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इलाज की जगह बेड़ियों में जकड़ा मरीज! अयोध्या में शुगर के मरीज को मान लिया पागल, रेफर होने के बाद हुई मौत| VIDEO

यूपी के अस्पताल का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक मरीज को बेड पर पट्टियों से बांधकर रखा गया है. इतना ही नहीं, उसके सामने खाने की थाली लगी है. इस वीडियो को देख लोगों में गुस्सा है कि आखिर कब तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ ऐसा किया जाएगा.

इलाज की जगह बेड़ियों में जकड़ा मरीज! अयोध्या में शुगर के मरीज को मान लिया पागल, रेफर होने के बाद हुई मौत| VIDEO
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( Image Source:  X-@IWCUttarPradesh )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 11 Nov 2025 1:34 PM IST

अयोध्या के जिला अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है. यहां एक मरीज को इलाज देने के बांधकर रखा गया, जैसे वह कोई अपराधी हो, न कि बीमार इंसान. मरीज के हाथ-पांव बंधे नजर आए, जबकि वह सामने रखे खाने को बेबस निगाहों से देखता रहा.

वीडियो सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. लेकिन इलाज मिलने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई.

पट्टियों से बांधे मरीज के हाथ-पैर

मरीज को बेड पर लेटाकर उसके हाथ और पांव पट्टियों से बांधे हैं और उसके ऊपर चादर डाल रखी है. हैरानी की बात यह है कि मरीज के साइड में खाने की थाली रखी है, जिसे वह बस बेबस निगाहों से उसे देख रहा है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस वार्ड में मरीज को रखा है, उसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है. वह बंद पड़ा था. लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि अगर यह वार्ड बंद था, तो मरीज वहां कैसे पहुंचा? और सबसे बड़ा सवाल कि किसी मरीज को इस हालत में रखने का अधिकार किसे है?

शराब की लत और शुगर से था पीड़ित

अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि मरीज की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी और वह “एल्कोहलिक साइको” था. लेकिन वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस तर्क को पूरी तरह नकार दिया. वहीं, इमरजेंसी इंचार्ज का कहना है कि मरीज को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था. वह मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं था, बल्कि लंबे समय से शराब की लत से जूझ रहा था और साथ ही शुगर का मरीज भी था.

मरीज की हो गई मौत

मरीज के परिजनों ने भी यही बात दोहराई. उनके मुताबिक, मरीज पूरी तरह होश में था, बस उसकी तबीयत खराब थी. भतीजे राहुल ने बताया कि उन्होंने चाचा को अस्पताल से डिस्चार्ज करवाया और लखनऊ इलाज के लिए ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.

क्या यही है हमारे स्वास्थ्य तंत्र का चेहरा?

सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने सरकार और स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल दागे कि आखिर यह कैसा सिस्टम है, जहां मरीज को इलाज नहीं, बल्कि बांधकर रखा जाता है? यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हमारे अस्पतालों की संवेदनहीनता की कहानी है. सवाल यही है कि क्या किसी की गरीबी या बीमारी इंसान होने का अधिकार छीन सकती है?

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