'जस्टिस फॉर अंकिता भंडारी' को लेकर उत्तराखंड बंद, इमरजेंसी को छोड़कर क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?
उत्तराखंड में आज ‘जस्टिस फोर अंकिता भंडारी’ के नारे के साथ बंद का आह्वान किया गया है. यह बंद अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर किया जा रहा है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों, महिला समूहों और कुछ राजनीतिक दलों ने इस बंद को समर्थन दिया है. लोगों का कहना है कि इस मामले में अब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आई
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पिछले कई दिनों से जनता में भारी आक्रोश बना हुआ है. अंकिता के परिजन सहित सियासी दलों और गैर सरकारी संगठनों के लोग उसे न्याय दिलाने की मांग लंबे अरसे से करते आए है. विपक्षी दलों के विरोध और अंकिता के माता पिता की मांग को देखते हुए इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मंजूरी दे दी है. पिछले कुछ दिनों से इस घटना को लेकर विरोध चरम पर है. इस बात को लेकर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने 11 जनवरी यानी आज उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है.
इस बीच बंद को लेकर व्यवसायिक संगठनों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है और प्रशासन ने कहा है कि बंद के नाम पर कोई आधिकारिक आदेश नहीं है.अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने आज 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद रखने का ऐलान किया है. हालांकि, प्रदेशव्यापी बंद को लेकर व्यापारी संगठन और दलों में मतभेद है. जानें बंद के दौरान कौन कौन सी सेवाएं खुली रहेंगी और कौन रहेगी बंद.
क्या रहेगा बंद
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के नाम पर आज बंद के दौरान दुकानें और बाजारों को बंद रखने का फैसला व्यापारियों ने वापस ले लिया है, इसलिए अधिकतर बाजार और दुकानें आज सामान्य रूप से खुल सकती हैं. बावजूद इसके पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे बस, टैक्सी और अन्य परिवहन सेवाएं चलेंगी, पर कुछ इलाकों में प्रदर्शन के कारण स्थानीय रोक हो सकती है. स्कूल और कॉलेजों पर भी बंद का असर पड़ेगा.
सियासी दलों और संगठनों के बंद को लेकर प्रशासन की ओर से कोई भी सेवा बंद करने के आदेश नहीं हैं. इसलिए, सरकारी कार्यालय सामान्य समय में खुल सकते हैं, लेकिन हड़ताल-प्रदर्शन के चलते कुछ देरी हो सकती है.
इमरजेंसी सेवाएं बंद से बाहर
इमरजेंसी सेवाएं जैसे दूध व अन्य खाने पीने की चीजों, स्वास्थ्य सेवाएं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
बंद की वजह क्या है?
उत्तराखंड बंद का आह्वान करने वाले सियासी व सामाजिक संगठनों का कहना है कि अंकिता मर्डर केस की सीबीआई से सरकार जांच कराए. यह जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में होनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है, पर बंद को लेकर आंदोलन अब भी जारी है.
उत्तराखंड के लोगों का आरोप है कि न्याय अभी भी पूरा नहीं मिला है. कुछ VIP लिंक, सबूतों की मिट्टी और राजनीति ने इस मामले को तूल दे दिया है. यही वजह है कि अधिकांश राजनीतिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया है. प्रदेश के लोगों का सवाल है कि क्या बंद सफल होगा या सिर्फ symbolic रहेगा? क्या सीबीआई जांच निष्पक्ष होगी? VIP एंगल का सच सामने आएगा?
बंद को कोई औचित्य नहीं
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन चन्द्र वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद अब बंद का कोई औचित्य नहीं रह गया उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में सक्रिय हमारी 383 नगर इकाइयां को बंद में सहयोग के लिए लगातार अपीलें मिल रही थीं.
सिटिंग जज की देखरेख में हो जांच
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रवासी संगठनों ने प्रदेश सरकार द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति को सकारात्मक कदम बताया है. साथ ही इस जांच को सुप्रीम कोर्ट के किसी सिटिंग जज की देखरेख में कराए जाने की मांग की है. वरिष्ठ प्रवासी नेता हरिपाल रावत और धीरेंद्र प्रताप के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, सांसद अनिल बलूनी को ज्ञापन सौंपे गए है.
शांति बनाए रखने की अपील
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि अगर प्रदर्शनकारियों ने जबरन दुकान व बाजारों को बंद कराया तो पुलिस ऐसे लोगों से सख्ती से निपटेगी. आईजी राजीव स्वरूप ने कहा कि पुलिस-प्रशासन और शासन इस प्रक्रिया को लेकर बेहद गंभीर है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर ध्यान न दें.





