आंधी-तूफान नहीं साइक्लोन में उड़े थे नन्हे मियां, 130Kmph चली हवा ने 50 फीट ऊपर उछाला था
उत्तर प्रदेश के बरेली नन्हे मियां ऐसे उड़े जैसे 'मोर का पंख' और इसके बाद उनके चर्चे हर जगह होने लगे तो वहीं बाद में ये बता चला कि बरेली में आई आंधी कोई सामान्य आंधी नहीं बल्कि 'साइक्लोन' था जो कि 130 Kmph की रफ्तार से आया था और नन्हे मियां को 50 फीट ऊपर उछाला था.
बचपन में जब भी आसमान काला पड़ता था, तेज हवाएं चलती थीं और पेड़ों की टहनियां टूटने लगती थीं, तब घर के बुजुर्ग एक ही बात कहते थे-'बाहर मत निकलना… उड़ जाओगे.' उस वक्त ये बातें हमें डराने वाली कहानियां लगती थीं. लगता था भला इंसान भी कभी हवा में उड़ सकता है क्या? लेकिन उत्तर प्रदेश के बरेली के नन्हे मियां ऐसे उड़े जैसे 'मोर का पंख' और इसके बाद उनके चर्चे हर जगह होने लगे तो वहीं बाद में ये बता चला कि बरेली में आई आंधी कोई सामान्य आंधी नहीं बल्कि 'साइक्लोन' था जो कि 130 Kmph की रफ्तार से आया था और नन्हे मियां को 50 फीट ऊपर उछाला था.
सबसे भयावह तस्वीरें प्रयागराज, मिर्जापुर और संत रविदास नगर से सामने आईं. कहीं दीवार गिरने से पूरा परिवार दब गया, तो कहीं पेड़ लोगों पर टूट पड़े. कई गांवों में लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. जो जहां था, वहीं जान बचाने की कोशिश करता रह गया. मौसम विभाग ने भी माना कि यह सिर्फ आंधी नहीं थी, बल्कि 'थंडर स्क्वॉल' था. यानी ऐसा तूफान जिसमें हवा अचानक बेहद खतरनाक गति पकड़ लेती है और कुछ ही मिनटों में तबाही मचा देती है. प्रयागराज और बरेली में हवा की रफ्तार 130 Kmph तक पहुंच गई थी, जो पिछले कई वर्षों में सबसे खतरनाक स्तरों में गिनी जा रही है.
यूपी के तूफान से कितने लोगों की मौत?
इस तबाही में 117 लोगों की मौत हो गई, जबकि 79 लोग घायल हुए हैं. लेकिन आंकड़ों से ज्यादा डरावनी वो कहानियां हैं, जो अब गांव-गांव में सुनाई जा रही हैं. हवा इतनी तेज थी कि इंसान खड़ा नहीं रह पा रहा था…”
आंधी तूफान से किस जिले में हुई सबसे ज्यादा मौत?
इस तूफान ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों को तबाही के मंजर में बदल दिया, लेकिन सबसे ज्यादा कहर प्रयागराज में टूटा. उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक यहां 23 लोगों की मौत हुई. तेज हवाओं ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया. कहीं पेड़ गिर पड़े, कहीं दीवारें भरभराकर ढह गईं तो कहीं मकानों की छतें उड़ गईं.
प्रयागराज के बाद मिर्जापुर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 19 लोगों ने जान गंवाई. संत रविदास नगर में 16 और फतेहपुर में 11 मौतें दर्ज की गईं. रायबरेली, उन्नाव और बदायूं जैसे जिलों में भी तूफान ने भारी तबाही मचाई. गांवों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे, जहां कच्चे मकान और टीन शेड हवा के आगे टिक ही नहीं पाए.
130 Kmph की हवा कितनी खतरनाक होती है?
मौसम विभाग के मुताबिक, प्रयागराज और बरेली में हवा की रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी. यह कोई सामान्य आंधी नहीं, बल्कि लगभग साइक्लोन जैसी स्थिति थी. इतनी तेज हवा इंसान का संतुलन बिगाड़ सकती है, बड़े पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़ सकती है और कमजोर मकानों को कुछ सेकंड में मलबे में बदल सकती है.
अलग-अलग जिलों में हवा की रफ्तार ने डर का नया रिकॉर्ड बनाया-
- चंदौली में 113 Kmph
- बदायूं में 109 Kmph
- मिर्जापुर और रामपुर में 107 Kmph
- मुरादाबाद में 102 Kmph
यही वजह रही कि कई जगह बिजली के खंभे सड़क पर गिर गए, पेड़ वाहनों पर टूट पड़े और घरों की छतें हवा में उड़ती दिखाई दीं.
क्या था ये ‘थंडर स्क्वॉल’, जिसने पूरे यूपी को हिला दिया?
लखनऊ IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश के मुताबिक, यह साधारण तूफान नहीं बल्कि 'थंडर स्क्वॉल' था. यानी ऐसा खतरनाक मौसमीय सिस्टम, जिसमें हवा अचानक बेहद तेज रफ्तार पकड़ लेती है और कुछ ही मिनटों में भारी तबाही मचा देती है. उन्होंने बताया कि 'बुधवार को उत्तर प्रदेश के दक्षिणी, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में आया भीषण तूफान एक ‘थंडर स्क्वॉल’ था, जिसमें बेहद तेज रफ्तार हवाएं चलीं और हवा के झोंके 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गए थे.'




