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क्या विपक्ष को अब सिर्फ राहुल गांधी ही बचा सकते हैं, कांग्रेस सांसद ने क्यों अखिलेश यादव को चेताया?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान ने सियासी बहस छेड़ दी है. मसूद का मानना है कि राहुल गांधी का साथ छोड़ने वाले दलों का वही हाल हो सकता है जो पश्चिम बंगाल में टीएमसी और महाराष्ट्र में शिवसेना का हुआ.

क्या विपक्ष को अब सिर्फ राहुल गांधी ही बचा सकते हैं, कांग्रेस सांसद ने क्यों अखिलेश यादव को चेताया?
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ने लगा है. इसका संकेत हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान से भी मिलता है. मसूद ने कहा कि राहुल गांधी का हाथ मजबूती से थाम लीजिए, नहीं तो वही हाल हो सकता है जो पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में हुआ. उनके इस बयान से यह संदेश निकलता है कि कांग्रेस राहुल गांधी को INDIA गठबंधन के प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है. इमरान ने कहा यदि विपक्षी दल एकजुट रहते हैं तो वे उन परिस्थितियों से बच सकते हैं, जिनका सामना पश्चिम बंगाल में टीएमसी और महाराष्ट्र में शिवसेना को करना पड़ा.

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी के आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. उत्तर प्रदेश में सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा 32 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद से समाजवादी पार्टी के भीतर यह भरोसा बढ़ा है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकती है. शायद इसी बात को इमरान भांप गए हैं और उन्होंने राहुल का हाथ मजबूती से पकड़ने की सलाह दी है.

क्या बोले इमरान मसूद?

जब इमरान मसूद से पूछा गया कि क्या वह लगातार समाजवादी पार्टी को टीएमसी की राह पर न चलने की नसीहत दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वह किसी को नसीहत नहीं दे रहे हैं और न ही इतने बड़े नेता हैं. उन्होंने कहा कि वह केवल मौजूदा हालात की ओर इशारा कर रहे हैं. मसूद ने कहा, "राहुल गांधी का हाथ मजबूती से थाम लीजिए. अगर राहुल गांधी का हाथ मजबूती से थामेंगे, तभी इस दलदल से बच पाएंगे."

उन्होंने आगे कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वही स्थिति पैदा हो सकती है जो महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में देखने को मिली. उनके मुताबिक, छोटे-छोटे दलों को कमजोर कर दिया गया है. मसूद ने कहा कि बचने का एक ही रास्ता है- राहुल गांधी का साथ देना. उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

इससे पहले INDIA गठबंधन की एक बैठक में राहुल गांधी ने भी विपक्षी एकता पर जोर दिया था. उन्होंने कहा था कि यदि सभी सहयोगी दल एकजुट रहते हैं, तभी भाजपा को हराया जा सकता है. राहुल गांधी ने कहा, "लोग सोचते हैं कि हम भाजपा को कैसे हराएंगे, लेकिन अगर हम एकजुट होकर डटकर मुकाबला करें तो उन्हें हराना आसान होगा."

उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले चुनाव के दौरान कमरे में मौजूद अधिकांश लोगों को भाजपा को हराने का भरोसा नहीं था, लेकिन उन्हें विश्वास था. राहुल गांधी ने कहा कि अब सभी सहयोगी दलों को इस विश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा कि भाजपा को हराया जा सकता है. उन्होंने कहा, "आप इस विश्वास के साथ शुरुआत कीजिए और मैं गारंटी देता हूं कि राज्य दर राज्य, चुनाव दर चुनाव, वे हारेंगे."

ममता बनर्जी की हार के पीछे ओवर कॉन्फिडेंस?

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की राजनीतिक कमजोरियों के पीछे ओवर कॉन्फिडेंस को भी एक संभावित कारण माना जाता है. 2026 के विधानसभा चुनाव में 15 वर्षों से सत्ता में रही टीएमसी को हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष भी सामने आया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी को भरोसा था कि वह किसी भी स्थिति में चुनाव जीत जाएगी. ममता बनर्जी लगातार "खेला होबे" का नारा देती रहीं, लेकिन संगठन के भीतर बढ़ रही दूरी और असंतोष को समय रहते नहीं पहचान सकीं. इसका असर हार के बाद दिखाई दिया और पार्टी के 20 विधायक बाग़ी हो गए.

'जो पहले दोस्त थे, आज दुश्मन बन बैठे'

इमरान मसूद के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वह विपक्षी दलों की एकजुटता को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं. उन्होंने कहा कि आज देश की राजनीति करवट ले रही है. जो लोग पहले दोस्त थे, वे अब दुश्मन बन बैठे हैं. ऐसे में यह पहचानना जरूरी है कि कौन दोस्त है और कौन दुश्मन.

उन्होंने कहा कि नफरत के नाम पर चल रही राजनीति का मुकाबला केवल कांग्रेस कर सकती है. इसलिए राहुल गांधी को मजबूत करने की जरूरत है. मसूद ने कहा कि यदि लोकतंत्र कमजोर होता है तो मुसलमान, दलित और पिछड़े वर्ग सबसे पहले प्रभावित होंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि देश को तानाशाही की दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है.

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