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जनगणना 2026: लोगों को उलझा रहा 'गेहूं या चावल' वाला सवाल, दोनों खाने वालों के लिए बढ़ी परेशानी

उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की ऑनलाइन स्वगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन 'मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाते हैं' सवाल ने लोगों को उलझन में डाल दिया है.

जनगणना 2026: लोगों को उलझा रहा गेहूं या चावल वाला सवाल, दोनों खाने वालों के लिए बढ़ी परेशानी
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( Image Source:  AI Created )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Updated on: 10 May 2026 4:00 PM IST

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में होने वाली जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं. लोगों को अपनी जानकारी खुद भरने के लिए स्वगणना (Self Enumeration) की सुविधा शुरू कर दी गई है. अब आम लोग घर बैठे ऑनलाइन अपना फॉर्म भर रहे हैं. तीन दिन में ही अच्छी संख्या में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया है, लेकिन एक सवाल ने कई परिवारों को काफी परेशानी में डाल दिया है. फॉर्म में एक सवाल पूछा जा रहा है- 'आपका परिवार मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाता है?' इसके विकल्प दिए गए हैं- 'गेहूं, चावल या बाजरा.'

उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश में ज्यादातर परिवार रोजाना दोनों गेहूं और चावल का इस्तेमाल करते हैं. कुछ लोग रोटी खाते हैं तो कुछ चावल. कई परिवार तो दोनों को बारी-बारी से या एक साथ अपने भोजन में शामिल करते हैं. लेकिन फॉर्म में सिर्फ एक ही विकल्प चुनने की सुविधा है. अगर कोई गेहूं चुन लेता है तो चावल वाला विकल्प गायब हो जाता है, और चावल चुनने पर गेहूं हट जाता है. लोगों का कहना है कि “हम दोनों ही खाते हैं, फिर एक ही क्यों चुनना पड़े? दोनों विकल्प साथ में क्यों नहीं दिए गए? यह सवाल कई लोगों को परेशान कर रहा है.

अधिकारी क्या कहते हैं?

जनगणना विभाग के सहायक निदेशक जेके श्रीवास्तव ने इस बारे में सफाई दी. उन्होंने बताया कि इस सवाल को इसलिए रखा गया है ताकि पता चल सके कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में लोग मुख्य रूप से कौन सा अनाज ज्यादा खाते हैं. इस जानकारी से सरकार आगे चलकर खाद्यान्न संबंधी योजनाएं, सब्सिडी और खरीद-बिक्री की नीतियां बेहतर तरीके से बना सकेगी.

प्रयागराज में अच्छी शुरूआत

हिन्दुस्तान के मुताबिक, प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि जनगणना 2027 की स्वगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. शुरुआती तीन दिनों में लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. डीएम ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपना स्वगणना फॉर्म भर लें. इससे बाद में जब गणनाकार (Enumerator) घर आएंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी.

स्वगणना कैसे करें?

आपको http://se.census.gov.in पोर्टल पर जाना है। अपना राज्य और जिला चुनें

भाषा और मोबाइल नंबर डालें

ओटीपी वेरिफाई करें

परिवार के मुखिया का नाम भरें

गूगल मैप पर अपने घर की लोकेशन चुनें

बाकी पूछे गए सवालों के जवाब दें

पूरी प्रक्रिया में सिर्फ 10 से 15 मिनट का समय लगता है

अब तक छह हजार से ज्यादा लोगों ने भरा फॉर्म

प्रयागराज में अब तक छह हजार से अधिक लोगों ने स्वगणना करा ली है. तीसरे दिन को 'यूथ एवं स्पोर्ट्स डे' के रूप में मनाया गया. शिक्षा चयन आयोग के अध्यक्ष, हंडिया तहसील, जसरा ब्लॉक के खिलाड़ी, एनसीसी कैडेट, अधिकारी और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने भी फॉर्म भरे. जिला जनगणना अधिकारी विनीता सिंह ने बताया कि यह अभियान 21 मई तक चलेगा. उन्होंने सभी वर्गों के लोगों से अपील की है कि वे स्वगणना जरूर करें. 21 मई के बाद 22 मई से 20 जून तक प्रगणक (Enumerator) घर-घर जाएंगे. जिन लोगों ने स्वगणना कर ली होगी, उन्हें अपने फॉर्म से मिले नंबर को प्रगणक को जरूर बताना होगा.

क्यों जरूरी है स्वगणना?

स्वगणना से जनगणना प्रक्रिया तेज और सटीक हो जाती है. लोग घर बैठे आसानी से अपनी सारी जानकारी भर सकते हैं. इससे अंतिम जनगणना में गलतियां कम होंगी और आंकड़े ज्यादा विश्वसनीय बनेंगे.

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