महाकाल दर्शन हुआ और भी महंगा, भस्म आरती के बाद इस सुविधा के लिए देने होंगे पैसे
उज्जैन के महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा अपडेट है. अब महाकाल लोक के प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए 100 रुपये का टिकट देना होगा. यह सुविधा अब तक पूरी तरह मुफ्त थी.
महाकाल के मंदिर में लाइट एंड शो के लिए देने होंगे पैसे
महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब यात्रा पहले से थोड़ी महंगी हो गई है. भस्म आरती, संध्या आरती, शयन आरती और शीघ्र दर्शन के बाद अब महाकाल लोक के लाइट एंड साउंड शो के लिए भी पैसे देने होंगे. मंदिर प्रबंधन समिति ने इस शो का टिकट 100 रुपये कर दिया है, जो पहले पूरी तरह फ्री था.
महाकाल लोक का यह भव्य शो श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय है, जिसमें भगवान महाकाल, शिप्रा नदी और उज्जैन की गौरवशाली कहानी को आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया जाता है. ऐसे में अब जो श्रद्धालु इस शो का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें दर्शन के साथ-साथ इसके लिए अलग से टिकट भी खरीदना होगा.
किस शो के लिए देने होंगे 100 रुपये
मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि अब महाकाल लोक के लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए श्रद्धालुओं को 100 रुपये का टिकट खरीदना होगा. पहले यह शो मुफ्त में दिखाया जाता था. यह शो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है और रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे देखने पहुंचते हैं.
कब शुरू हुआ था यह शो?
यह खास लाइट एंड साउंड शो दीपावली 2025 के दौरान महाकाल लोक में शुरू किया गया था. 25 अक्टूबर 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका शुभारंभ किया था. शुरुआत के बाद करीब पांच महीने तक श्रद्धालु इस शो का आनंद बिना किसी शुल्क के ले सकते थे, लेकिन अब इसके लिए टिकट लेना जरूरी होगा.
लाइट एंड साउंड शो में क्या खास है?
यह शो रुद्रसागर के पास आधुनिक तकनीक की मदद से दिखाया जाता है, जिसमें वाटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर और रंग-बिरंगी लाइटों का इस्तेमाल किया जाता है. करीब 25 मिनट के इस शो में भगवान महाकाल, पवित्र शिप्रा नदी और उज्जैन की ऐतिहासिक और धार्मिक महिमा को बेहद आकर्षक अंदाज में दिखाया जाता है.
कितनी लागत से तैयार हुआ था प्रोजेक्ट?
जानकारी के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी योजना के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने तैयार कराया था. इस लाइट एंड साउंड शो को बनाने में करीब 18 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे. वहीं, इसे चलाने और इसकी देखरेख करने पर हर महीने लगभग डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है.




