World Yoga Day Special: कौन हैं ‘योगा क्वीन’ निकिता गौतम, जो दुनिया को बता रहीं सेहत का मंत्र? मां की बीमारी ने बदली जिंदगी
नोएडा की निकिता गौतम की कहानी योग की ताकत और मां-बेटी के रिश्ते की एक प्रेरणादायक मिसाल है. मां की बीमारी को ठीक करने के लिए योग सीखने वाली निकिता आज खुद योग प्रशिक्षक बनकर देश-विदेश में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दे रही हैं.
Noida Yoga Queen Nikita Gautam
World Yoga Day Special: हर साल 21 जून को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है. योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कई लोगों की जिंदगी बदलने का भी काम करता है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है नोएडा की बेटी और ‘योग क्वीन’ के नाम से पहचान बनाने वाली निकिता गौतम की, जिन्होंने अपनी बीमार मां को स्वस्थ करने के लिए योग सीखना शुरू किया और आज देश-विदेश में योग सत्र आयोजित कर रही हैं.
कौन हैं निकिता गौतम?
निकिता गौतम नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव की रहने वाली हैं. वह अपने परिवार की सबसे बड़ी बेटी हैं. बचपन से ही उनकी रुचि योग में थी. स्कूल के दिनों में ही निकिता ने योग प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. महज 16 वर्ष की उम्र में वह नियमित रूप से योग कार्यक्रमों में भाग लेने लगी थीं.
निकिता ने क्या-क्या बताया?
- निकिता बताती हैं कि उनकी मां को अचानक ब्लड प्रेशर और थायराइड जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो गई थीं. परिवार मां की सेहत को लेकर काफी चिंतित था. इसी दौरान निकिता के मन में अपनी मां को योग कराने का विचार आया. उन्होंने योग सीखना शुरू किया और नियमित रूप से अपनी मां को योगाभ्यास करवाने लगीं.
- कुछ ही समय में निकिता की मां की सेहत में काफी सुधार दिखाई देने लगा. स्वास्थ्य में हुए इस सुधार ने निकिता को योग की शक्ति का एहसास कराया और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.
- निकिता ने बताया कि उनका सपना सरकारी नौकरी हासिल करने का था. इसके लिए वह लगातार तैयारी कर रही थीं और कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी दी थीं. कुछ परीक्षाओं में उन्हें सफलता भी मिली थी, जबकि कुछ परीक्षाएं बाकी थीं, लेकिन मां की खराब तबीयत के कारण वह कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं नहीं दे सकीं. जब उन्होंने देखा कि योग से उनकी मां के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, तो उन्होंने योग को ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया.
- योग के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाते हुए निकिता ने उत्तराखंड से योग में ग्रेजुएशन किया. वर्तमान में वह योग में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही हैं. अपनी मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने योग के क्षेत्र में खास पहचान बनाई है और आज विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी योगा सेशन आयोजित कर रही हैं.
- निकिता मुस्कुराते हुए कहती हैं कि वह Gen-Z जरूर हैं, लेकिन उन युवाओं जैसी नहीं हैं जिनकी सुबह दोपहर 12 बजे होती है. वह भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई हैं.
- निकिता ने कहा, "मेरी सुबह जल्दी शुरू होती है. मैं नियमित योग करती हूं और लोगों को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हूं। दोपहर 12 बजे मेरे लिए सुबह नहीं बल्कि दोपहर ही होती है."
- विश्व योग दिवस के अवसर पर निकिता ने युवाओं और नोएडा जैसे व्यस्त शहरों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपने स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट योग के लिए जरूर निकालें. उन्होंने कहा, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग बहुत जरूरी है. युवा तो योग कर ही रहे हैं, लेकिन बच्चों को भी छोटी उम्र से योग की आदत डालनी चाहिए, ताकि वे बड़े होकर शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें.




