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ऐसा महिलाओं के साथ होता है, BJP नेता दीपाली ने बताया कैसे मेरे साथ बनाया गया था समझौते का दबाव? संबंध के बदले पद को लेकर गरमाया था विवाद

महिला BJP नेता दीपाली तिवारी ने दो महीने बाद बड़ा दावा किया. कहा- पति को जेल भेजने और बच्चों का भविष्य खराब करने की धमकी देकर समझौता कराया गया.

ऐसा महिलाओं के साथ होता है, BJP नेता दीपाली ने बताया कैसे मेरे साथ बनाया गया था समझौते का दबाव? संबंध के बदले पद को लेकर गरमाया था विवाद
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Updated on: 11 July 2026 1:28 PM IST

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी और भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. दो महीने पहले फेसबुक लाइव के जरिए जिलाध्यक्ष पर पद के बदले शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाने वाली दीपाली तिवारी ने अब समझौते को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

उनका दावा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान उन पर लगातार दबाव बनाया गया, पति को जेल भेजने और बच्चों का भविष्य खराब करने की धमकी दी गई, जिसके बाद उन्हें मजबूर होकर समझौता करना पड़ा. दीपाली के इस नए बयान ने एक बार फिर भाजपा की आंतरिक जांच प्रक्रिया और पूरे विवाद को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है.

समझिए पूरा विवाद

मामला उस समय शुरू हुआ था जब महोबा जिले की भाजपा की पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी ने फेसबुक लाइव कर भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया था कि उन्हें संगठन में बड़ा पद और जिला पंचायत का टिकट दिलाने के बदले शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव दिया गया. दीपाली ने आरोप लगाया था कि जिलाध्यक्ष ने उनसे कहा था, "आपके पास देने के लिए बहुत कुछ है, मेरे साथ हमबिस्तर हो जाइए, मैं आपको जिला उपाध्यक्ष बना दूंगा." इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि बाद में जिला पंचायत का टिकट देने और लखनऊ-दिल्ली साथ ले जाने जैसी बातें भी कही गईं.

इन आरोपों के बाद मामला प्रदेश स्तर तक पहुंचा और भाजपा ने इसकी जांच के लिए समिति गठित की थी. हालांकि कुछ दिनों बाद दीपाली तिवारी ने मीडिया के सामने आकर कहा था कि उनके और जिलाध्यक्ष के बीच मतभेद खत्म हो गए हैं और अब उन्हें कोई शिकायत नहीं है. उस समय जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा भी उनके साथ मौजूद थे और इसे दोनों पक्षों के बीच समझौते के रूप में देखा गया.

अब दो महीने बाद दीपाली ने क्या कहा?

अब करीब दो महीने बाद दीपाली तिवारी ने फिर वीडियो जारी कर दावा किया है कि वह समझौता उनकी मर्जी से नहीं हुआ था, बल्कि उन पर भारी दबाव बनाया गया था. दीपाली ने कहा कि जांच समिति का काम निष्पक्ष जांच करना होना चाहिए था, लेकिन उनके मामले में उन्हें डराकर और समझौते के लिए मजबूर करने का प्रयास किया गया. उनके मुताबिक, जांच टीम की सदस्य कमलावती उनसे मिलने आईं और पहले उन्हें संगठन में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया. दीपाली का कहना है कि जब उन्होंने इसे ठुकरा दिया तो उन्हें कहा गया कि अगर वह समझौता नहीं करेंगी तो उनके पति को जेल भेज दिया जाएगा और उनके बच्चों का भविष्य भी बर्बाद कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा, "मैंने साफ कहा था कि मैं अपने सम्मान से समझौता नहीं करूंगी. मुझे भाजपा पर भरोसा था कि मेरे साथ न्याय होगा, लेकिन जांच टीम ने लगातार दबाव बनाया और अंततः मुझे परिवार की सुरक्षा को देखते हुए समझौता करना पड़ा."

'महिलाओं के साथ ऐसा होता है', ऐसा कहकर समझाने की कोशिश हुई

दीपाली तिवारी ने दावा किया कि जांच समिति की सदस्य कमलावती ने उनसे कहा कि ऐसी घटनाएं महिलाओं के साथ होती रहती हैं और उन्हें भी इस तरह के प्रस्ताव मिल चुके हैं. इसके बाद प्रदेश स्तर की नेता गीता शाक्य (जिनका नाम दीपाली ने अपने बयान में लिया) से भी उनकी फोन पर बात कराई गई. दीपाली के मुताबिक उन्होंने वहां भी यही कहा कि वह अपने सम्मान से समझौता नहीं करेंगी, लेकिन लगातार दबाव, परिवार को लेकर दी गई चेतावनी और बच्चों के भविष्य की चिंता के कारण आखिरकार उन्हें समझौता करना पड़ा.

'10 लाख लेकर समझौते' की अफवाह पर भी दी सफाई

दीपाली तिवारी ने यह भी कहा कि समझौते के बाद उनके समाज और इलाके में यह अफवाह फैलाई गई कि उन्होंने 10 लाख रुपये लेकर मामला खत्म कर दिया. उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि उन्हें किसी तरह की कोई रकम नहीं मिली. उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि उन्हें अब ऐसा लगता है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही पूरे मामले को दबा दिया गया. दीपाली के अनुसार, उनसे कहा गया था कि दो महीने के भीतर जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और अंत में उन्हें ही गलत साबित कर दिया गया.

एक बार फिर गरमाई सियासत

दीपाली तिवारी के इस नए बयान के सामने आने के बाद महोबा की राजनीति में फिर हलचल तेज हो गई है. दो महीने पहले जिस विवाद को समझौते के साथ खत्म माना जा रहा था, वह अब नए आरोपों के साथ दोबारा चर्चा में आ गया है. फिलहाल भाजपा की ओर से दीपाली तिवारी के इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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