पिता रहे IPS, अब बेटी ने ACP बनते ही सुलझा डाला आगरा का बाथरूम हत्याकांड, कौन हैं DSP अमीषा?
आगरा में पति को मारकर शव को बाथरूम में छिपाने वाली पत्नी रूबी शर्मा अब जेल में है, इस केस को सुलझाने में आगरा की एसीपी अमीषा ने अहम भूमिक निभाई है.
Amisha ACP Agra
उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए पति की हत्या और शव को बाथरूम में दफनाने के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है. सिकंदरा थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात में आरोपी पत्नी रूबी शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. लंबे समय तक गुमशुदगी का मामला समझे जा रहे इस केस का खुलासा पुलिस की गहन जांच के बाद हुआ.
इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में आगरा की सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अमीषा की भूमिका अहम रही. उन्होंने गहरी जांच, पूछताछ और तथ्यों के विश्लेषण के आधार पर पूरे मामले की परतें खोलीं. खास बात यह है कि अमीषा उत्तर प्रदेश पुलिस के 2022 बैच की डीएसपी हैं और यह उनके करियर का पहला ऐसा मामला था, जिसमें हत्या के बाद शव को घर के बाथरूम में छिपाया गया था.
कौन हैं DSP अमीषा?
मामले को सुलझाने वाली एसीपी अमीषा की कहानी भी प्रेरणादायक है. उनका जन्म 12 मई 1997 को लखनऊ में हुआ. उनके पिता विनोद कुमार सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में आईपीएस अधिकारी रहे हैं. पिता से प्रेरणा लेकर अमीषा ने भी पुलिस सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और साल 2022 में डीएसपी पद पर चयनित हुईं. इससे पहले वह नायब तहसीलदार के रूप में भी आगरा में सेवाएं दे चुकी हैं. डीएसपी बनने के बाद उनकी पहली नियुक्ति आगरा ग्रामीण में हुई और बाद में फरवरी 2025 में उन्हें आगरा शहर का सहायक पुलिस आयुक्त बनाया गया.
पहली ही पोस्टिंग में कैसे सुलझाया केस?
एसीपी अमीषा ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस के 2022 बैच की डीएसपी हैं और 14 फरवरी 2025 से आगरा में सहायक पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं. आगरा शहर में यह उनकी पहली पोस्टिंग है और इसी दौरान उन्हें यह चुनौतीपूर्ण हत्याकांड मिला, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. एसीपी के अनुसार, 26 मई 2026 को रूबी शर्मा और मृतक सुरेंद्र शर्मा के भाई अनिल शर्मा ने सिकंदरा थाने में सुरेंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि सुरेंद्र अचानक लापता हो गए हैं और उनका कोई सुराग नहीं मिल रहा है.
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. एसीपी अमीषा स्वयं घटनास्थल पर पहुंचीं और आरोपी पत्नी, पड़ोसियों तथा परिजनों से पूछताछ की. शुरुआती जांच में किसी को भी रूबी शर्मा पर शक नहीं था, जिससे मामला और अधिक उलझता चला गया.
कौनसी घटना बनी जांच की अहम कड़ी?
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 15 और 16 मई 2026 को सुरेंद्र शर्मा राजस्थान के भरतपुर स्थित रिश्तेदारों के यहां गए थे. वहां शराब के नशे में उनका विवाद हुआ था. रिश्तेदारों ने इस घटना की जानकारी फोन पर रूबी शर्मा को दी थी और पुलिस कार्रवाई की बात भी कही थी. इसके बाद सुरेंद्र आगरा लौट आए, लेकिन 18 मई के बाद से वह किसी को दिखाई नहीं दिए. आसपास के लोगों ने जब भी उनके बारे में पूछा, तो रूबी शर्मा सामान्य व्यवहार करते हुए यही कहती रही कि वह किसी काम से बाहर गए हैं.
एसीपी अमीषा के मुताबिक, पूछताछ के दौरान रूबी शर्मा ने स्वीकार किया कि उसने पूरी वारदात अकेले अंजाम दी. उसके अनुसार, भरतपुर की घटना के बाद उसे डर था कि पुलिस उसके घर आएगी और परिवार को कानूनी कार्रवाई व अदालत के चक्कर लगाने पड़ेंगे. रूबी ने पुलिस को बताया कि सुरेंद्र के घर लौटने पर उसने खाने में 15 से 20 नींद की गोलियां मिला दीं. जब वह गहरी नींद में सो गए, तब उनकी हत्या कर दी. पुलिस के अनुसार, आरोपी ने शव को छिपाने के लिए कई चरणों में योजना बनाई, जिसके कारण लंबे समय तक किसी को हत्या की भनक नहीं लगी.




