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ऑनलाइन इंटरव्यू, फर्जी ऑफर लेटर और एयरपोर्ट जॉब का झांसा...नोएडा में ऐसे चल रहा था बड़ा साइबर फ्रॉड; पुलिस ने पांच को दबोचा

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और बड़ी एविएशन कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.

ऑनलाइन इंटरव्यू, फर्जी ऑफर लेटर और एयरपोर्ट जॉब का झांसा...नोएडा में ऐसे चल रहा था बड़ा साइबर फ्रॉड; पुलिस ने पांच को दबोचा
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मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा4 Mins Read

Published on: 12 July 2026 12:21 PM

नोएडा की साइबर क्राइम पुलिस ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत प्रतिष्ठित एविएशन कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने सेक्टर-22 स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कॉल सेंटर "LAMBODAR INSTITUTE" के नाम से संचालित किया जा रहा था. इसकी जानकारी डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने दी. पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि यह कार्रवाई प्रतिबिंब पोर्टल से मिली सटीक सूचना, तकनीकी विश्लेषण, सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस के आधार पर की गई. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बेरोजगार युवाओं को एविएशन कंपनियों और ट्रेनिंग संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे अलग-अलग चरणों में पैसे वसूलते थे.

कैसे करते थे आरोपी लोगों से संपर्क?

डीसीपी साइबर ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को Nimbus, Star Airways, Aerofly Aviation Academy, Future Academy Training & Aviation और Core Aviation जैसी संस्थाओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे. इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू, चयन, ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन, ट्रेनिंग, मेडिकल, यूनिफॉर्म, सिक्योरिटी डिपॉजिट, रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर हजारों से लाखों रुपये तक की रकम वसूलते थे.

कैसे मंगवाए जाते थे आवेदन?

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने आगे बताया कि आरोपियों ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से संबंधित एक फर्जी वेबसाइट भी तैयार कर रखी थी. इस वेबसाइट के जरिए नौकरी और अन्य सेवाओं के नाम पर आवेदन मंगवाकर लोगों से ठगी की जाती थी. इसके अलावा कई एविएशन संस्थानों के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर फर्जी ऑफर लेटर और प्रमाण-पत्र तैयार किए जाते थे, ताकि अभ्यर्थियों को आसानी से झांसे में लिया जा सके.

ठगी से प्राप्त रकम अलग-अलग म्यूल (Mule) बैंक खातों में मंगाई जाती थी और बाद में आरोपियों के बीच बांट दी जाती थी. इस मामले में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी कई शिकायतें दर्ज मिली हैं. थाना साइबर क्राइम, नोएडा में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है.

आरोपियों के पास से क्या जब्त हुआ?

आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 6 लैपटॉप, एक सीपीयू, 10 सक्रिय सिम कार्ड, 5 हेडफोन, 2 चेकबुक, 4 डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, दो कंपनियों की मोहर, 13 फर्जी एविएशन प्रमाण-पत्र, बड़ी संख्या में फर्जी ऑफर लेटर और एडमिशन कन्फर्मेशन लेटर, 76 पन्नों का कॉलिंग डेटा, कॉलिंग स्क्रिप्ट, अभ्यर्थियों का विवरण, डायरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए गए हैं.

डीसीपी साइबर का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच जारी है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि देशभर में कितने लोगों को इस गिरोह ने अपना शिकार बनाया.

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