कौन है मोहम्मद फरहत, जिसका नाम जुड़ रहा LPU हिंसा में? वायरल वीडियो से विवाद तक, जानिए अब तक क्या हुआ
LPU हिंसा मामले में मोहम्मद फरहत का नाम वायरल वीडियो के बाद चर्चा में है. जानिए फरहत कौन हैं, LPU ने क्या जांच शुरू की और अब तक क्या हुआ.
पंजाब के फगवाड़ा स्थित Lovely Professional University (LPU) में 27 सितंबर को सोशल मीडिया पर फैले एक दावे के बाद शुरू हुआ छात्र प्रदर्शन हिंसक हो गया. दावा किया गया कि गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ किसी बाहरी व्यक्ति ने यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसकी मौत हो गई. इन दावों की पुष्टि अब तक नहीं हुई है. पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर SIT बनाई है, जबकि विश्वविद्यालय ने आरोपों को झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताया है.
हंगामे के दौरान कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस के साथ झड़प हुई. छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा NH-44 को भी बाधित किया. इसी हिंसा से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद मोहम्मद फरहत का नाम चर्चा में आया है. विश्वविद्यालय अब उसके अकादमिक रिकॉर्ड की जांच कर रहा है.
LPU में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
27 सितंबर की रात गर्ल्स हॉस्टल के आसपास कुछ छात्रों के बीच एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न की बात फैलने लगी. इसके साथ ही एक अन्य छात्र की आत्महत्या से जुड़े दावे भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए. इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन देखते ही देखते बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन के लिए जमा हो गए. पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में कथित यौन उत्पीड़न की घटना की पुष्टि करने वाला सबूत नहीं मिला. इसके बावजूद मामले में FIR दर्ज की गई और जांच के लिए SIT गठित की गई.
प्रदर्शन कब हिंसक हुआ?
प्रदर्शन की शुरुआत कैंपस के अंदर हुई, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ गई. प्रदर्शनकारियों पर कैंपस की संपत्ति में तोड़फोड़ करने, आगजनी करने और पुलिस पर पथराव करने के आरोप लगे. NH-44 के जालंधर-फगवाड़ा हिस्से को भी प्रदर्शनकारियों ने बाधित किया. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचने और कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की.
मोहम्मद फरहत कौन हैं?
LPU हिंसा के दौरान सामने आए कुछ वीडियो में मोहम्मद फरहत नाम के एक व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर चर्चा शुरू हुई. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग में उनकी पूरी व्यक्तिगत प्रोफाइल, उम्र, शैक्षणिक योग्यता या LPU से मौजूदा छात्र के रूप में उनकी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. विश्वविद्यालय के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया गया है कि LPU उनके अकादमिक रिकॉर्ड की जांच कर रहा है और शुरुआती आकलन में वह विश्वविद्यालय के सक्रिय छात्र नहीं पाए गए हैं. इसलिए फिलहाल उन्हें LPU का सक्रिय छात्र बताना पुष्ट तथ्य नहीं है.
मोहम्मद फरहत को लेकर जांच क्यों हो रही है?
हिंसा के दौरान रिकॉर्ड किए गए कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं. इनमें फरहत की कथित मौजूदगी और प्रदर्शन के दौरान उनकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठे हैं. इसी वजह से विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में उनके अकादमिक रिकॉर्ड को भी देखा जा रहा है. हालांकि, किसी वीडियो में मौजूदगी अपने आप में किसी व्यक्ति को हिंसा या तोड़फोड़ का दोषी साबित नहीं करती. उनकी भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी.
फरहत ने वायरल वीडियो पर क्या कहा?
फरहत ने सोशल मीडिया पर अपनी तरफ से सफाई दी है. उन्होंने कहा कि DSW की तोड़फोड़ में उनकी कोई भूमिका नहीं थी. उनके मुताबिक, वह विश्वविद्यालय के अंदर गए थे और बाद में उन्हें बाहर आने के लिए कहा गया. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने लोगों से तोड़फोड़ रोकने की अपील की थी. फरहत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो पूरे घटनाक्रम का संदर्भ नहीं दिखाते. उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके पास अपने पक्ष को साबित करने वाले वीडियो हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जहां उनकी गलती है, वहां वह जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार हैं. साथ ही उन्होंने अपने खिलाफ कथित धमकियों का जिक्र किया.
LPU ने फरहत को लेकर क्या जांच शुरू की?
विश्वविद्यालय ने हिंसा में शामिल छात्रों की पहचान के लिए तीन सदस्यीय अनुशासन समिति बनाई है. समिति का फोकस कथित आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान पर है. रिपोर्टों के मुताबिक करीब 30 से 40 छात्रों की गतिविधियां जांच के दायरे में हैं. इसके अलावा CCTV कैमरों को नुकसान पहुंचने और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की भी जांच की जा रही है. फरहत का अकादमिक रिकॉर्ड भी इसी व्यापक जांच का हिस्सा बताया जा रहा है.
क्या फरहत के खिलाफ कोई मामला दर्ज हुआ है?
उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर फरहत को लेकर विश्वविद्यालय की जांच और उनके वायरल वीडियो से जुड़ी चर्चा सामने आई है. लेकिन उनके खिलाफ किसी विशेष अपराध में दोष सिद्ध होने की बात नहीं कही जा सकती. LPU हिंसा और कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी पुलिस जांच अलग-अलग पहलुओं पर चल रही है. इसलिए फरहत की कथित भूमिका को पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष से पहले निश्चित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा.
कथित यौन उत्पीड़न के मामले में अब तक क्या मिला?
यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है. पुलिस ने एक छात्र की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसके बाद SIT गठित की गई. लेकिन पुलिस की शुरुआती जांच में कथित यौन उत्पीड़न की घटना की पुष्टि करने वाला सबूत सामने नहीं आया है. विश्वविद्यालय ने भी इस दावे को खारिज किया है और इसे झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताया है. इसलिए फिलहाल इसे सिद्ध रेप केस के रूप में नहीं, बल्कि जांच के दायरे में मौजूद आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
फिर FIR क्यों दर्ज की गई?
किसी गंभीर आरोप की जांच के लिए FIR दर्ज होना और आरोप का साबित होना दो अलग बातें हैं. इस मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की है और SIT जांच कर रही है. जांच एजेंसी का काम यह पता लगाना है कि घटना वास्तव में हुई थी या नहीं, शिकायत और वायरल दावों के पीछे क्या तथ्य हैं और यदि कोई अपराध हुआ है तो उसमें कौन शामिल था.
हिंसा के बाद LPU में क्या हुआ?
हिंसा के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दीं. मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गईं. कई हॉस्टल छात्रों को अस्थायी रूप से घर लौटने की सलाह दी गई. कैंपस और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया. बाद में पुलिस ने स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी, हालांकि सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई.
LPU ने हिंसा की जांच के लिए क्या कदम उठाए?
विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय अनुशासन समिति गठित की है. इसका उद्देश्य उन छात्रों की पहचान करना है जिन पर कथित तौर पर आगजनी, तोड़फोड़ या हिंसा में शामिल होने के आरोप हैं. इसके अलावा CCTV कैमरों को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों की भी जांच की जा रही है.
चितकारा यूनिवर्सिटी का मामला LPU से कैसे जुड़ा?
LPU से करीब एक दिन पहले पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया पर फैली अफवाह के बाद छात्र प्रदर्शन हुआ था. 25 सितंबर की रात वहां छात्राओं के लापता होने और हॉस्टल से जुड़ी अलग-अलग अपुष्ट बातें सोशल मीडिया पर फैलीं. पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि कोई छात्रा लापता नहीं थी. दोनों घटनाओं के बीच करीब 27 घंटे और लगभग 140 किलोमीटर का अंतर बताया गया है. दोनों जगह सोशल मीडिया पर फैले अपुष्ट दावों के बाद छात्रों का जमावड़ा हुआ और तनाव बढ़ा. हालांकि, दोनों मामलों में वायरल दावों की प्रकृति अलग थी.
LPU हिंसा पर राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा?
घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई. विपक्षी नेताओं ने कानून-व्यवस्था और कथित बाहरी लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और विस्तृत जांच की मांग की. कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने घटना की जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश या CBI से कराने की मांग की और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है.
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और विश्वविद्यालय प्रशासन को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राज कुमार वेरका ने भी प्रशासन की जिम्मेदारी और घटना में शामिल लोगों की पहचान को लेकर सवाल उठाए. दूसरी ओर, इन राजनीतिक आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता. मामले में वास्तविक जिम्मेदारी पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की जांच से ही तय होगी.
अब तक मामले में क्या-क्या हुआ?
- 25 सितंबर- चितकारा यूनिवर्सिटी में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बाद छात्र प्रदर्शन.
- 27 सितंबर- LPU में कथित यौन उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े अपुष्ट दावों के बाद छात्रों का प्रदर्शन.
- 27-28 सितंबर- प्रदर्शन हिंसक हुआ; तोड़फोड़, आगजनी, पथराव और NH-44 बाधित होने की घटनाएं सामने आईं.
- 27 सितंबर- पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया और SIT जांच शुरू की.
- 28 सितंबर- LPU ने 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कीं और परीक्षाएं टालीं.
- 28 सितंबर के बाद- हिंसा से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद LPU ने छात्रों की पहचान के लिए अनुशासनात्मक जांच शुरू की. इसी क्रम में मोहम्मद फरहत के अकादमिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है.




