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आजादी के बाद पहली बार वोटों का ये सैलाब किसे डुबोएगा? बंगाल और तमिल में महिला वोटर का दबदबा

तमिलनाडु में 85.03% और पश्चिम बंगाल (पहला चरण) में 92.85% मतदान दर्ज किया गया, जो आज़ादी के बाद अब तक का सबसे अधिक है. इससे पहले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मतदान 78.29% (2011) और पश्चिम बंगाल में 84.72% (2011) रहा था. दोनों राज्यों में महिलाओं की मतदान में भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही.

आजादी के बाद पहली बार वोटों का ये सैलाब किसे डुबोएगा? बंगाल और तमिल में महिला वोटर का दबदबा
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( Image Source:  ANI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Updated on: 23 April 2026 9:01 PM IST

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इस बार हुए विधानसभा चुनावों ने लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. दोनों राज्यों में आज़ादी के बाद अब तक का सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर आम मतदाताओं तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदान 95.85% तक पहुंच गया, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 85.03% दर्ज किया गया. इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि जनता इस बार अपने अधिकार को लेकर पहले से ज्यादा सजग और सक्रिय नजर आई.

क्या चुनाव के दौरान हिंसा का असर मतदान पर पड़ा?

पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान शाम 6 बजे समाप्त हुआ, लेकिन इस दौरान कई जगहों पर हिंसा और झड़पों की खबरें भी सामने आईं. कई इलाकों में Trinamool Congress और Bharatiya Janata Party के समर्थकों के बीच टकराव देखने को मिला.

मुर्शिदाबाद में Aam Janata Unnayan Party के नेता हुमायूं कबीर के समर्थकों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई. वहीं दक्षिण दिनाजपुर में एक बीजेपी उम्मीदवार पर हमले का आरोप भी लगा. हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि कुल मिलाकर मतदान "largely peaceful" रहा.

तमिलनाडु में कैसा रहा चुनावी मुकाबला?

तमिलनाडु में इस बार एक ही चरण में मतदान हुआ और पूरे दिन वोटिंग का रुझान स्थिर बना रहा. राज्य में करीब 5.67 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. यहां मुख्य मुकाबला Dravida Munnetra Kazhagam, All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam-बीजेपी गठबंधन और अभिनेता Vijay की पार्टी TVK के बीच माना जा रहा है.

क्या कहते हैं चुनाव आयोग के आंकड़े और बयान?

मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने कहा कि 'आज़ादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ है - चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर मतदाता को सलाम करता है.' उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया और मतदाताओं की जागरूकता की सराहना की.

क्या राजनीतिक दलों ने इस मतदान को अपने पक्ष में बताया?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मतदान के रुझान से साफ है कि उनकी पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रिकॉर्ड मतदान को "overwhelming mandate for change" बताया और मतदाताओं को बधाई दी. टीएमसी नेता कुणाल घोष ने दावा किया कि 152 सीटों में से उनकी पार्टी 125 से ज्यादा सीटें जीत सकती है.

क्या SIR का असर पड़ा?

इस बार मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए थे. SIR प्रक्रिया के तहत करीब 91 लाख नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाता संख्या 7.6 करोड़ से घटकर 6.8 करोड़ रह गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया ने मतदाता सूची को "क्लीन" किया, जिससे वास्तविक वोटरों की भागीदारी बढ़ी और प्रतिशत में उछाल देखने को मिला.

क्या ज्यादा मतदान का मतलब सत्ता परिवर्तन होता है?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अधिक मतदान को अक्सर एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोध) से जोड़ा जाता है, लेकिन यह हर बार सही साबित नहीं होता. विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक दशक में कई राज्यों में उच्च मतदान के बावजूद मौजूदा सरकारें दोबारा सत्ता में लौटी हैं. इसलिए असली तस्वीर नतीजों के दिन ही साफ होगी.

क्या मतदाताओं की वापसी ने बनाया रिकॉर्ड?

इस बार बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी वोट डालने पहुंचे जो राज्य से बाहर काम करते हैं. उन्हें डर था कि कहीं उनका नाम मतदाता सूची से हट न जाए. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और सूरत जैसे शहरों से लोग वापस अपने गृह राज्य पहुंचे और मतदान में हिस्सा लिया. इसके अलावा, करीब 2.4 लाख केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती ने भी मतदान को सुरक्षित और सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभाई. रिकॉर्ड मतदान यह जरूर दिखाता है कि जनता में जबरदस्त उत्साह और जागरूकता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि किस पार्टी को फायदा होगा.

विधानसभा चुनाव 2026ममता बनर्जी
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