अजगैबीनाथ धाम से भरते हैं गंगाजल, फिर 105 किमी पैदल यात्रा, क्या है झारखंड का श्रावणी मेला जो भगवान शिव को है समर्पित
सावन में लगने वाला झारखंड का श्रावणी मेला भगवान शिव की भक्ति का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम, सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर पैदल चलकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं.
क्या है झारखंड का श्रावणी मेला
श्रावण महीने में लगने वाला झारखंड का श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है. इस दौरान लाखों शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. खास बात यह है कि श्रद्धालु पहले बिहार के अजगैबीनाथ धाम, सुल्तानगंज से गंगाजल भरते हैं और फिर करीब 105 किलोमीटर पैदल यात्रा करके देवघर पहुंचते हैं.
यह पूरी यात्रा भगवान शिव के प्रति आस्था, भक्ति और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है. हर साल सावन में लाखों कांवड़िए इस कठिन यात्रा को पूरा करते हैं और बाबा बैद्यनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं. आइए जानते हैं श्रावणी मेला कहां लगता है, इसकी शुरुआत कब से होती है और यह धार्मिक आयोजन इतना खास क्यों माना जाता है.
क्या होता है श्रावणी मेला?
श्रावणी मेला भगवान शिव को समर्पित एक महीने तक चलने वाला धार्मिक आयोजन है. यह झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और दुमका के बाबा बासुकीनाथ धाम में लगता है. सावन के पूरे महीने यहां लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.
कांवड़ यात्रा से जुड़ा है मेला
श्रावणी मेले की सबसे खास बात कांवड़ यात्रा है. श्रद्धालु पहले बिहार के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम से गंगा जल भरते हैं. इसके बाद वे करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ पर जल अर्पित करते हैं. यह यात्रा श्रद्धा, तप और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है.
कब से शुरू होता है और कितने दिन चलता है?
इस साल श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू हो रहा है. यह मेला पूरे सावन महीने यानी करीब एक महीने तक चलता है. इस दौरान हर दिन बड़ी संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम जाते हैं.
हर साल कितने श्रद्धालु आते हैं?
प्रशासन का कहना है कि हर साल श्रावणी मेले में लगभग 35 से 40 लाख श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सावन के पूरे महीने यहां भारत के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में शिवभक्त भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा करने आते हैं.
इस बार कैसी हैं सुरक्षा तैयारियां?
इस बार श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहले से ज्यादा सख्त इंतजाम किए गए हैं. पूरे मेले में 11,500 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. वहीं, देवघर और आसपास के इलाकों में 100 पुलिस चौकियां बनाई गई हैं, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. इसके अलावा मेले पर नजर रखने के लिए हजारों सीसीटीवी कैमरे, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वाले ड्रोन और फेस रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. इनकी मदद से भीड़ की लगातार निगरानी होगी और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत जानकारी मिल सकेगी. प्रशासन का कहना है कि मेले में आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.




