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कौन हैं 24 साल के वकील असद अली वारसी? SC में डाली एक याचिका, मध्य प्रदेश पुलिस की खुल गई पोल

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए SHO को सस्पेंड करने का आदेश दिया.

Indore Police Fake Witnesses Supreme Court
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Supreme Court 

( Image Source:  AI: Sora )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 30 Jan 2026 5:04 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एक अहम अंतरिम आदेश में इंदौर के चंदन नगर थाना प्रभारी (SHO) इंद्रमणि पटेल को पद से हटाने का निर्देश दिया है. यह कार्रवाई एक हस्तक्षेप याचिका के बाद हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने 150 से अधिक मामलों में दो गवाहों का बार-बार इस्तेमाल किया.

इस मामले में 24 वर्षीय वकील असद अली वारसी की भूमिका निर्णायक रही, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर पुलिस जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए. सुनवाई के दौरान वारसी ने कहा, “वे (पुलिस) लोक सेवक हैं, राजा नहीं. यह (अंतरिम आदेश) उन लोगों के लिए एक जवाब है जो कहते हैं कि अदालतें पुलिस के खिलाफ कुछ नहीं करतीं.”

SHO पर सीधी कार्रवाई

13 जनवरी को जारी अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SHO इंद्रमणि पटेल ने “कथित अपराधों के पुलिस संस्करण के समर्थन में एक ही गवाहों के बार-बार उपयोग का सहारा लिया/अनुमति दी.”

अदालत ने इस प्रवृत्ति को जांच की निष्पक्षता के लिए घातक बताते हुए कहा कि पहले से तैयार गवाहों का इस्तेमाल जांच की निष्पक्षता और तटस्थता की जड़ पर ही प्रहार करता है और यह कानून के शासन द्वारा शासित देश के लिए एक अभिशाप है.

पुलिस आचरण पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में SHO पटेल को लेकर यह भी टिप्पणी की कि वह बदमाश प्रतीत होता है. अदालत की यह सख्त भाषा इस बात का संकेत है कि शीर्ष अदालत पुलिस की कथित मनमानी को गंभीरता से ले रही है.

जमानत याचिका से खुला फर्जी गवाहों का मामला

पुलिस द्वारा फर्जी गवाहों के इस्तेमाल का मुद्दा नवंबर 2025 में तब सामने आया, जब पश्चिमी इंदौर के चंदन नगर निवासी 58 वर्षीय अनवर हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की. उन पर रियायती चावल की कालाबाजारी का आरोप लगाया गया था. जमानत का विरोध करते हुए पुलिस ने हलफनामा दाखिल कर दावा किया कि हुसैन के खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज या लंबित हैं. हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि इनमें से कम से कम 4 मामलों में हुसैन का कोई लेना-देना नहीं था, जिनमें आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज एक बलात्कार का मामला भी शामिल है.

जब पुलिस से सवाल किया गया तो उसने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपी और उसके पिता का नाम एक जैसा होने के कारण भ्रम पैदा हुआ और यह डेटा कंप्यूटर द्वारा उत्पन्न था. इस पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और संदीप मेहता की बेंच ने इस स्पष्टीकरण को कमजोर बहाना बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया.

झूठे बयान पर अधिकारियों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त दिशेष अग्रवाल और SHO इंद्रमणि पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐसे मामले में इस न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से झूठे बयान दिए हैं, जिसमें एक नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता का सवाल है.

सुनवाई के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ. 25 नवंबर 2025 को असद अली वारसी ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर आरोप लगाया कि SHO के कार्यकाल में सलमान कुरैशी और आमिर रंगरेज नाम के 2 व्यक्तियों को 165 मामलों में गवाह बनाया गया.

कौन हैं वकील असद अली वारसी?

24 साल के वकील असद अली वारसी इंदौर के रहने वाले हैं. वारसी को 1 सितंबर 2024 की रात जब वे अपने चाचा के घर से वापस लौट रहे थे तो पुलिस रोक लिया था. इसके बाद पुलिस ने रिश्वत भी मांगी थी, लेकिन असद ने रिश्वत देने से मना कर दिया था तो पुलिस ने उनके खिलाफ अलग-अलग धारों में मामला दर्ज कर लिया था. जिससे वारसी की पढ़ाई का भी नुकसान हुआ था.

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