चेक पोस्ट, टिप-ऑफ और जवाबी फायरिंग, 3 साल में 324 मुठभेड़- कहानी एकदम सीधी तो पंजाब पुलिस पर क्यों उठ रहे सवाल?
पंजाब पुलिस के जरिए किए गए एनकाउंटर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में 324 मुठभेड़ हुई हैं. अगर नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक की बात करें तो 34 मुठभेड़ रिकॉर्ड की गई हैं, यानी हर तीन दिन में एक.
Punjab News: पंजाब में पुलिस कार्रवाई को लेकर पहली बार नवंबर 2025 में राज्य के डीजीपी गौरव यादव ने आधिकारिक आंकड़े साझा किए. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि अप्रैल 2022 (जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी) से अब तक राज्य में 324 गैंगस्टर मुठभेड़ दर्ज की गई हैं. इनमें 24 की मौत हुई और 515 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. डीजीपी के मुताबिक, गिरफ्तार 515 में से 319 को गोली लगी थी.
यह बयान उस समय आया जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब के गृह सचिव को राज्य प्रायोजित फर्जी मुठभेड़ों के आरोपों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का नोटिस जारी किया था. दो महीने बाद भी राज्य की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया है.
क्या कहते हैं पंजाब के आंकड़े?
नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 34 मुठभेड़ हुई हैं. औसतन हर तीन दिन में एक, इनमें 5 लोगों की मौत हुई और 45 घायल हुए. इनमें से 15 घटनाएं केवल जनवरी में हुईं. ज्यादातर मामलों में पुलिस ने 'आत्मरक्षा' का हवाला दिया. कई घटनाओं में आरोपी पहले से पुलिस हिरासत में थे और उन्हें 'हथियार बरामदगी' के लिए ले जाया जा रहा था.
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस का कहना रहा कि ऐसे आरोपियों ने छिपा हथियार निकालकर फायरिंग की, जिसके जवाब में गोली चलाई गई. कम से कम आठ मामलों में पुलिस ने 'अंधाधुंध फायरिंग' का दावा किया, लेकिन पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से बच गए. कई मामलों में गोलियां पुलिस वाहनों को लगीं.
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब आधी घटनाओं में पुलिस ने टिप-ऑफ के आधार पर नाके लगाए और मुठभेड़ होने का दावा किया. ऐसे मामलों में कम से कम 34 आरोपियों को गोली लगी. पुलिस रिपोर्टों में कहा गया कि चेतावनी देने के बाद और आरोपियों के जरिए फायरिंग करने पर ही पैरों/टांगों में गोली चलाई गईय बरामद हथियारों में ज्यादातर .30-.32 बोर (विदेशी या देसी) पिस्तौल बताई गईं.
किन ज़िलों में हुई ये घटनाएं?
मुठभेड़ की घटनाएं राज्यभर में दर्ज हुईं-बठिंडा, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, होशियारपुर, फाजिल्का में 1-1; पटियाला, बटाला, खन्ना, फिरोजपुर, मोहाली, तरनतारन, जालंधर में 2-2, लुधियाना में 5 और अमृतसर में सबसे ज्यादा 9 घटनाएं सामने आईं.
2024 और 2025 के आंकड़े क्या कहते हैं?
2024 में 64 मुठभेड़ दर्ज हुईं, जिनमें 4 मौतें (एक पुलिसकर्मी सहित) हुईं. 56 आरोपी और 9 पुलिसकर्मी घायल हुए. जुलाई 2025 की रिपोर्ट में बताया गया था कि साल के पहले सात महीनों में 20 मुठभेड़ ऐसी थीं, जिनमें आरोपी पहले से हिरासत में थे और 'बरामदगीट के लिए ले जाए जा रहे थे. इनसे 5 मौतें हुईं. इन्हीं घटनाओं के आधार पर एक वकील ने NHRC का दरवाजा खटखटाया था. सबसे हालिया घटना मोगा में रविवार को दर्ज हुई, जब पिछले हफ्त प्रवासी मजदूरों पर फायरिंग के आरोप में दो लोगों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया.
पंजाब पुलिस पर क्या उठ रहे हैं सवाल?
एनएचआरसी में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता निखिल सराफ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, मुठभेड़ में गंभीर चोट की कंडीशन में एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र जांच कराना जरूरी है, और मौत होने पर मजिस्ट्रेटी जांच जरूरी है. उनका आरोप है कि पंजाब में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा. फर्जी मुठभेड़ मामलों को 1990 के दशक से उठाते रहे सरबजीत सिंह वेरका ने कहा कि कानूनी रूप से हर मुठभेड़ की उचित जांच जरूरी है, चाहे वह साफ-सुथरी ही क्यों न हो.
नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच खन्ना, डेरा बस्सी, फरीदकोट, फिरोजपुर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, बटाला, होशियारपुर, तरनतारन, जालंधर, फाजिल्का समेत कई जिलों में मुठभेड़ों की घटनाएं दर्ज की गईं. कई मामलों में आरोपियों के 'नाका तोड़ने', 'फायरिंग करने' या 'हिरासत से भागने की कोशिश' का दावा किया गया. पुलिस ने अधिकतर घटनाओं में जवाबी कार्रवाई में पैरों में गोली मारने और आत्मरक्षा का हवाला दिया. कुछ मामलों में आरोपियों की मौत भी हुई.





