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जिन बच्चों का कोई नहीं, उनके लिए मां बनीं अंजना, नोएडा की "मम्मी", जिनके परवरिश किए बच्चे आज विदेशों में कर रहे नौकरी

नोएडा की समाजसेवी अंजना राजगोपाल ने अनाथ और बेसहारा बच्चों की देखरेख कर उनकी जिंदगी बदल दी. उन्होंने न सिर्फ बच्चों को घर और शिक्षा दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया. आज उनके परवरिश किए बच्चे विदेशों में नौकरी कर रहे हैं.

जिन बच्चों का कोई नहीं, उनके लिए मां बनीं अंजना, नोएडा की मम्मी, जिनके परवरिश किए बच्चे आज विदेशों में कर रहे नौकरी
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मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा4 Mins Read

Published on: 9 May 2026 1:54 PM

Mothers Day 2026: मदर्स डे के मौके पर नोएडा से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो मातृत्व के मायने ही बदल देती है. यहां रहने वाली समाजसेवी अंजना राजगोपाल ने अपना पूरा जीवन उन बच्चों के लिए समर्पित कर दिया, जिनके पास न परिवार है और न सहारा. उन्होंने खुद शादी नहीं की, लेकिन आज हजारों बच्चे उन्हें अपनी “मम्मी” कहते हैं.

केरल में जन्मी अंजना राजगोपाल अपनी मां के निधन के बाद दिल्ली आ गई थीं. समय के साथ उन्होंने नोएडा को अपना ठिकाना बनाया और यहीं से समाज सेवा का ऐसा सफर शुरू किया, जिसने अनगिनत बच्चों की जिंदगी बदल दी.

कैसे आया बच्चों की देखभाल का विचार?

साल 1988 में उन्होंने “साई कृपा” संस्था की शुरुआत की. उनके मन में यह विचार तब आया, जब उन्होंने महसूस किया कि समाज में ऐसे कई बच्चे हैं, जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है, परिवार का साथ नहीं है और पढ़ाई का कोई साधन भी नहीं है. इसी सोच के साथ उन्होंने अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को अपने परिवार का हिस्सा बनाना शुरू किया.

आज नोएडा के सेक्टर-12 में स्थित साई कृपा संस्था सैकड़ों बच्चों का घर बन चुकी है. यहां दो महीने के छोटे शिशु से लेकर 20 साल तक के युवा रहते हैं. इन बच्चों को सिर्फ खाना और आश्रय ही नहीं मिलता, बल्कि उनकी पढ़ाई, खेल, कला, संगीत और नैतिक शिक्षा पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है.

मीडिया से समाज सेवा में कैसे हुई एंटी?

अंजना बताती हैं कि वह पहले एक मीडिया संस्थान में काम करती थीं. बचपन से ही अनाथ बच्चों की स्थिति उन्हें अंदर तक परेशान करती थी. एक दिन जब वह काम से लौट रही थीं, तब उन्होंने एक विकलांग बच्चे को किसी के द्वारा पीटते हुए देखा. यह दृश्य उनके लिए बेहद दर्दनाक था और यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई.

उन्होंने उस बच्चे को अपने साथ घर ले जाकर उसकी देखभाल की, उसे पढ़ाया-लिखाया. यही घटना उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई और इसके बाद उन्होंने “साई कृपा” संस्था की नींव रखी.

अंजना का कहना है कि जब भी कोई बच्चा उनके पास आता है, तो वह सबसे पहले पुलिस की मदद से उसके परिवार का पता लगाने की कोशिश करती हैं. अब तक वह हजारों बच्चों को उनके परिवारों से मिला चुकी हैं.

कैसे बच्चों को पालती हैं अंजना?

लेकिन जिन बच्चों का कोई अपना नहीं मिलता, उनके लिए अंजना खुद मां की भूमिका निभाती हैं. वह बच्चों की हर जरूरत का ख्याल रखती हैं- उन्हें स्कूल और कॉलेज भेजती हैं, जीवन के मूल्यों से परिचित कराती हैं और बड़े होने पर उनकी शादी भी करवाती हैं. उनके कोशिशों का असर साफ दिखाई देता है. साई कृपा से जुड़े कई बच्चे आज देश और विदेश में अच्छी नौकरियों पर काम कर रहे हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं.

अंजना बताती हैं कि उनकी एक बेटी विदेश में पढ़ने गई थी और अब वहीं नौकरी कर रही है. ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जहां बच्चे अपने दम पर आगे बढ़े हैं. मदर्स डे के इस अवसर पर अंजना राजगोपाल उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल हैं, जो यह मानते हैं कि मां होना सिर्फ जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी के जीवन को संवारना भी उतना ही बड़ा मातृत्व है.

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