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पति संग नहीं रहना चाहती थी पत्नी, ग्वालियर हाईकोर्ट ने दी प्रेमी संग रहने की इजाजत; कपल को मिली 'शौर्य दीदी' सुरक्षा

ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक 19 साल की युवती को उसकी इच्छा के अनुसार बॉयफ्रेंड के साथ रहने की अनुमति दी. कोर्ट ने उसे बालिग मानते हुए सुरक्षा के लिए 6 महीने तक ‘शौर्या दीदी’ भी नियुक्त की.

ग्वालियर में महिला को मिली प्रेमी संग रहने की इजाजत
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ग्वालियर में महिला को मिली प्रेमी संग रहने की इजाजत
( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Published on: 5 April 2026 2:34 PM

मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट में एक बहुत अनोखा और चर्चित मामला सामने आया है. एक 19 साल की युवती ने कोर्ट में कहा कि वह अपने 40 साल के पति के साथ वैवाहिक जीवन नहीं चलाना चाहती. उम्र का 21 साल का बड़ा अंतर होने के कारण दोनों के बीच न तो समझदारी बन पाई और न ही रिश्ते में खुशी रही. युवती ने साफ कहा कि वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहना चाहती है. हाईकोर्ट ने युवती की इस इच्छा को मान लिया और उसे अपने प्रेमी के साथ जाने की पूरी अनुमति दे दी. साथ ही कोर्ट ने युवती की सुरक्षा और देखभाल के लिए 6 महीने तक 'शौर्या दीदी' भी नियुक्त कर दी.

मामला क्या था?

यह पूरा मामला हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा था. युवती के पति अवधेश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. उनके वकील सुरेश पाल सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी को अनुज कुमार नाम के व्यक्ति ने अवैध तरीके से अपने पास रख रखा है. पुलिस ने युवती को पहले वन स्टॉप सेंटर में रखा था. सुनवाई के दिन कोर्ट में युवती को पेश किया गया. वहां उसके माता-पिता, पति अवधेश और उसका बॉयफ्रेंड अनुज कुमार भी मौजूद थे.

लड़की ने कोर्ट में क्या कहा?

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बेंच ने युवती से उसकी मर्जी के बारे में पूछा. युवती ने बहुत साफ और मजबूती से जवाब दिया: वह बालिग (19 साल की) है और अपनी मर्जी से फैसला ले रही है. वह न तो किसी अवैध तरीके से रोकी गई है और न ही किसी दबाव में है. वह अपने पति अवधेश और माता-पिता के साथ रहना नहीं चाहती. पति की उम्र 40 साल है, जबकि उसकी उम्र सिर्फ 19 साल है. इतने बड़े उम्र के अंतर के कारण दोनों के बीच न तो भावनात्मक जुड़ाव बन पाया और न ही वैवाहिक जीवन में सामंजस्य.

पीड़िता की हुई काउंसलिंग

उसने यह भी कहा कि पति के साथ रहते हुए उसे गलत व्यवहार का भी सामना करना पड़ा. कोर्ट ने युवती की काउंसलिंग भी कराई. शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी ने उससे बात की, लेकिन काउंसलिंग के बाद भी युवती ने अपने फैसले पर कोई बदलाव नहीं किया. उसने दोबारा कहा कि वह अनुज कुमार के साथ ही रहना चाहती है. अनुज कुमार ने भी कोर्ट को लिखित आश्वासन दिया कि वह युवती की पूरी देखभाल करेगा, उसे कोई तकलीफ या प्रताड़ना नहीं देगा और उसकी भलाई का पूरा ध्यान रखेगा.

कोर्ट का फैसला

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि युवती बालिग है और अपनी इच्छा से फैसला ले रही है. इसलिए याचिका का मकसद खत्म हो चुका है. कोर्ट ने युवती को अनुज कुमार के साथ जाने की अनुमति दे दी. साथ ही उसकी सुरक्षा के लिए दो खास व्यवस्थाएं कीं शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी और लेडी कांस्टेबल भावना को 6 महीने के लिए 'शौर्या दीदी' नियुक्त किया गया. ये दोनों अगले 6 महीनों तक युवती के संपर्क में रहेंगी, उसकी सुरक्षा, भलाई और मार्गदर्शन देखेंगी. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि युवती को वन स्टॉप सेंटर, कंपू ग्वालियर से सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छोड़ दिया जाए. इस फैसले के साथ याचिका का समापन कर दिया गया.

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