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असम विधानसभा में ऐसा क्या बोल गए हिमंता बिस्वा सरमा, जिस पर मच गया बवाल? कांग्रेस बोली- युवाओं पर पड़ेगा गलत असर
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ULFA-I प्रमुख परेश बरुआ को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है. कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री के इस तरह के बयान युवाओं को गलत संदेश दे सकते हैं और प्रतिबंधित संगठन के नेता का महिमामंडन करना गैर-जिम्मेदाराना है.
Himanta Biswa Sarma
असम की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विधानसभा में दिए गए एक बयान को लेकर कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन ULFA-I (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट) के प्रमुख परेश बरुआ को 'क्रांतिकारी' बताकर राज्य के युवाओं के सामने गलत संदेश रखा है.
शनिवार को जोरहाट जिला कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता मीरा बर्थाकुर ने मुख्यमंत्री के बयान को 'उकसाने वाला और गैर-जिम्मेदाराना' बताया. उन्होंने कहा कि राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के हर शब्द का समाज पर असर पड़ता है. इसलिए इस तरह की टिप्पणियां बेहद गंभीर हैं.
कांग्रेस नेता मीरा बर्थाकुर ने क्या कहा?
- मीरा बर्थाकुर ने कहा कि विधानसभा में मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी की थी कि अगर क्रांतिकारियों की दीवार चित्र (म्यूरल) बनाए जाएं तो उनमें ULFA-I प्रमुख परेश बरुआ का चित्र भी शामिल किया जा सकता है.
- कांग्रेस का कहना है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब ULFA एक प्रतिबंधित संगठन है और उसके खिलाफ भारत सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है.
- कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब किसी आम नागरिक पर प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक करने तक पर पुलिस कार्रवाई हो जाती है, तो फिर मुख्यमंत्री के ऐसे बयान पर अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं. पार्टी का कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए.
- मीरा बर्थाकुर ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री स्वयं युवाओं के सामने परेश बरुआ को 'क्रांतिकारी' के रूप में पेश करेंगे, तो भविष्य में यदि कुछ युवा उन्हें आदर्श मानने लगें या उग्रवाद के रास्ते पर चल पड़ें, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.
- कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर यह आरोप भी लगाया कि वे अक्सर आलोचकों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की चेतावनी देते हैं. पार्टी के अनुसार, इस तरह के कड़े कानूनों का इस्तेमाल लोगों को डराने के लिए नहीं होना चाहिए. एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री से संयमित भाषा और संतुलित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है.
- हालांकि, कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध को लेकर नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री के बयान के संभावित सामाजिक और कानूनी प्रभाव को लेकर है.
- पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं कानून के जानकार हैं. इसलिए उन्हें यह समझना चाहिए कि प्रतिबंधित संगठन के प्रमुख के बारे में दिए गए सार्वजनिक बयान का क्या असर पड़ सकता है.
- कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से अपने बयान को वापस लेने और राज्य के विकास व प्रशासनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है. वहीं, इस पूरे विवाद के बाद असम की राजनीति में बयानबाजी तेज होने की संभावना भी बढ़ गई है.




