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यमुना नदी में कालिया नाग, शेषनाग और अजगर! वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी, सच्चाई या किसी ने की शरारत? Videos

यमुना नदी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कालिया नाग, शेषनाग और अजगर जैसी विशाल आकृतियों के दिखने का दावा किया जा रहा है. वृंदावन के आसपास का बताया जा रहा यह वीडियो आस्था, भय और जिज्ञासा का कारण बन गया है. कुछ लोग इसे पौराणिक कथाओं से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई इसे सोशल मीडिया की शरारत बता रहे हैं.

यमुना नदी में कालिया नाग, शेषनाग और अजगर! वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी, सच्चाई या किसी ने की शरारत? Videos
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( Image Source:  instagram/govind_roy015 )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 20 Jan 2026 4:25 PM

यमुना नदी से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पानी के भीतर काली, विशाल आकृतियां दिखाई दे रही हैं, जिन्हें कुछ लोग कालिया नाग, तो कुछ शेषनाग और अजगर तक बता रहे हैं. वृंदावन और उसके आसपास के इलाके का दावा करते हुए शेयर किए जा रहे इस वीडियो ने आस्था, डर और जिज्ञासा तीनों को एक साथ जगा दिया है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या वाकई यमुना में कोई रहस्यमयी नाग प्रकट हुआ है या फिर यह सिर्फ इंटरनेट पर फैलाई गई शरारत है.

वायरल होने के बाद यह वीडियो तेजी से व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फैल गया. कई पोस्ट्स में इसे “कलियुग का संकेत” तक बताया जा रहा है, जबकि कुछ लोग इसे पुराणों से जोड़कर आध्यात्मिक अर्थ निकाल रहे हैं. लेकिन सवाल यही है कि इस दावे की सच्चाई क्या है?

दावे पर क्यों उठ रहे सवाल?

अब तक इस वीडियो को लेकर वन विभाग, जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. न तो किसी जांच की पुष्टि हुई है और न ही किसी अधिकारी ने यह माना है कि यमुना में इस तरह का कोई दुर्लभ या खतरनाक सर्प देखा गया है. यानी फिलहाल यह दावा सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित है.

फैक्ट-चेक करने वाले यूजर्स और कुछ डिजिटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि वीडियो की गुणवत्ता और एंगल इसे संदिग्ध बनाते हैं. कई लोगों का मानना है कि यह क्लिप या तो एडिटेड हो सकती है या फिर AI जनरेटेड वीडियो का हिस्सा हो सकती है, जिसे सनसनी फैलाने के लिए वायरल किया जा रहा है.

पुराणों की याद

कालिया नाग का नाम आते ही लोगों को भगवान श्रीकृष्ण की वह कथा याद आ जाती है, जिसमें उन्होंने यमुना में रहने वाले विषैले नाग का दमन किया था. इसी वजह से इस वीडियो को देखकर कई श्रद्धालु भावनात्मक हो गए हैं. कुछ संतों और भक्तों का मानना है कि जब समाज और प्रकृति संतुलन खोती है, तब ऐसे “असामान्य संकेत” दिखने लगते हैं. यमुना नदी की मौजूदा स्थिति प्रदूषण, गंदगी और उपेक्षा को देखकर भी लोग इस वीडियो को एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं. उनका कहना है कि शायद यह प्रकृति का संकेत है कि अब भी संभलने का वक्त है.

साधारण जीव या डिजिटल भ्रम?

दूसरी ओर, कई लोग इसे पूरी तरह अफवाह मान रहे हैं. उनका तर्क है कि नदी में बड़े मछलियों, लकड़ी के लट्ठों या पानी में तैरती छाया को गलत एंगल से रिकॉर्ड करने पर ऐसी आकृतियां नजर आ सकती हैं. इसके अलावा वीडियो एडिटिंग और AI टूल्स के दौर में किसी भी दृश्य को “रहस्यमयी” बनाना मुश्किल नहीं है. विशेषज्ञों की सलाह है कि जब तक किसी सरकारी एजेंसी या भरोसेमंद स्रोत से पुष्टि न हो, तब तक ऐसे दावों पर विश्वास नहीं करना चाहिए.

सोशल मीडिया की भूमिका

इस तरह के वायरल वीडियो यह दिखाते हैं कि सोशल मीडिया पर भावनात्मक और धार्मिक संदर्भ वाले कंटेंट कितनी तेजी से फैलते हैं. बिना पुष्टि के शेयर किए गए दावे न सिर्फ भ्रम पैदा करते हैं, बल्कि डर और गलतफहमी भी बढ़ाते हैं. डिजिटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूजर्स को किसी भी “वायरल चमत्कार” या “रहस्यमयी घटना” से पहले फैक्ट-चेक जरूर करना चाहिए, ताकि अफवाहों का हिस्सा न बनें.

सच अभी दूर, सवाल बरकरार

फिलहाल यमुना नदी में कालिया नाग, शेषनाग या अजगर देखे जाने का दावा प्रमाणित नहीं है. न कोई आधिकारिक पुष्टि, न ठोस सबूत सिर्फ एक वायरल वीडियो और उससे जुड़ी कहानियां हैं. सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आ सकता है. तब तक यह वीडियो आस्था, कल्पना और डिजिटल शरारत के बीच झूलता एक दावा ही बना हुआ है, जो हमें सावधान रहने और सोच-समझकर भरोसा करने की सीख देता है.

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