न्यू नोएडा के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू, कहां तक फैलेगा प्रोजेक्ट, क्या आपकी भी जमीन जाएगी, करें चेक
न्यू नोएडा परियोजना के लिए 37 गांवों में जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस प्रोजेक्ट में कई गौतमबुद्ध नगर समेत बुलंदशहर के गावों को शामिल किया गया है.
Noida के विस्तार के तौर पर विकसित किए जा रहे न्यू नोएडा प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है. Noida Authority ने दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र यानी DNGIR के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पहले चरण में कुल 37 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी. इनमें 24 गांव बुलंदशहर जिले के हैं, जबकि 13 गांव गौतमबुद्ध नगर जिले में आते हैं.
अधिकारियों के मुताबिक जमीन अधिग्रहण आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा. न्यू नोएडा परियोजना को करीब 209.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित करने की योजना है. प्राधिकरण का कहना है कि यह परियोजना दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े नियोजित शहरी विस्तारों में शामिल होगी.
कैसे होगी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया?
भूमि अधिग्रहण और किसानों से बातचीत की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए तीन तहसीलदारों की नियुक्ति की जाएगी. इसके अलावा Eastern Peripheral Expressway के पास परियोजना का अस्थायी कार्यालय भी खोला जाएगा, जहां से जमीन अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक कार्यों की निगरानी की जाएगी.
भूमि अधिग्रहण में कितना मिलेगा पैसा?
नोएडा प्राधिकरण ने किसानों के लिए मुआवजे का शुरुआती प्रस्ताव भी तय कर दिया है. अधिकारियों के अनुसार किसानों को 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा. इसके साथ ही 3800 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त राशि देने और सात प्रतिशत विकसित भूखंड देने का प्रावधान भी रखा गया है.
किन गांव को किया गया है शामिल?
पहले चरण में बुलंदशहर जिले के जिन गांवों को शामिल किया गया है, उनमें बिरोंडी फौलादपुर, बिरोंडी तेजपुर, चोला, डिमरी आदिलपुर, गोपालपुर, हृदयपुर, जोखाबाद, कैथरा, कनवरा, काड़ू, किशनपुर, लुहाकर, मुरादाबाद, नगला बरोधा, नवादा, राजरमपुर, राजपुर खुर्द, सबदलपुर, सलेमपुर कायस्थ, सनवाली, शाहपुर कलां, सेरपुर और सिकरा गांव शामिल हैं.
वहीं गौतमबुद्ध नगर जिले में आनंदपुर, बैरंगपुर उर्फ नई बस्ती, बील अकबरपुर, छायसा, दयानगर, गिरिराजपुर, कोट, मिलक खंडेरा, नगला कामरू, नगला न्यानसुख, नेकरामपुर उर्फ विशनुपुर, फूलपुर और सैंथली गांवों को पहले चरण में शामिल किया गया है.
कब मंजूर हुआ था मास्टर प्लान?
डीएनजीआईआर का मास्टर प्लान अक्टूबर 2024 में मंजूर किया गया था. अब प्राधिकरण उसी समय की सैटेलाइट इमेज को आधार बनाकर जमीन और निर्माण का सत्यापन करेगा. अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर 2024 तक हुए निर्माण को वैध माना जाएगा, जबकि इसके बाद बिना अनुमति किए गए निर्माण को अवैध माना जा सकता है.
इसके तहत 81 गांवों की खसरा नंबर आधारित सैटेलाइट इमेज तैयार कराई जाएगी. इसमें हर गांव की जमीन, निर्माण, सड़क, पार्क, स्कूल, कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र और अन्य यूटिलिटी सेवाओं का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. साथ ही जमीन की पैमाइश भी कराई जाएगी ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो.
प्राधिकरण का दावा है कि न्यू नोएडा परियोजना से दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा. प्रशासन इसे आने वाले वर्षों में क्षेत्र के सबसे बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट्स में से एक मान रहा है.




