करोड़ों के फ्लैट, लेकिन पानी ज़हरीला, Noida में न हो जाए Indore जैसा हाल!
नोएडा सेक्टर 29 में इंदौर जैसा पानी का हाल देखने को मिल रहा है. निवासियों ने शिकायत की है कि पानी में कीड़े मिल रहे हैं और पानी बिल्कुल भी पीने लायक नहीं है.
Noida Water Contamination: नोएडा के सेक्टर-29 स्थित ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट्स में सामने आई जल-संकट की तस्वीर सिर्फ एक रिहायशी सोसाइटी की शिकायत नहीं है, बल्कि यह उस शहरी व्यवस्था पर सवाल है जो ‘सुरक्षित पानी’ को अब भी एक बुनियादी अधिकार की तरह सुनिश्चित नहीं कर पा रही. यह संकट तब और गंभीर हो जाता है जब इसकी तुलना हाल के हफ्तों में इंदौर में सामने आए वॉटर कंटैमिनेशन मामलों से की जाए. इस हादसे में दर्जनों लोग बीमार पड़े थे और 1 दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट्स कोई अवैध बस्ती नहीं है. यह एक गेटेड सोसाइटी है, जहां रिटायर्ड डिफेंस ऑफिसर्स, वरिष्ठ प्रोफेशनल्स और उनके परिवार रहते हैं. यहां फ्लैट्स की कीमतें करोड़ों में हैं, लेकिन इसके बावजूद निवासी जिस पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, वही उनकी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. सोशल मीडिया पर इस सोसाइटी से जुड़ी कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें पानी में साफ तौर पर कीड़े दिखाई दे रहे हैं.
क्या नोएडा में पहले भी आया ऐसा मामला?
नोएडा की बड़ी सोसाइटियों में ऐसा मामला सामने आ चुका है. इको विलेज-2 और अजनारा होम्स में कुछ महीनों पहले गंदे पानी की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया था. इस मामले में अजनारा सोसाइटी को 25 लाख का फाइन भी देना पड़ा था.
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क्या ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट्स में लोग पड़ रहे हैं बीमार?
रिपोर्ट के मुताबिक सोसाइटी के लगभग हर घर में पेट से जुड़ी बीमारियां, लगातार थकान, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और त्वचा पर फोड़े-फुंसियों की शिकायतें आम हो चुकी हैं. डॉक्टरों ने कई मामलों में इन बीमारियों को सीधे पानी की क्वालिटी से जोड़ा है. हालात ऐसे हैं कि लोगों को सलाह दी जा रही है कि जब प्रदूषण बढ़े तो पानी का इस्तेमाल ही बंद कर दें.
कब तक रहेगा ये संकट?
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से जुड़े सदस्य बताते हैं कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है. साल के कुछ महीनों में खारा पानी आना यहां की ‘सामान्य स्थिति’ बन चुकी है. लोग पहले से पानी जमा करते हैं, पीने के लिए RO पर निर्भर रहते हैं और बाकी कामों के लिए समझौता करते हैं.
पानी में दिखने लगे कीड़े
सोसाइटी में रहने वालों के मुताबिक, नलों से निकलने वाले पानी में मरे और जिंदा कीड़े दिखाई दिए. यह स्थिति सिर्फ पाइपलाइन लीकेज या मिट्टी घुसने से नहीं समझाई जा सकती. विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में कीड़ों की मौजूदगी किसी गंभीर सड़न या लंबे समय से रुके हुए दूषित स्रोत की ओर इशारा करती है.
प्रशासन की सलाह से क्यों गुस्सा हुए लोग?
जल विभाग की ओर से दी गई सलाह ने नाराज़गी और बढ़ा दी है. अधिकारियों ने पानी उबालने और 10-15 मिनट तक नल खुला छोड़ने को कहा है. यह वही प्रशासन है जो पानी बचाने की अपील करता है, लेकिन दूषित पानी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर पानी बहाने की सलाह दे रहा है.
इंदौर की याद दिलाता नोएडा का संकट
नोएडा की यह स्थिति इंदौर में हुए जल-प्रदूषण के मामलों की याद दिलाती है, जहां दूषित पानी की सप्लाई के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े थे और 15 लोगों की मौत हुई थी. वहां भी शुरुआती चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया, और हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया. दोनों शहरों में समानता साफ है जैसे यहां इस समस्या को अंदेखा किया जा रहा है, वैसे ही वहां भी इस दिक्कत को नजरअंदाज किया जा रहा था.





