पहले बद्रीनाथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम, फिर सेना से मांगी गई सफाई, अब दस्तावेजों ने खोला पूरा मामला, आखिर विवाद के पीछे क्या है पूरी कहानी?
बद्रीनाथ में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव को लेकर काफी विवाद जारी है. चमोली प्रशासन ने पत्र लिखकर सेना से जवाब मांगा है, लेकिन अब सामने आए दस्तावेजों से बड़ा खुलासा हुआ है.
बद्रीनाथ में आयोजित ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चमोली प्रशासन की ओर से भारतीय सेना से इस कार्यक्रम को लेकर सफाई मांगी थी. हालांकि, कई दिन बाद भी सेना के आधिकारिक चैनल को अब तक कोई जवाब नहीं मिला है. .
इस बीच चमोली प्रशासन के कुछ दस्तावेज सामने आए हैं. इन दस्तावेजों से पता चलता है कि प्रशासन खुद इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारियों और कॉर्डिनेशन में शामिल था. हालांकि, संगीत और डांस कार्यक्रमों को लेकर आलोचना होने के बाद प्रशासन ने कार्यक्रम से खुद को अलग करने की कोशिश की है.
सेना ने क्या कहा?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के सूत्रों ने कहा कि बद्रीनाथ में आयोजित कार्यक्रम सभी संबंधित पक्षों की जानकारी में हुआ था. जब सेना के एक अधिकारी से चमोली जिलाधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र पर प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कहा, “हमें अभी तक कोई संवाद प्राप्त नहीं हुआ है.”
कब हुआ था प्रोग्राम?
दो दिवसीय ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन 19 और 20 सितंबर को बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में किया गया था. यह कार्यक्रम सेना के ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत आयोजित हुआ था. इसमें चमोली जिला प्रशासन और उत्तराखंड पर्यटन विभाग भी सहयोगी थे.
क्या जानकारी आई सामने?
चमोली प्रशासन के अपने दस्तावेजों से पता चलता है कि कार्यक्रम के कॉर्डिनशन की जिम्मेदारी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी को दी गई थी. चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने 8 सितंबर को एक आदेश जारी किया था. इसमें कहा गया था कि ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन 19 और 20 सितंबर को प्रस्तावित है. इस आदेश में चमोली के मुख्य विकास अधिकारी को कार्यक्रम का नोडल अधिकारी बनाया गया था.
आदेश में कहा गया था, “आपसे अनुरोध है कि निर्धारित तारीख और समय पर बैठक में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें और महोत्सव की व्यवस्थाओं को लेकर होने वाली चर्चा में हिस्सा लें.” इसी दिन जारी एक दूसरे पत्र में भी सेना के पत्राचार का जिक्र किया गया था. इसमें पुलिस, स्वास्थ्य, पर्यटन, परिवहन, आपूर्ति, खेल और अन्य विभागों के अधिकारियों की सूची भी शामिल थी.
सेना से क्यों मांगी गई सफाई?
इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह मामला उस पत्र के संदर्भ में और महत्वपूर्ण हो गया है, जो चमोली के जिलाधिकारी ने बाद में 56 APO, गढ़वाल राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को भेजा था. इस पत्र में जिलाधिकारी ने कार्यक्रम को लेकर सेना से स्पष्टीकरण मांगा था.
पत्र में क्या लिखा गया है?
पत्र में कहा गया, “हमें अलग-अलग माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जानकारी मिली है कि आपके द्वारा श्री बद्रीनाथ धाम में एक सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया.” जिलाधिकारी ने कर्नल शांतनु से पूछा कि क्या बद्रीनाथ धाम में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति ली गई थी. अगर अनुमति ली गई थी तो यह अनुमति किस अधिकारी या संस्था से ली गई थी, इसकी जानकारी भी मांगी गई. पत्र में यह भी पूछा गया कि कार्यक्रम के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं और वहां तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल क्यों किया गया.
कर्नल शांतनु ने इस मामले पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया.
जिलाधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र में बद्रीनाथ को “पवित्र धार्मिक स्थल” बताया गया. पत्र में कहा गया कि तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल मंदिर की पवित्रता के अनुरूप नहीं था. इससे नियमित पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों पर भी असर पड़ सकता है. पत्र में आगे कहा गया, “आपसे यह भी अनुरोध है कि भविष्य में श्री बद्रीनाथ धाम में इस तरह की घटना दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करें.” चमोली के जिलाधिकारी से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
कार्यक्रम के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इस पर विवाद शुरू हुआ था. इनमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान संगीत और डांस के दृश्य दिखाई दिए. कार्यक्रम के पहले दिन उत्तराखंड की गायिका प्रियंका मेहर की प्रस्तुति भी हुई थी. उनकी प्रस्तुति में संगीत और डांस शामिल था और इसी के साथ महोत्सव के पहले दिन के कार्यक्रम का समापन हुआ था. इन प्रस्तुतियों को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई. पूर्व बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताने वालों में शामिल थे.




