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क्या सिर्फ मैसेज और माहौल बनाना ही मकसद, शुभेंदु के साथ शपथ लेने वाले 5 मंत्रियों को क्यों नहीं बड़े मंत्रालय?

शुभेंदु अधिकारी सरकार में 5 मंत्रियों को बड़े मंत्रालय नहीं मिलने पर सवाल उठ रहे हैं. क्या बीजेपी ने सत्ता से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने पर फोकस किया?

क्या सिर्फ मैसेज और माहौल बनाना ही मकसद, शुभेंदु के साथ शपथ लेने वाले 5 मंत्रियों को क्यों नहीं बड़े मंत्रालय?
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( Image Source:  @AIRNewsHindi )

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने अपने साथ सिर्फ पांच मंत्रियों को शपथ दिलाई और उसके बाद विभागों का बंटवारा भी कर दिया. अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि जिन नेताओं को बीजेपी ने बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरे के तौर पर पेश किया, उन्हें गृह, वित्त, उद्योग, स्वास्थ्य या पीडब्ल्यूडी जैसे ताकतवर मंत्रालय क्यों नहीं दिए. दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और निशीथ प्रमाणिक जैसे नेताओं को राजनीतिक रूप से अहम माना जाता है, फिर भी सरकार के सबसे प्रभावशाली विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी फिलहाल सिर्फ राजनीतिक संदेश, सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक मैसेज देना चाहती है. जबकि असली प्रशासनिक नियंत्रण मुख्यमंत्री कार्यालय के हाथ में ही रखना चाहती है.

बंगाल सरकार में सबसे ताकतवर मंत्रालय?

बंगाल सरकार में गृह, वित्त, स्वास्थ्य, उद्योग, लोक निर्माण (PWD), ऊर्जा और कार्मिक विभाग सबसे अहम माने जा रहे हैं. यही विभाग प्रशासनिक फैसलों, पुलिस तंत्र, सरकारी नियुक्तियों और बड़े प्रोजेक्ट्स को नियंत्रित करते हैं. सरकार की अधिसूचना के मुताबिक इन बड़े विभागों का बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने अपने पास रखा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी बंगाल में सरकार के शुरुआती दौर में सत्ता का केंद्रीकरण चाहती है. पार्टी शायद कोई प्रशासनिक जोखिम नहीं लेना चाहती, इसलिए सीमित मंत्रिमंडल के जरिए कंट्रोल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में रखा गया है.

दिलीप घोष को पंचायत विभाग देकर क्या संदेश दिया?

दिलिप घोष (Dilip Ghosh) को पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पशुपालन और कृषि विपणन विभाग दिया गया है. बंगाल की राजनीति में पंचायत व्यवस्था बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि गांवों में राजनीतिक पकड़ का सबसे बड़ा माध्यम यही है.

बीजेपी ने दिलीप घोष को ऐसा विभाग देकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी ग्रामीण बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है. हालांकि, उन्हें गृह या वित्त जैसा बड़ा मंत्रालय नहीं मिला. इसकी एक वजह यह भी मानी जा रही है कि दिलीप घोष संगठन के बड़े चेहरे हैं और पार्टी उन्हें प्रशासन से ज्यादा राजनीतिक विस्तार में इस्तेमाल करना चाहती है.

अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय क्यों?

अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण और नगर विकास विभाग सौंपा गया है. बीजेपी ने बंगाल चुनाव में महिला वोट बैंक को लेकर काफी आक्रामक रणनीति अपनाई थी.

अग्निमित्रा पॉल को मंत्री बनाकर पार्टी ने महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है. नगर विकास विभाग शहरी राजनीति से जुड़ा हुआ है, इसलिए यह विभाग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन वित्त या गृह मंत्रालय जितना शक्तिशाली नहीं माना जाता. इससे साफ है कि बीजेपी फिलहाल चेहरों को प्रमोट कर रही है, लेकिन सत्ता का पूरा नियंत्रण साझा नहीं करना चाहती.

निशीथ प्रमाणिक को उत्तर बंग विकास मंत्रालय क्यों?

निशीथ प्रमाणिक (Nisith Pramanik) को उत्तर बंग विकास, युवा कल्याण और खेल विभाग दिया गया है. उत्तर बंगाल बीजेपी का सबसे मजबूत क्षेत्र माना जाता है और पार्टी लंबे समय से वहां अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है.

निशीथ प्रमाणिक को यह जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है. हालांकि, उन्हें केंद्रीय महत्व वाला मंत्रालय नहीं दिया गया. इससे लगता है कि पार्टी उन्हें फिलहाल क्षेत्रीय नेतृत्व के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है, न कि सरकार के पावर सेंटर में शामिल करना.

क्षुदीराम टुडू और अशोक कीर्तानिया को कौन से विभाग मिले?

क्षुदीराम टुडू (Kshudiram Tudu) को आदिवासी विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग मिला है. यह फैसला आदिवासी और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है.

अशोक किरतनिया (Ashok Kirtania) को खाद्य एवं आपूर्ति और सहकारिता विभाग दिया गया है. खाद्य विभाग जनता से सीधे जुड़ा होता है और राशन व्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ता है. बीजेपी इस विभाग के जरिए गरीब और ग्रामीण वर्ग में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है.

क्या बीजेपी ने फिलहाल संदेश की राजनीति को प्राथमिकता दी है?

बंगाल में शुभेंदु सरकार की शुरुआती तस्वीर से यही संकेत मिल रहा है कि बीजेपी ने फिलहाल “मैसेज पॉलिटिक्स” को ज्यादा महत्व दिया है. मंत्रिमंडल में उत्तर बंगाल, आदिवासी समाज, महिला नेतृत्व और ग्रामीण संगठन को प्रतिनिधित्व दिया गया, लेकिन सबसे ताकतवर मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास ही रहे.

पश्चिम बंगाल के सियासी जानकारों का मानना है कि बीजेपी बंगाल में अपनी पहली सरकार को बेहद नियंत्रित ढंग से चलाना चाहती है. इसलिए शुरुआती चरण में बड़े विभागों का केंद्रीकरण किया गया है, जबकि बाकी नेताओं को सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने वाली जिम्मेदारियां दी गई हैं.

शुभेंदु अधिकारी
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