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बाथरूम में छुपकर खाना, पति की मार सहना, IAS Savita Pradhan कौन? जिनकी कहानी रोंगटे खड़े कर देगी, उन पर पेशाब तक फेंका गया

सविता प्रधान ने गरीबी, घरेलू हिंसा और सामाजिक दबावों के बावजूद हार नहीं मानी और UPSC पास कर IAS बनीं. उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखती है.

बाथरूम में छुपकर खाना, पति की मार सहना, IAS Savita Pradhan कौन? जिनकी कहानी रोंगटे खड़े कर देगी, उन पर पेशाब तक फेंका गया
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( Image Source:  Instagram: savitapradham )
रूपाली राय
By: रूपाली राय8 Mins Read

Updated on: 21 April 2026 8:50 PM IST

'तू है शक्ति, तू है शांति… तू ही तो है उम्मीद की किरण…' कुछ कहानियां सिर्फ सुनाई नहीं जातीं, उन्हें महसूस किया जाता है. सविता प्रधान की कहानी भी ऐसी ही है. दिल दहला देने वाली, रोंगटे खड़े कर देने वाली, और आखिर में आंखों में आंसू और सीने में जोश भर देने वाली. एक मध्यम परिवार की बेटी, मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकली सविता का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. लेकिन यह स्क्रिप्ट किसी लेखक ने नहीं, खुद जिंदगी ने लिखी खून से, आंसुओं से और अनगिनत रातों की चीखों से.

सविता प्रधान भले ही आज IAS हो लेकिन इस मुकाम पर आने तक का सफर इतना कठिन था कि जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाए. सविता प्रधान एक ब्राइट स्टूडेंट थी और वह एक सरकारी स्कूल में पढ़ती थी. सविता जब 10वीं में अच्छे नम्बरों से पास हुईं तो उनके माता-पिता को उनपर गर्व हुआ. आगे पढ़ने के लिए सविता के माता-पिता ने उन्हें दूसरे स्कूल में डाल दिया, लेकिन गांव से दूसरे स्कूल का सफर मुश्किल था क्योंकि गांव में एक ही बस जाती थी वो भी कभी-कभी. जिसका किराया उस समय में 2 रुपये था. सविता में पढ़ने की ललक थी इसलिए उन्होंने बस का सहारा न लेते हुए अपनी आर्थिक परिस्थिति को समझते हुए मीलो पैदल चलने का सफर तय किया.

जब शादी बनी नर्क

सविता की पढ़ाई जारी ही थी कि तभी शादी का प्रस्ताव आ गया. माता-पिता को घर ठीक लगा और सविता को शादी के लिए मना लिया इस शर्त पर कि ससुराल वाले आगे पढ़ाएंगे. लेकिन सविता को पता नहीं था कि उससे झूठा वादा किया जा रहा है. पढ़ाई तो दूर उसे ससुराल के नाम पर ऐसे नर्क में भेजा गया जहां उसे खाना तक नहीं मिलता था. कम उम्र में ही शादी के बंधन में बंधी सविता का हर दिन वहां मुश्किल से गुजरता. जिस दिन से दुल्हन बनकर ससुराल गई, उसी दिन से नर्क शुरू हो गया. पति और ससुराल वालों की क्रूरता का कोई अंत नहीं था. दिन-रात अथक मेहनत, भूखे पेट रहना सबसे दर्दनाक था. उसे बार बार पीटा जाता. टाइम्स के मुताबिक, सविता बताती है उन्हें ससुराल में ऐसे दिन देखते पड़े कि अंडरगार्मेंट्स में वह रोटियां छुपा के रखती और बाथरूम में जाकर खाती.

पिता का झूठा वादा, आत्महत्या और ससुराल छोड़ने का फैसला

एक समय आया जब सविता ने अपने पिता से उम्मीद की वह उस मुश्किल समय में उसका साथ देंगे. सविता के पिता एक बार उनसे मिलने ससुराल आए. सविता ने अपने पिता से गुजारिश की वो उन्हें यहां से ले जाए वह यहां मर भी सकती है. पिता ने झूठा वादा किया कि शाम को वह उसे दोनों बच्चों के साथ ले जाएंगे. लेकिन पिता का रास्ता तकते सविता की आंखें थक गई. सविता ने उस वक़्त मान लिया था कि उसे इस नर्क से निकालने अब कोई नहीं आएगा. सविता के साथ मारपीट भुखमरी के हालात ज्यों के त्यों बने रहे. फिर उन्होंने अपनी जान देने की सोची और फांसी का फंदा कमरे के सीलिंग फैन पर लटकाने लगी. सविता बताती है कि जब वह फांसी का फंदा पंखे में डाल रही थी तभी उन्हें खिड़की से सास का चेहरा नजर आया. सास ने भी देखा लेकिन बहू को ऐसा करते देख रोकने का प्रयास नहीं किया. उस वक्त सविता को समझ आया और खुद से सवाल किया- मैं कैसे लोगों के लिए अपनी जान दे रही हूं.?. सविता ने दृढ़ मजबूती से एक फैसा लिया उस नर्क को छोड़ने का और अपनी दोनों बच्चो के साथ ससुराल छोड़ दिया.

रिश्तेदार ने की मदद और पढ़ाई का सफर

सविता अपने मायके तो जा नहीं सकती थी क्योंकि उसे पता था मान-सम्मान की दुहाई देने वाले माता-पिता उसे वहां नहीं रहने देंगे. सविता अपने दूर रिश्तेदार की एक भाभी के घर गई. उन रिश्तेदार ने सविता का दुख समझते हुए अपने घर में शरण दी. इस बुरे हालात में सविता ने एक ब्यूटी पार्लर में काम करना शुरू किया. लेकिन दो बच्चो की देखभाल भी जरुरी थी इसलिए सविता की मां उसका सहारा बनी और बच्चो देखभाल में मदद की. सविता आगे पढ़ना चाहती थी लेकिन पैसे इतने नहीं थे. उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू किया. अपनी इस इनकम से सविता ने पहले बीए किया फिर एमए.

पति ने फेंका पेशाब फिर भी नहीं मानी हार

सविता बताती है कि जब वह परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी उनका पति उन्हें ढूंढते हुए पहुंच गया. उनके साथ बिना किसी कारण के मारपीट की गई. सिर्फ इतना ही नहीं सविता के पति ने उनके ऊपर अपना पेशाब तक फेंका. लेकिन सविता ने हार नहीं मानी. वह नहाई, कपड़ें बदले और शरीर पर चोट के निशान होते हुए भी वह एग्जाम देने गई. एक बार सविता अखबार पढ़ रही थी तभी उनकी नजर UPSC परीक्षा पर गई. उन्हें इसका मतलब तक भी नहीं पता था लेकिन सैलरी इतनी आकर्षित लगी कि उन्होंने ठान लिया अगर इसमें मेरा सेलक्शन होगा तो मेरे दोनों बच्चे आराम से पल जाएंगे.

जब बनीं वह आईएएस और सिखाया पति को सबक

सविता ने मेहनत और लगन से एग्जाम पास किया और आईएएस अधिकारी बनी. उन्होंने सिविल सेवा में आकर नगर निगम कार्यलय में अपनी पोस्टिंग करवाई. सब ठीक चल रहा था, तभी उनका पति उनके जीवन में एक बार फिर लौट आया. एक आईएएस अधिकारी होने के बाद भी उन्होंने हिंसा सही. सविता का मानना था कि वह आखिर कैसे बताए कि एक IAS अधिकारी अपने ही घर में घरेलु हिंसा का शिकार है. उन्हें यह बताने में शर्म आती थी. हमेशा की तरह सविता प्रधान के पति ने उन्हें पीटा इस बार उनसे रहा नहीं गया और अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को अपनी समस्या बताई. सविता से उन अधिकारी ने कहा, 'अब जब पति आए और मारपीट करे तो मुझे सीधे फोन कर देना.' सविता इस इन्तजार में थी इस बार खुद के साथ कोई अन्याय नहीं होने देगी. फिर वो दिन आया जब सविता का पति लौटा और मारपीट शुरू की बस सविता ने तुरंत अपने अधिकारी को फोन किया. वह वहां तुरंत पहुंचें और सविता के पति को सबक सिखाया.

हिम्मत सब कुछ बदल सकती है

उस दिन सविता को एहसास हुआ चुप रहना उसकी सबसे बड़ी गलती थी. आज सविता प्रधान मुख्य नगर अधिकारी के पद पर हैं. चार विभागों का प्रभार संभाल रही हैं. लेकिन सबसे बड़ी बात वे अब चुप नहीं हैं. वे हर उस महिला से कहती हैं जो आज भी चुपचाप पीड़ा सह रही है- अपने दर्द को कभी भी सहन मत करो. जिंदगी कितनी भी क्रूर क्यों न हो, दृढ़ संकल्प और हिम्मत से तुम उसे बदल सकती हो.' 2008 में कानूनी रूप से पहले पति से तलाक लेने के बाद सविता प्रधान ने 2015 में हर्ष राय गौर से दूसरी शादी की. सविता की कहानी सिर्फ एक IAS अधिकारी की सफलता की कहानी नहीं है. यह उन लाखों महिलाओं की कहानी है जो टूट-टूटकर भी टिके रहती हैं.

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