स्कूल में बनाया विमान, हार्वर्ड में रचा इतिहास... जानिए क्यों 'नेक्स्ट आइंस्टीन' कहलाती हैं Sabrina Gonzalez Pasterski
14 साल की उम्र में खुद विमान बनाया, MIT में टॉप किया और हार्वर्ड में ब्लैक होल व क्वांटम ग्रैविटी पर शोध किया. जानिए Sabrina Gonzalez Pasterski की प्रेरक कहानी.
दुनिया में ऐसे वैज्ञानिक बहुत कम हुए हैं, जिन्होंने किशोरावस्था में ही अपनी प्रतिभा से विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया हो. अमेरिका की भौतिक विज्ञानी सबरिना गोंजालेज पास्टर्सकी (Sabrina Gonzalez Pasterski) उन्हीं चुनिंदा नामों में शामिल हैं. 14 साल की उम्र में अपने हाथों से विमान बनाकर उसे उड़ाने वाली सबरीना आज ब्लैक होल, क्वांटम ग्रैविटी और स्पेस-टाइम जैसे भौतिकी के सबसे जटिल रहस्यों पर शोध कर रही हैं.
सबरिना गोंजालेज पास्टर्सकी (Sabrina Gonzalez Pasterski) के वैज्ञानिक कार्यों का जिक्र दिवंगत स्टीफन हॉकिंग ने भी किया था. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया उन्हें अक्सर 'नेक्स्ट आइंस्टीन' कहता है. हालांकि, यह कोई आधिकारिक उपाधि नहीं, बल्कि उनकी असाधारण वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक माना जाता है.
9 साल की उम्र में कैसे दिमाग में जगा साइंस का सपना?
सबरिना का जन्म 1993 में अमेरिका के शिकागो में हुआ. बचपन से ही उन्हें गणित, मशीनों और उड़ान में गहरी दिलचस्पी थी. जहां अधिकांश बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, वहीं सबरीना हवाई जहाजों की बनावट, इंजन और एयरोडायनामिक्स को समझने में समय बिताती थीं. परिवार ने भी उनकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित किया. यही शुरुआती माहौल आगे चलकर उन्हें विज्ञान और विमानन की दुनिया में ले गया.
14 साल की उम्र में प्लेन कैसे बना दिया?
महज 12 साल की उम्र में सबरीना ने Zenith CH 601 XL नाम के सिंगल-इंजन विमान की किट खरीदकर उसे जोड़ना शुरू किया. लगभग दो वर्षों तक उन्होंने हर पुर्जे को स्वयं असेंबल किया. 14 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले ही विमान तैयार हो गया और बाद में उन्होंने उसी विमान को स्वयं उड़ाया. उस समय वे कार चलाने की कानूनी उम्र तक भी नहीं पहुंची थीं, लेकिन विमान उड़ाकर उन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यही उपलब्धि उनके करियर का पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी.
MIT में दाखिला कैसे मिला?
दिलचस्प बात यह है कि सबरीना ने सबसे पहले हार्वर्ड कॉलेज में आवेदन किया था, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने MIT में आवेदन किया. जब MIT के प्रोफेसरों ने उनके द्वारा बनाया गया विमान और तकनीकी क्षमता देखी, तो उन्हें वेटिंग लिस्ट से एडमिशन दे दिया गया. यह फैसला उनके अकादमिक रिकॉर्ड के साथ-साथ उनकी व्यावहारिक इंजीनियरिंग क्षमता को देखकर लिया गया.
MIT में कौन-सा रिकॉर्ड बनाया?
MIT पहुंचने के बाद भी सबरीना की रफ्तार नहीं रुकी. उन्होंने केवल तीन वर्षों में फिजिक्स की डिग्री पूरी की और 5.0 GPA के साथ विभाग की टॉपर बनीं. लगभग दो दशकों बाद वह MIT के फिजिक्स विभाग में सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाली पहली महिला बनीं. उन्हें प्रतिष्ठित Orloff Scholarship भी मिली. यह उपलब्धि बताती है कि उनकी प्रतिभा केवल प्रयोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि सैद्धांतिक भौतिकी में भी उनका प्रदर्शन असाधारण था.
हार्वर्ड में ऐसा क्या शोध किया?
MIT के बाद सबरीना ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की. वहां उन्होंने प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी एंड्रयू स्ट्रॉमिंगर के मार्गदर्शन में शोध किया. उनका प्रमुख शोध स्पिन मेमोरी इफेक्ट (Spin Memory Effect), ग्रेविटेशनल वेव्स, स्पेस-टाइम, ब्लैक होल और क्वांटम ग्रैविटी जैसे विषयों पर केंद्रित रहा. उनका काम यह समझने की कोशिश करता है कि ब्रह्मांड में गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम दुनिया एक-दूसरे से कैसे जुड़ते हैं.
स्टीफन हॉकिंग ने क्यों किया जिक्र?
सबरिना का शोध केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहा. उनके और उनकी टीम के वैज्ञानिक शोध का उल्लेख दिवंगत वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने अपने अंतिम शोधपत्रों में किया था. किसी युवा वैज्ञानिक के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में पहचान मिली और उनके शोध को गंभीरता से देखा जाने लगा.
लाखों डॉलर के ऑफर क्यों ठुकराए?
रिपोर्टों के अनुसार, सबरीना को NASA, Jeff Bezos की अंतरिक्ष कंपनी Blue Origin और Brown University समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों से आकर्षक अवसर मिले. मीडिया रिपोर्ट्स में लगभग 1.1 मिलियन डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपये) तक के अकादमिक पैकेज का भी जिक्र मिलता है. लेकिन उन्होंने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया. उनका मानना था कि उनका लक्ष्य आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के सबसे कठिन वैज्ञानिक प्रश्नों का समाधान खोजना है.
आज किस मिशन पर काम कर रही हैं?
साल 2021 में सबरीना कनाडा के Perimeter Institute for Theoretical Physics से जुड़ गईं. यहां उन्होंने Celestial Holography Initiative की शुरुआत की. बाद में इस परियोजना को Simons Foundation से लगभग 8 मिलियन डॉलर की रिसर्च ग्रांट भी मिली. उनका वर्तमान शोध ब्लैक होल, क्वांटम ग्रैविटी और ब्रह्मांड की मूल संरचना को समझने पर केंद्रित है.
आखिर उनका शोध इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
आधुनिक भौतिकी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत (General Relativity) और क्वांटम मैकेनिक्स आज भी पूरी तरह एक-दूसरे से मेल नहीं खाते. सबरीना का शोध इन्हीं दोनों सिद्धांतों के बीच पुल बनाने की कोशिश करता है. यदि भविष्य में वैज्ञानिक इस समस्या का समाधान खोज लेते हैं, तो ब्लैक होल, बिग बैंग, समय, गुरुत्वाकर्षण और पूरे ब्रह्मांड को समझने का तरीका बदल सकता है.
'नेक्स्ट आइंस्टीन' क्यों कहा जाता है?
सबरिना को "नेक्स्ट आइंस्टीन" इसलिए नहीं कहा जाता कि उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन की उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि इसलिए कि वे उसी तरह भौतिकी के सबसे कठिन और अनसुलझे सवालों पर काम कर रही हैं, जिन पर कभी आइंस्टीन ने दुनिया की सोच बदल दी थी. कम उम्र में विमान बनाना, MIT और हार्वर्ड में असाधारण प्रदर्शन, स्टीफन हॉकिंग द्वारा उनके शोध का उल्लेख और करोड़ों रुपये के ऑफर छोड़कर शोध को प्राथमिकता देना—इन सभी कारणों ने उन्हें अपनी पीढ़ी की सबसे प्रतिभाशाली सैद्धांतिक भौतिकविदों में शामिल कर दिया है. यही वजह है कि दुनिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान उन्हें "नेक्स्ट आइंस्टीन" के रूप में संबोधित करते हैं, हालांकि वैज्ञानिक समुदाय इसे कोई आधिकारिक उपाधि नहीं मानता.




