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अंग्रेजी जैसे होंगे देशी शराब के ठेके, अब कई ब्रांड में मिलेगी दारू, यूपी की नई आबकारी नीति से क्या-क्या हुए बदलाव?

उत्तर प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होते ही देशी शराब के कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जिससे सिंडीकेट सिस्टम पर रोक लगेगी और ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा विकल्प मिलेंगे.

UP Excise Policy 2026
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UP Excise Policy 2026

( Image Source:  AI: Sora )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर3 Mins Read

Updated on: 21 April 2026 11:56 AM IST

उत्तर प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होते ही देशी शराब के कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से लंबे समय से चले आ रहे सिंडीकेट सिस्टम पर रोक लगेगी और ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा विकल्प मिलेंगे. अब तक देशी शराब की दुकानों पर सीमित ब्रांड्स का ही दबदबा था,

लेकिन नई नीति के बाद यह स्थिति पूरी तरह बदलने वाली है. सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब एकाधिकार खत्म होगा और छोटे व नए ब्रांड्स को भी बराबरी का मौका मिलेगा. अगर कोई दुकानदार इसको फॉलो नहीं करता है तो उसपर जुर्माना भी लग सकता है.

क्या है नई आबकारी नीति?

यूपी की नई आबकारी नीति के तहत देशी शराब की कीमतें 5 से 8 रुपये बढ़ गई है. इसके अलावा अंग्रेजी शराब की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी से होगा. वहीं ब्रांड एकाधिकार भी खत्म होगा.

क्या है सबसे बड़ा बदलाव?

नई आबकारी नीति के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि दुकानदार अब केवल एक या दो ब्रांड तक सीमित नहीं रह सकते. रिपोर्ट के अनुसार, अब दुकानों पर कम से कम 25 प्रतिशत अन्य या नए ब्रांड का स्टॉक रखना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और बाजार में किसी एक ब्रांड का दबदबा खत्म होगा. पहले देशी शराब के कारोबार में कुछ चुनिंदा ब्रांड्स का वर्चस्व था, जिससे सिंडीकेट जैसी स्थिति बन गई थी. इसको लेकर ही ये बदलाव देखने को मिला है.

उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?

सरकार ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कड़े दंड का प्रावधान भी किया है. अगर कोई दुकानदार तय 25 प्रतिशत अन्य ब्रांड का स्टॉक नहीं रखता है, तो उस पर प्रति लीटर 64 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

किन-किन चीजों पर लगी रोक?

नई नीति में व्यापारिक नियमों को भी सख्त किया गया है. पहले शराब कंपनियां थोक और खुदरा विक्रेताओं को अलग-अलग तरह के ऑफर और छूट देती थीं, लेकिन अब इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. यदि किसी भी तरह के ऑफर देने की पुष्टि होती है, तो उस दुकान का लाइसेंस को रद्द किया जा सकता है.

और क्या हुआ बदलाव?

भुगतान प्रणाली में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहले दुकानदार थोक गोदाम से माल उठाकर बाद में भुगतान करते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है. अब दुकानदारों को पहले पोर्टल पर भुगतान करना होगा, उसके बाद ही पूरा माल दिया जाएगा.

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