Begin typing your search...

IAS नहीं हैं MP की Savita Pradhan, वीडियो जारी कर दूर कर दिए सारे Confusion; परिवार को लेकर की ये आपील

मध्य प्रदेश की सविता प्रधान को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही IAS अधिकारी होने की खबरों पर अब विराम लग गया है. सविता प्रधान ने खुद वीडियो जारी कर साफ कर दिया कि वे IAS नहीं हैं. उन्होंने MPPCS का पेपर दिया है और वे फिलहाल नगर निगम पद पर नियुक्त हैं.

IAS नहीं हैं MP की Savita Pradhan, वीडियो जारी कर दूर कर दिए सारे Confusion; परिवार को लेकर की ये आपील
X
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Updated on: 23 April 2026 8:14 PM IST

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाली सविता प्रधान की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और जिद की ऐसी मिसाल है जो हर किसी को अंदर तक झकझोर देती है. यह कहानी बताती है कि हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों न हों? अगर इरादे मजबूत हों तो जिंदगी की दिशा बदली जा सकती है.

सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाली एक साधारण लड़की, जिसने कई किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई की, शादी के बाद अत्याचार झेला, भूख और हिंसा सहन की, लेकिन हार नहीं मानी. वही सविता आज एक मजबूत प्रशासनिक अधिकारी के रूप में खड़ी हैं. उनकी जिंदगी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो चुपचाप संघर्ष कर रही है.

क्या है सविता प्रधान की कहानी? जानिए संघर्ष से सफलता तक का सफर

सविता प्रधान का जन्म मध्य प्रदेश के एक गरीब आदिवासी परिवार में हुआ. बचपन से ही उन्होंने गरीबी देखी. उनके पिता खेतों में मजदूरी करते थे, बीड़ी के पत्ते तोड़ते और महुआ इकट्ठा करके परिवार का पेट पालते थे. मेरे गांव के ज़्यादातर बच्चों की तरह, मैंने भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई की.

गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद जब उन्होंने 10वीं में अच्छे अंक हासिल किए, तब जाकर परिवार ने उन्हें आगे पढ़ने की अनुमति दी. लेकिन यह सफर आसान नहीं था. स्कूल दूर था और बस की सुविधा भी अनियमित थी. '₹2 का किराया भी वह वहन नहीं कर सकती थीं, इसलिए मैं पूरा रास्ता पैदल ही जाया करता.'

शादी के बाद जिंदगी कैसे बदली?

कम उम्र में ही सविता की शादी एक संपन्न परिवार में कर दी गई. उन्हें वादा किया गया कि उनकी पढ़ाई जारी रहेगी, लेकिन ससुराल पहुंचते ही सब बदल गया. वहां उन्हें न सिर्फ पढ़ाई से रोका गया, बल्कि मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. उन्हें ठीक से खाना तक नहीं दिया जाता था. उन्होंने बताया कि 'मैं चुपके से अपनी अंडरगारमेंट्स में रोटियां छिपा लेता था और बाथरूम में जाकर उन्हें खाती थी, क्योंकि मुझे खाने की इजाज़त नहीं थी.' हर दिन मारपीट, गाली-गलौज और अपमान उनके जीवन का हिस्सा बन गया था.

क्या कभी सविता ने हार मानने का सोचा?

हालात इतने खराब हो गए थे कि सविता ने एक समय आत्महत्या तक का फैसला कर लिया था. 'मैं खुद को फांसी लगाने ही वाला था, तभी खिड़की से मेरी सास का चेहरा दिखा… और वह बिल्कुल भी विचलित नहीं हुईं. लेकिन उसी पल उन्हें एहसास हुआ कि वह ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं दे सकतीं, जो उन्हें सम्मान तक नहीं देते.

घर छोड़ने का फैसला कैसे बना टर्निंग पॉइंट?

सविता ने हिम्मत जुटाई और अपने दो बच्चों के साथ ससुराल छोड़ दिया. उनके पास न पैसे थे, न कोई सहारा, लेकिन हिम्मत थी. उन्होंने एक छोटे से कमरे में रिश्तेदारों के साथ रहना शुरू किया. ब्यूटी पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की.

पढ़ाई और संघर्ष साथ-साथ कैसे चला?

एक दिन मेरी किताब पर कुत्ते ने पेशाब कर दिया… मेरे पास नई किताब खरीदने के पैसे नहीं थे… उसी किताब से मैंने तैयारी की. उन्होंने BA और MA पूरा किया और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. सविता प्रधान ने बताया कि 'एक दिन मैंने अख़बार में UPSC परीक्षा की अधिसूचना देखी… और मैंने इसकी तैयारी करने का फैसला कर लिया.

क्या सविता ने प्रशासनिक सेवा पास की?

कड़ी मेहनत के बाद सविता ने राज्य प्रशासनिक सेवा (MPPSC) परीक्षा पास की. उन्होंने दो बार परीक्षा पास की और दूसरी बार बेहतर रैंक हासिल की. वह नगर निगम में अधिकारी बनीं और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. हालांकि मीडिया में उन्हें IAS बताया गया, हालांकि उन्होंने साफ करते हुए बताया कि मेरे बारे में कुछ गलत जानकारी फैलाई जा रही है जो कि पूरी तरह से गलत मैंने UPSC क्लीयर नहीं किया है और न ही मैं IAS हूं.

मैंने MPPSC क्लीयर किया और वर्तमान मे मैं नगर निगर के पद पर फिलहाल राज्य प्रशासनिक सेवा (PCS) अधिकारी हूं. आगे उन्होंने कहा कि जो कि आप लोगों मेरे परिवार के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं वो भी सही नहीं है और मेरे पुरानी फोटो को शेयर रहे हैं. मेरी शादी 2013 में हुई थी और मेरा एक बेटा है.

क्या शादी के बाद भी अत्याचार खत्म हुआ?

नौकरी मिलने के बाद भी उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ. उनका पति बार-बार आता, मारपीट करता और पैसे लेकर चला जाता. IAS सविता प्रधान ने बताया कि 'एक दिन वह मेरे एमए की परीक्षा के दौरान आया… उसने मुझे मारना शुरू कर दिया… फिर मेरे ऊपर पेशाब फेंक दिया.' लेकिन इस बार सविता ने चुप रहने के बजाय आवाज उठाई. उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को फोन किया और पुलिस की मदद से अपने पति के खिलाफ कार्रवाई करवाई.

आज सविता प्रधान क्यों हैं लाखों महिलाओं की प्रेरणा?

आज सविता प्रधान एक मजबूत और ईमानदार अधिकारी के रूप में जानी जाती हैं. उन्होंने न सिर्फ अपने जीवन को बदला, बल्कि यह भी साबित किया कि अन्याय सहना सबसे बड़ी गलती है. उनकी कहानी यह सिखाती है कि हालात कितने भी खराब हों, हार नहीं माननी चाहिए आत्मसम्मान सबसे जरूरी है और सही समय पर आवाज उठाना ही असली ताकत है.

अगला लेख