फर्जी वसीयत और डेथ सर्टिफिकेट दिखाकर कमलनाथ की जमीन के साथ बिजनौर में हो गया खेला! 10 Point में जानिए पूरी कहानी
बिजनौर में कमलनाथ की पैतृक जमीन हड़पने के लिए कथित फर्जी वसीयत और डेथ सर्टिफिकेट का इस्तेमाल हुआ. जानिए 10 पॉइंट में पूरा मामला.
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की पैतृक जमीन को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. आरोप है कि उनकी पैतृक जमीन पर कब्जे के लिए फर्जी वसीयत और डेथ सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज तैयार किए गए और फिर इन्हीं के आधार पर जमीन के मालिकाना हक को बदलने की कोशिश की गई. मामला तब सामने आया जब कमलनाथ ने अपनी पैतृक जमीन पर विरासत दर्ज कराने के लिए तहसील में आवेदन किया.
जांच के दौरान अधिकारियों को पहले से चल रहे एक मुकदमे में ऐसे दस्तावेज मिले, जिन पर सवाल खड़े हुए. शिकायत के मुताबिक, कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को दिल्ली में हुआ था, जबकि मामले में 10 अप्रैल 2003 का कथित डेथ सर्टिफिकेट लगाया गया था. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी के फरार होने की बात सामने आई है. अब पुलिस पूरे कथित जमीन कब्जा नेटवर्क की जांच कर रही है.
1. कहां की है पूरी कहानी?
पूरा मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव का है. यहां गाटा संख्या 429 में कमलनाथ के पिता स्वर्गीय महेंद्रनाथ की पैतृक जमीन दर्ज होने की बात शिकायत में कही गई है. पुलिस के मुताबिक, जमीन के एक हिस्से को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम कराने की कोशिश की गई.
2. कमलनाथ के परिवार के पास कितनी जमीन है?
दिए गए पुलिस और शिकायत संबंधी विवरण के मुताबिक, महेंद्रनाथ के नाम करीब 90 बीघा जमीन बताई गई है. एसपी केके बिश्नोई के अनुसार, करीब 36 बीघा जमीन को कथित फर्जीवाड़े के जरिए हड़पने का प्रयास किया गया था. हालांकि शुरुआती विवरण में 26 बीघा हिस्से का भी उल्लेख है, इसलिए जमीन के सटीक हिस्से को लेकर आधिकारिक जांच के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार जरूरी है.
3. जमीन पर किसकी नजर थी?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धर्मपाल सिंह, जसबिंदर सिंह ढिल्लों, विजय शंकर पांडे और क्षेत्रीय लेखपाल डेविड कुमार समेत अन्य लोगों ने आपस में मिलीभगत कर जमीन पर कब्जे की कोशिश की. आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का मालिकाना हक बदलने की योजना बनाई गई.
4. पूरा मामला खुला कैसे?
मामला तब सामने आया जब कमलनाथ ने 18 मई 2026 को अपनी पैतृक जमीन पर विरासत दर्ज कराने के लिए तहसील में आवेदन किया. आवेदन की प्रक्रिया में जमीन से जुड़ा विवाद सामने आया. इसके बाद संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट और तहसील में चल रहे पुराने मामले की जांच की गई.
5. तहसील में कौन सा मुकदमा चल रहा था?
जांच में 'धर्मपाल बनाम ग्राम सभा' नाम से एक मामला सामने आया. इसी मामले में जमीन पर मालिकाना हक साबित करने के लिए कुछ दस्तावेज लगाए गए थे. इन्हीं दस्तावेजों में कथित फर्जी वसीयत और डेथ सर्टिफिकेट शामिल थे.
6. फर्जी वसीयत का खेल क्या था?
एफआईआर के मुताबिक, महेंद्रनाथ के नाम से एक कथित फर्जी और अपंजीकृत वसीयत पेश की गई. शिकायत में इस दस्तावेज को जाली बताया गया है. आरोप है कि इसी वसीयत के जरिए जमीन पर एक नया मालिकाना हक दिखाने की कोशिश की गई.
7. डेथ सर्टिफिकेट में क्या गड़बड़ी मिली?
मामले में 10 अप्रैल 2003 का एक कथित डेथ सर्टिफिकेट लगाया गया था, जिसे नजीबाबाद से जारी बताया गया. कमलनाथ की शिकायत के मुताबिक उनके पिता महेंद्रनाथ की वास्तविक मृत्यु 7 सितंबर 2004 को नई दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में हुई थी. यानी शिकायत के मुताबिक डेथ सर्टिफिकेट में बताई गई तारीख वास्तविक मृत्यु से करीब डेढ़ साल पहले की थी.
8. फर्जी दस्तावेजों के बाद आगे क्या करने की तैयारी थी?
शिकायत के मुताबिक, कथित फर्जी वसीयत, डेथ सर्टिफिकेट और दूसरे दस्तावेजों के जरिए जमीन का मालिकाना हक अपने नाम कराने की कोशिश की गई. आरोप यह भी है कि जमीन अपने नाम कराने के बाद उसे बेचने की योजना थी. पुलिस अब इसी कथित प्रक्रिया की पूरी कड़ी की जांच कर रही है.
9. पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की?
बिजनौर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है. एसपी केके बिश्नोई के मुताबिक, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी के फरार होने की जानकारी दी गई है. पुलिस अन्य नामजद आरोपियों और कथित तौर पर पर्दे के पीछे शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
10. क्या यह सिर्फ कमलनाथ की जमीन का मामला है?
पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला समूह दूसरी संपत्तियों को लेकर भी इसी तरह की कोशिश कर चुका है. कमलनाथ की शिकायत में भी आरोप लगाया गया है कि इस गिरोह ने दूसरी संपत्तियों से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं. अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि यह मामला सिर्फ एक जमीन तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था.




