चमोली की नीती घाटी में बारिश का कहर! तमक नाला बना सैलाब, चंद सेकंड में बहा बैली ब्रिज; BRO ऑपरेटर लापता, कई गांवों से संपर्क टूटा
उत्तराखंड के चमोली की नीती घाटी में सोमवार को भारी बारिश के बाद तमक नाला अचानक उफान पर आ गया. तेज बहाव में BRO का करीब एक महीने पहले बनाया गया बैली ब्रिज चंद सेकंड में बह गया और एक वाहन भी पानी की चपेट में आ गया.
Chamoli Tamak Nala Flood: उत्तराखंड में मानसून के बीच पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है. चमोली जिले की नीती घाटी में सोमवार को अतिवृष्टि के बाद तमक नाला अचानक उफान पर आ गया. पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही सेकंड में सीमा सड़क संगठन यानी BRO की ओर से बनाया गया नया बैली ब्रिज बह गया.
घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसकी भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है. पानी के तेज बहाव में पुल का पूरा ढांचा देखते ही देखते बह गया. इसी दौरान वहां मौजूद एक वाहन भी पानी की चपेट में आकर बहता नजर आया.
करीब एक महीने पहले बना था बैली ब्रिज
तमक नाला ज्योतिर्मठ से करीब 37 किलोमीटर आगे नीती घाटी में स्थित है. पिछले साल भी नाले में अचानक आई बाढ़ के कारण यहां बना पक्का पुल बह गया था. इसके बाद आवाजाही के लिए ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी व्यवस्था की गई थी. इसके बाद BRO ने करीब एक महीने पहले यहां नया बैली ब्रिज तैयार किया था. यह पुल स्थानीय लोगों के साथ-साथ चीन सीमा से जुड़े सामरिक क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन सोमवार को दोबारा नाला उफान पर आने के बाद पुल तेज बहाव के सामने टिक नहीं पाया.
सुबह बारिश के बाद कम हुआ पानी, फिर शाम को आया सैलाब
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह ऊपरी इलाकों में तेज बारिश के बाद तमक नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया था. पानी पुल तक पहुंच गया. कुछ समय बाद जब जलस्तर कम हुआ तो पुल से मलबा और कचरा हटाकर आवाजाही सामान्य करने की कोशिश की गई, लेकिन शाम करीब चार बजे हालात फिर बिगड़ गए. नाला अचानक दोबारा उफान पर आया और इस बार पानी का वेग इतना ज्यादा था कि बैली ब्रिज कुछ ही सेकंड में बह गया.
BRO का एक ऑपरेटर लापता
हादसे के दौरान पुल के पास साइट पर काम कर रहा BRO का एक कर्मचारी पानी की चपेट में आने के बाद लापता बताया जा रहा है. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया. SDRF और NDRF की टीमें मौके के लिए रवाना की गई हैं. प्रशासन की प्राथमिकता लापता कर्मचारी की तलाश करने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाना है.
12 से ज्यादा सीमांत गांवों का संपर्क प्रभावित
तमक नाले पर पुल टूटने का सीधा असर नीती घाटी के कई सीमांत गांवों पर पड़ा है. जेलम, जुम्मा, मलारी, फरकिया, बाम्पा, गमशाली, नीती, कैलाशपुर, द्रोणागिरी और गरपक समेत 12 से ज् गांवों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है. यह इलाका रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है. नीती घाटी के सीमांत क्षेत्र में सेना और ITBP की कई चौकियां मौजूद हैं. पुल के बह जाने से इन चौकियों तक आने-जाने में भी परेशानी खड़ी हो गई है.
तीन बार अचानक बढ़ा पानी, वीडियो ने दिखाया सैलाब का मंजर
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में तमक गधेरे में अचानक तेज पानी आता दिखाई दे रहा है. वीडियो में पानी का बहाव इतना शक्तिशाली नजर आता है कि वाहन और पुल दोनों उसकी चपेट में आ जाते हैं. स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में एक के बाद एक कई बार अचानक पानी बढ़ा. इसी वजह से नाले का जलस्तर तेजी से ऊपर गया और कुछ ही देर में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए.
सेब की फसल को भी नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल सड़क और पुल तक सीमित नहीं है. तमक क्षेत्र में किसानों के सेब के बगीचों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है. तेज बारिश और नाले के उफान से कई जगह बगीचे प्रभावित हुए हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों की आमदनी बागवानी पर निर्भर रहती है. ऐसे में फसल को नुकसान किसानों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। प्रशासन की ओर से नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाना बाकी है.
प्रशासन ने क्या कहा?
ज्योतिर्मठ के SDM चंद्रशेखर वशिष्ठ के मुताबिक, ऊपरी क्षेत्र में हुई अतिवृष्टि के कारण तमक नाला अचानक उफान पर आया और बैली ब्रिज बह गया. उन्होंने BRO के मेजर से बातचीत का हवाला देते हुए एक ऑपरेटर के लापता होने की जानकारी दी. प्रशासन की ओर से SDRF और NDRF की टीमों को मौके पर भेजा गया है. साथ ही प्रभावित क्षेत्र में आवाजाही जल्द बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और रास्ते तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
आगे की चुनौती क्या है?
नीती घाटी जैसे संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण हालात बेहद तेजी से बदल सकते हैं. ऐसे में केवल पुल का दोबारा निर्माण करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए मजबूत वैकल्पिक रास्ते और आपदा प्रबंधन व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी है. फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का फोकस लापता BRO कर्मचारी की तलाश, प्रभावित गांवों तक संपर्क बहाल करने और बारिश के बीच लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है.




