मारा गया शहीद ASP गिरिपुंजे का हत्यारा मंगडु, 8 लाख का था इनाम, सुकमा में हुए एनकाउंटर में 14 माओवादी ढेर
Sukma Encounter : छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर के जंगल में साल 2026 की पहली बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई में DRG ने 14 माओवादियों को ढेर कर दिया. इस एनकाउंटर में 8 लाख का इनामी कमांडर मंगडु भी मारा गया. जानिए मंगडु का किन-किन हत्याओं में आया था नाम, पूरा ऑपरेशन और इसका नक्सलियों पर कितना होगा असर, के बारे में सब कुछ.
Sukma Encounter News: नया साल यानी 2026 की शुरुआत होते ही सुरक्षा बलों ने लाल आतंक को करारा संदेश दे दिया. छत्तीसगढ़ के सुकमा में DRG (District Reserve Guard) ने 2026 की पहली बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई करते हुए 14 माओवादियों को ढेर कर दिया. इस एनकाउंटर में 8 लाख रुपये का इनामी नक्सली कमांडर मंगडु भी मारा गया, जिसे इलाके में नक्सली नेटवर्क की रीढ़ माना जाता था. मंगडु का एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे की हत्या में भी नाम आया था. खास बात यह है कि जंगल में चली गोलियों ने साफ कर दिया कि अब नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाने खत्म हो रहे हैं.
स्टेट मिरर अब WhatsApp पर भी, सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करें
छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिलों में 3 जनवरी की सुबह DRG बलों के साथ दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 माओवादी मारे गए. साल 2026 के पहले तीन में माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच यह पहली झड़प थी. 14 माओवादियों में से 12 दक्षिणी सुकमा में मारे गए. जबकि दो बीजापुर में मारे गए. डीआरजी के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ शनिवार सुबह 5 बजे मुठभेड़ हुई थी. सुकमा में मारे गए लोगों में कोंटा क्षेत्र समिति के सचिव मंगडू भी शामिल था. इलाके में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी है. सुरक्षा बलों के जवान हालात पर नजर रखे हुए हैं.
नक्सलियों पर बरसा तबाही का मंजर
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चवान ने कहा कि कोंटा क्षेत्र समिति के सभी सशस्त्र माओवादी मारे गए. यह मुठभेड़ ऐसे समय हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा माओवाद को खत्म करने के लिए मार्च 2026 की तय समय सीमा नजदीक आ रही है. यह घटना पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन 1 के एक शीर्ष कमांडर बरसा देवा उर्फ बरसा सुक्का सहित कई माओवादियों का तेलंगाना पुलिस प्रमुख बी शिवधर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण से पहले हुई है.
मुठभेड़ के दौरान जवानों ने कुख्यात DVCM मंगडु का भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया. नक्सलियों में डीवीसीएम मेंबर मंगलू और हितेश का भी शव मिला है. दोनों कोंटा के उस आईईडी विस्फोट में शामिल थे, जिसमें एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे शहीद हुए थे.
मंगडु की मौत से कोंटा कमेटी बर्बाद
मारे गए नक्सलियों में कोंटा एरिया कमेटी के सचिव मंगडू प्रमुख हैं, जो संगठन के वरिष्ठ नेता था. पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मुठभेड़ में कोंटा कमेटी के सभी सशस्त्र सदस्य समाप्त हो गए. डीआरजी जवानों ने किस्ताराम और कोन्टा के जंगलों में खुफिया जानकारी के आधार पर घेराबंदी की, जिसके बाद नक्सलियों ने पहले गोलीबारी शुरू की. जवाबी कार्रवाई में बड़ा नुकसान हुआ.
इस पूरे ऑपरेशन की कमान सुकमा के पुलिस अधीक्षक (SP) किरण चव्हाण (Kiran Chavan) खुद संभाल रहे थे. सूत्रों के अनुसार इस मुठभेड़ में नक्सली कमांडर मंगडु (Naxal commander Mangdu) के भी मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी प्रतीक्षारत है. मारे गए नक्सलियों में कोन्टा एरिया कमेटी (Konta Area Committee) के एसीएम हितेश (ACM Hitesh) भी शामिल है.
सर्च अभियान जारी
सुकमा पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिले के दक्षिणी क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षाबलों की ज्वाइंट टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी. सर्च के दौरान तड़के फायरिंग शुरू हुई, जो रुक-रुक कर चलती रही. अब तक सुकमा में 14 नक्सलियों को मार गिराया गया है. मौके से कई शव बरामद किए गए हैं. अधिकारी ने साफ किया कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है और पूरे इलाके की गहन सर्चिंग की जा रही है.
बीजापुर में 2 नक्सली ढेर
दूसरी ओर बीजापुर जिले के गगनपल्ली गांव (थाना बसागुड़ा) के जंगलों में डीआरजी की टीम का नक्सलियों से सामना हो गया. यह मुठभेड़ सुबह करीब 5 बजे शुरू हुई. इस ऑपरेशन में दो माओवादी मारे गए, जिनमें कुख्यात नक्सली हुंगा मडकाम भी शामिल बताया जा रहा है. सुरक्षाबलों ने मौके से एक SLR और एक 12 बोर राइफल भी बरामद की है. सुकमा पुलिस के मुताबिक आशंका जताई जा रही है कि जंगलों में अभी भी कुछ नक्सली छिपे हो सकते हैं. अतिरिक्त बलों को मौके पर भेजा गया है और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है.
सोढ़ी लिंगे और हड़मा पर था 5-5 लाख का इनाम
शनिवार की यह कार्रवाई बस्तर में नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. दूसरी तरफ बीजापुर में मारे गए नक्सली कई सीरियल किलिंग में शामिल रहे हैं. मारे गए नक्सलियों में एक महिला और पुरुष नक्सली भी शामिल हैं, जिनका नाम सोढ़ी लिंगे और पोड़ियाम हड़मा है. यह दोनों एरिया कमेटी मेंबर के सदस्य थे. इनके सिर पर इनाम भी घोषित था. यह सुरक्षाबलों के खिलाफ कई हुए हमलों में शामिल थे.
60 दिनों 67 नक्सलियों का एनकाउंटर
अधिकारियों के मुताबिक दोनों नक्सलियों पर कुल 5-5 लाख का इनाम घोषित था. जानकारी के अनुसार नक्सली बैठक ले रहे थे और हमले की तैयारी में थे. इसी दौरान जवानों ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई की. खास बात यह है कि बस्तर में बीते 60 दिनों 67 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं. नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में AK 47, INSAS, SLR Rifles जैसे हथियारों भी बरामद किए गए हैं.
छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे 2025 में मिल कामयाबी
- 2025 में बस्तर संभाग के अलग-अलग जिले में 256 नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया.
- 2025 में मुठभेड़ों के बाद, सर्च ऑपरेशन के दौरान और सरेंडर नक्सलियों से कुल 665 हथियार बरामद हुए.
- 2025 में 1560 नक्सलियों ने सरेंडर किया.
- साल 2025 में नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा में 52 से ज्यादा नए सुरक्षा कैंप खोले गए.
- 2024 से अब तक राज्य में 500 से ज्यादा माओवादी मारे गए थे.
कौन है कमांडर मंगडू?
मंगडू को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सक्रिय नक्सली समूह CPI (माओवादी) का एक ऊंचा कमांडर और कोंटा एरिया कमेटी का सचिव बताया गया है. उसे स्थानीय नक्सली संगठन के प्रभावशाली नेता के रूप में वर्गीकृत किया जाता था. मंगडु सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान मारा गया.
वेट्टी मुका उर्फ मंगडू की उम्र लगभग 40 वर्ष है. वह तोयापारा गोरगुंडा थाना पोलमपल्ली जिला सुकमा का रहने वाला है. उसके पास आधुनिक उपकरण जैसे टेबलेट, सौर ऊर्जा प्लेट एवं बैटरी, संचार संसाधन टच स्क्रीन मोबाइल, वॉकी टॉकी सेट, एवं सोनी रेडियो आदि थे. वह कोंटा एरिया कमेटी सचिव था. उसके पास एके 47 था.वह आठ लाख रुपये का घोषित अपराधी था.
यह एनकाउंटर सुकमा जिले के पामलूर (किस्ताराम थाना क्षेत्र) के जंगलों में हुआ. मंगडू के साथ कई अन्य नक्सली भी इस ऑपरेशन में ढेर किए गए. सुरक्षाबलों की District Reserve Guard (DRG) टीम ने इस मुठभेड़ को अंजाम दिया. घटना की निगरानी एसपी किरण चव्हाण कर रहे थे.
किन मामलों में रहा मंगडु शामिल?
सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जानकारी के मुताबिक मंगडू कोंटा एरिया कमेटी का सचिव था. वह संगठन बस्तर क्षेत्र में माओवादी और नक्सली गतिविधियों का एक प्रमुख कार्यकारी प्रकोष्ठ है. माओवादी हिंसा के ढांचे के भीतर उसने कई नक्सली अभियानों का नेतृत्व कर चुका था. वह, सुरक्षा बलों पर IED हमलों, फायरिंग, बम विस्फोट और संवेदनशील इलाकों में उपद्रव जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं.
शहीद ASP गिरिपुंजे की शहादत का बदला
यह कार्रवाई कोन्टा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव गिरिपुंजे की हत्या से जुड़ी है. सुरक्षा बलों ने उन कमांडरों को निशाना बनाया जो इस घटना के लिए जिम्मेदार थे. इस सफलता से बस्तर में माओवादी नेटवर्क कमजोर हुआ है. आज के एनकाउंटर को नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में बड़ी सफलता मारा जा रहा है.





