अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का! 1 मिनट 38 सेकेंड के वीडियो में समझें राघव चड्ढा की पूरी पॉलिटिक्स
राजनीति में में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो प्रेरणा से शुरू होकर विवादों में खत्म होती हैं. इस कड़ी में आज हम राघव चड्डा की कुछ कड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि आप ने राघव चड्डा को क्या-क्या दिया और उन्होंने कह दिया कि हम 'आप' के हैं कौन?
अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का! राजनीति में में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो प्रेरणा से शुरू होकर विवादों में खत्म होती हैं. इस कड़ी में आज हम राघव चड्डा की कुछ कड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि आप ने राघव चड्डा को क्या-क्या दिया और उन्होंने कह दिया कि हम 'आप' के हैं कौन?
राघव चड्डा की कहानी भी कुछ ऐसी ही बनती दिख रही है. एक साधारण चार्टर्ड अकाउंटेंट से देश की राजनीति के सबसे चर्चित युवा चेहरों में शामिल होने तक का सफर और फिर अचानक पार्टी से दूरी. इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई और महज 22 साल की उम्र में सीए बनने वाले राघव चड्ढा ने कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रखा, लेकिन 2011 के Anna Hazare movement ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. यहीं से उनकी मुलाकात अरविंद केजरीवाल से हुई और उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर एक नई सियासी यात्रा शुरू की.
राघव चड्ढा की शुरुआत कैसे हुई?
राघव चड्ढा ने अपने करियर की शुरुआत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में की थी और उन्होंने Deloitte जैसी बड़ी कंपनी में काम किया. लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाज ने उन्हें राजनीति की ओर खींच लिया. आम आदमी पार्टी के गठन के शुरुआती दौर में उन्होंने नीतिगत दस्तावेज तैयार किए और जल्द ही पार्टी का युवा चेहरा बन गए.
AAP में कैसे मिला बड़ा मुकाम?
पार्टी ने राघव चड्ढा को तेजी से आगे बढ़ाया. उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का वाइस चेयरमैन बनाया गया और बाद में पंजाब से राज्यसभा सांसद बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित कर दिया गया. कम उम्र में इतना बड़ा कद मिलना उनकी राजनीतिक क्षमता और पार्टी के भरोसे को दिखाता था.
फिर क्या हुआ ऐसा कि दूरी बढ़ गई?
हाल के दिनों में राघव चड्ढा के पार्टी से दूरी बनाने के फैसले ने सभी को चौंका दिया. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि जब पार्टी के शीर्ष नेता मुश्किल में थे, तब राघव चुप क्यों रहे? कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि वे विदेश दौरों में व्यस्त थे और पार्टी के संघर्ष के समय एक्टिव नहीं दिखे.
सोशल मीडिया पर क्या उठे सवाल?
एक यूजर ने कहा कि 'जब तुम्हारे टॉप लीडर जेल में थे तो तुमने एक बार भी नहीं बोला… तुम विदेश घूम रहे थे…' वहीं दूसरे आरोपों में कहा गया कि राघव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपने पुराने ट्वीट भी डिलीट कर दिए और संसद में वही मुद्दे उठाए जिन पर सरकार पहले से काम कर रही थी.
क्या यह पहले से तय रणनीति थी?
सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि राघव चड्ढा का यह कदम अचानक नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था. कुछ लोगों का दावा है कि वे पहले से ही पार्टी छोड़ने की तैयारी में थे और सही समय का इंतजार कर रहे थे. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है.
AAP की प्रतिक्रिया क्या रही?
आम आदमी पार्टी की ओर से इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने कहा कि 'ये सातों सांसद गद्दार हैं, जिन्होंने पंजाब और पार्टी के साथ धोखा किया है… आज मन बहुत दुखी है.'यह बयान साफ तौर पर पार्टी के अंदर की नाराजगी और टूट को दिखाता है.
क्या बदलेगी राघव की सियासी पहचान?
राघव चड्ढा की पहचान अब तक एक पढ़े-लिखे, तेजतर्रार और युवा नेता की रही है. लेकिन हालिया घटनाओं के बाद उनकी छवि को लेकर बहस छिड़ गई है. क्या वे एक रणनीतिक खिलाड़ी हैं या परिस्थितियों के शिकार? यह सवाल अभी खुला है, लेकिन इतना तय है कि उनका यह कदम भारतीय राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा.
एक सीए से राजनीति के शिखर तक पहुंचने की कहानी जितनी प्रेरणादायक थी, उतनी ही अब विवादों से घिरती नजर आ रही है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह फैसला उनके करियर को नई ऊंचाई देगा या नई चुनौतियां खड़ी करेगा.




