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कौन था नक्सली कमांडर अनल दा उर्फ ‘तूफान’, जिसे झारखंड में सुरक्षाबलों ने किया ढेर? सरकार ने रखा था एक करोड़ का इनाम

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षाबलों ने माओवादी शीर्ष नेता अनल दा उर्फ तूफान को मुठभेड़ में मार गिराया. ₹1 करोड़ का इनामी यह नक्सली झारखंड-ओडिशा-छत्तीसगढ़ बेल्ट में बड़े हमलों की साजिश रचता था.

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( Image Source:  ANI (फाइल फोटो) )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 22 Jan 2026 3:08 PM

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पश्चिमी सिंहभूम जिले के दुर्गम सारंडा जंगलों में हुई भीषण मुठभेड़ में माओवादियों का शीर्ष कमांडर अनल दा उर्फ ‘तूफान’ मारा गया है. सरकार ने इस नक्सली नेता पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. अनल दा की मौत को झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे नक्सली नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

यह मुठभेड़ किरीबुरू थाना क्षेत्र के कुमडी इलाके में उस वक्त हुई, जब सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम को खुफिया इनपुट मिला कि बड़े नक्सली नेता अपने दस्ते के साथ सारंडा के जंगलों में छिपे हुए हैं. गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया. खुद को घिरा देख माओवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई. इसी मुठभेड़ में अनल दा ढेर हो गया, जबकि उसके कई अन्य साथी भी मारे जाने की खबर है.

कौन था अनल दा उर्फ ‘तूफान’?

अनल दा उर्फ तूफान का असली नाम पतिराम मांझी था, जिसे पतिराम मरांडी और रमेश के नाम से भी जाना जाता था. वह गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र के झरहाबाले गांव का रहने वाला था. उसके पिता का नाम टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी बताया जाता है. अनल दा CPI (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था और संगठन के सबसे ताकतवर रणनीतिकारों में गिना जाता था. सुरक्षाबलों के मुताबिक, वह झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में बड़े हमलों की योजना, हथियारों की सप्लाई और कैडर मूवमेंट का जिम्मा संभालता था. कई बड़े नक्सली हमलों में उसकी भूमिका मानी जाती रही है.

क्यों था सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में?

अनल दा लंबे समय से सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था. उस पर झारखंड सरकार और केंद्र की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. वह सारंडा, बूढ़ा पहाड़ और कोल्हान क्षेत्र में नक्सली संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटा हुआ था. यही वजह थी कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में थीं.

नक्सलियों पर निर्णायक वार

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अनल दा की मौत से माओवादी संगठन की कमर टूट गई है. वह संगठन की रीढ़ माना जाता था और उसके मारे जाने से नक्सलियों की रणनीति और नेतृत्व पर गहरा असर पड़ेगा. मुठभेड़ स्थल से आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और नक्सली दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं.

फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, क्योंकि कुछ नक्सलियों के जंगल में भागने की आशंका जताई जा रही है. सुरक्षाबलों का कहना है कि देशभर में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान के तहत आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है. अनल दा उर्फ तूफान का खात्मा यह संकेत देता है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, और सुरक्षाबल किसी भी कीमत पर शीर्ष नेतृत्व को बख्शने के मूड में नहीं हैं.

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