छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच क्या है महानदी जल विवाद? दोनों राज्यों के बीच बातचीत हुई तेज, अब 13-15 अक्टूबर को होगी अहम बैठक
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच दशकों पुराने महानदी जल विवाद के समाधान की प्रक्रिया तेज होने का दावा ओडिशा CM मोहन चरण माझी ने किया है. दोनों राज्यों ने प्रस्ताव और जरूरी दस्तावेज सौंप दिए हैं, जबकि 13 अक्टूबर को तकनीकी समिति और 15 अक्टूबर को ट्रिब्यूनल की सुनवाई अहम होगी.
Mahanadi Water Dispute: महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब समाधान की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कहा कि विवाद के समाधान की प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है. केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी मदद से दोनों राज्यों के बीच बातचीत जारी है.
माझी ने कहा कि 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद तीन महीने के भीतर विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई थी. अब दो महीने पूरे हो चुके हैं और उनके मुताबिक प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर आगे बढ़ रही है. बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद थे.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने क्या कहा?
- माझी के मुताबिक, दोनों राज्यों के बीच बातचीत सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई. उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनने के बाद महानदी विवाद के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आई है. कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं.
- माझी ने महानदी को ओडिशा की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि राज्य के करोड़ों लोगों की जिंदगी और आजीविका इससे जुड़ी है. उन्होंने बैठक में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति से जुड़े मुद्दे उठाए और ओडिशा की इन जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
- ओडिशा के मुख्यमंत्री के अनुसार, दोनों राज्य अपने-अपने प्रस्ताव और मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर चुके हैं. अब इन्हीं दस्तावेजों और प्रस्तावों के आधार पर समाधान का ढांचा तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
- माझी ने उम्मीद जताई कि जल्द ही विवाद के समाधान का अंतिम ढांचा सामने आ सकता है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की कोशिश हो रही है.
छत्तीसगढ़ के सीएम ने क्या कहा?
- बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी महानदी विवाद को लेकर अपने राज्य का पक्ष रखा. छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, साय ने कहा कि महानदी दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी होनी चाहिए, न कि उनके बीच विवाद का कारण. उन्होंने निष्पक्षता, वैज्ञानिक आकलन, पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थिरता के आधार पर 'विन-विन' समाधान की जरूरत बताई.
- साय ने कहा कि किसी भी समाधान में दोनों राज्यों के किसानों, आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा होनी चाहिए.
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और नदी का आधे से अधिक कैचमेंट क्षेत्र राज्य में आता है. इसलिए किसी भी समझौते में छत्तीसगढ़ के किसानों, सिंचाई व्यवस्था और आदिवासी क्षेत्रों की पानी की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.
13 और 15 अक्टूबर को क्या होगा?
महानदी जल विवाद को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी जारी है. दोनों राज्यों ने ट्रिब्यूनल को बताया है कि विस्तारित तकनीकी समिति की बैठक 13 अक्टूबर को प्रस्तावित है. इसके दो दिन बाद, 15 अक्टूबर 2026 को महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की अगली सुनवाई निर्धारित है. इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी कर रही हैं. दोनों मुख्यमंत्रियों ने विवाद के समाधान के प्रयासों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया. माझी ने उम्मीद जताई कि महानदी विवाद का समाधान भविष्य में दूसरे राज्यों के बीच जल विवाद सुलझाने के लिए भी एक मॉडल बन सकता है.
क्या है महानदी जल विवाद?
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद महानदी के पानी के बंटवारे, ऊपरी हिस्सों में बैराज (बांध) के निर्माण और गैर-मानसून महीनों में पानी के प्रवाह को लेकर राज्यों के बीच चल रहा विवाद है. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महानदी और उसकी सहायक नदियों पर एकतरफा ढंग से कई बैराज और औद्योगिक जल परियोजनाएं बनाई गई हैं.
ओडिशा का आरोप है कि इन ऊपरी परियोजनाओं के कारण गैर-मानसून या कम पानी वाले मौसम में नदी के निचले हिस्से में पानी का बहाव बहुत कम हो जाता है. इससे राज्य में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, मछली पालन, उद्योगों और ओडिशा की जीवनरेखा कहा जाने वाले प्रसिद्ध हीराकुंड बांध सूख जाएगा.
छत्तीसगढ़ का तर्क है कि वह अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल अपने किसानों, सिंचाई और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए कर रहा है. बता दें कि यह मामला साल 2018 से महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Tribunal) के पास लंबित है. वैसे यह विवाद 1983 से चल रहा है.




