिगत जल संरक्षण कानून के तहत समय से पहले धान की बुवाई पर कानूनी प्रतिबंध है, जबकि पंजाब में कैलेंडर आधारित प्रणाली लागू की जाती है. उधम सिंह नगर में लगाया गया यह प्रतिबंध उत्तराखंड के लिए एक नई और कड़ी पहल माना जा रहा है.

कृषि वैज्ञानिकों से सलाह के बाद लिया गया फैसला

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया के अनुसार "यह फैसला कृषि वैज्ञानिकों और किसान समूहों से परामर्श के बाद लिया गया है. हमारी प्राथमिकता दीर्घकालिक जल सुरक्षा है और हम किसानों से सहयोग करने का आग्रह करते हैं." अनुमानों के मुताबिक, उधम सिंह नगर जिले में ग्रीष्म ऋतु के दौरान करीब 22,000 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है. अधिकांश किसान एक से दो हेक्टेयर की छोटी जोतों पर निर्भर हैं, ऐसे में इस फैसले से उनकी पारिवारिक आय पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है.

उत्तराखंड न्‍यूज
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