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Jharkhand Protest कैसे विपक्ष के लिए बना गले की हड्डी, न निगलते बना न उगलते- राहुल-केजरीवाल से लेकर पूरे INDIA गठबंधन तक की ‘अग्निपरीक्षा’

झारखंड JPSC-JSSC प्रोटेस्ट से राहुल गांधी, केजरीवाल और INDIA गठबंधन की मुश्किल बढ़ी. छात्रों पर कार्रवाई और सरकार के स्टैंड ने विपक्ष के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े किए.

Jharkhand Student Protest Rahull Gandhi
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दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के हक, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य की लड़ाई का सबसे बड़ा झंडाबरदार बनने वाला विपक्ष अब झारखंड में खुद अपने ही नैरेटिव के कटघरे में खड़ा है. दिल्ली में नीट पेपर लीक 2026 पर सवाल उठे तो राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव, डिंपल यादव और अरविंद केजरीवाल तक सड़क पर उतरते आए. नॉर्थ-साउथ और ईस्ट वेस्ट के विपक्षी नेताओं और सेलिब्रिटीज का जमावड़ा लग गया, लेकिन अब वही सवाल झारखंड में हैं, जहां सत्ता में INDIA गठबंधन का जेएमएम-कांग्रेस है.

झारखंड के छात्र JPSC-JSSC की कथित अनियमितताओं को लेकर हजारों अभ्यर्थी सड़क पर हैं, विधानसभा तक पहुंच गए, पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. ऐसे में विपक्ष की आवाज अचानक उतनी बुलंद क्यों नहीं? क्या बीजेपी को अब हमला करने के लिए नया हथियार मिल गया है- ‘दिल्ली में आंदोलन, झारखंड में मौन’ क्यों.

1. झारखंड प्रोटेस्ट में अब तक क्या?

झारखंड का छात्र आंदोलन अचानक सड़क पर नहीं आया. 14वीं JPSC सिविल सर्विस परीक्षा के परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे. 21 जुलाई को JPSC कार्यालय और संबंधित ठिकानों पर CID की कार्रवाई हुई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया. इसके बाद JPSC ने जुलाई से सितंबर के बीच होने वाली नौ परीक्षाओं को अगले आदेश तक टाल दिया.

29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना तेज हुआ. छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच शामिल रही.

आंदोलन के प्रमुख चेहरों में देवेंद्र नाथ महतो और संजय मेहता रहे. 10 अगस्त को बातचीत बेनतीजा रहने के बाद हजारों अभ्यर्थियों ने विधानसभा मार्च किया. बैरिकेड तोड़े जाने के बाद पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया.

सरकार ने 14वीं JPSC, 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किया, लेकिन छात्रों ने इसे पर्याप्त नहीं माना. सरकार के ‘98 फीसदी मांगें मानने’ के दावे को भी छात्रों ने खारिज किया और कहा कि उनकी 13 परीक्षाओं को रद्द करने की मांग में सिर्फ तीन पर फैसला हुआ है.

2. झारखंड विपक्ष के लिए ‘गले की हड्डी’ क्यों?

यहीं से विपक्ष की असली परेशानी शुरू होती है. जिस पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता, बेरोजगारी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को कांग्रेस, सपा और AAP दिल्ली में केंद्र के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाते रहे, वही मुद्दे अब झारखंड में INDIA गठबंधन की सरकार के सामने खड़े हैं.

फर्क सिर्फ इतना है कि दिल्ली में निशाना मोदी सरकार थी, जबकि रांची में सवाल हेमंत सोरेन सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही पर उठ रहे हैं.

यही विपक्ष का धर्मसंकट है. अगर कांग्रेस खुलकर छात्रों के साथ खड़ी होती है तो उसके गठबंधन सहयोगी JMM की सरकार कठघरे में आती है. अगर चुप रहती है तो बीजेपी को यह कहने का मौका मिलता है कि विपक्ष के लिए छात्रों का दर्द सत्ता के हिसाब से बदलता है. इसी राजनीतिक विरोधाभास को बीजेपी अब जोर-शोर से उछाल रही है. 29 जुलाई को बीजेपी सांसदों ने संसद में भी झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर प्रदर्शन किया और कांग्रेस पर ‘डबल स्टैंडर्ड’ का आरोप लगाया था.

3. Gen Z प्रोटेस्ट INDIA गठबंधन की ‘अग्निपरीक्षा’ कैसे?

यह आंदोलन अब सिर्फ JPSC-JSSC का विवाद नहीं रह गया है. यह विपक्ष के उस राष्ट्रीय नैरेटिव की परीक्षा बन चुका है जिसमें युवा, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दे हैं.

दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान विपक्षी नेताओं ने छात्रों के सवालों को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया. 20 जुलाई को डिंपल यादव CJP प्रदर्शनकारियों के साथ मार्च करती दिखीं और पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. इससे पहले अरविंद केजरीवाल भी जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हुए थे. राहुल गांधी अचानक पीएम आवास के बाहर अपने सांसदों के साथ धरने पर बैठ गए थे.

अब झारखंड में वही परीक्षा-व्यवस्था का सवाल सत्ता में बैठे INDIA गठबंधन के सामने है. इसलिए असली अग्निपरीक्षा यह है कि क्या विपक्ष सत्ता बदलने पर भी वही राजनीतिक कसौटी पर हेमंत सरकार को घेरेगा?

राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों पर बल प्रयोग की आलोचना 4ाू की है, लेकिन कांग्रेस से आगे जाकर गठबंधन सरकार पर राजनीतिक दबाव कितना बनेगा- यही सबसे बड़ा सवाल है. अरविंद केजरीवाल भी अघोषित रूप से चुप्पी साधे हुए हैं. डिंपल यादव को सीन से ही गायब है. संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर पर सत्र को ठप करने वाला विपक्ष इस बार वहां पर मुद्दा भी उठाने से कतरा रहा है.

4. अब तक किसका, क्या स्टैंड?

दरअसल, झारखंड के छात्र कथित भर्ती अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़े हैं. तीन JPSC परीक्षाएं रद्द होने और तीन सदस्यों के इस्तीफे के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ.

इस मसले पर हेमंत सोरेन सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया और कई मांगों पर कार्रवाई का दावा किया. लेकिन छात्रों ने सरकार के ‘98 फीसदी मांगें मानने’ के दावे को खारिज कर दिया.

राहुल गांधीने 10 अगस्त की पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को गलत बताया और समाधान के लिए बातचीत की मांग की.

बीजेपी ने आंदोलन को कांग्रेस-JMM सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए CBI जांच और जवाबदेही की मांग उठा रही है. 10 अगस्त की पुलिस कार्रवाई के बाद भाजपा ने 11 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया.

JPSC विवाद के बीच पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते जांच के घेरे में आए; बाद में CID ने उन्हें गिरफ्तार किया.

5. विपक्ष धर्मसंकट में कैसे?

जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन ने विपक्ष के लिए एक आसान राजनीतिक समीकरण बनाया था- छात्र बनाम केंद्र सरकार. इसलिए अरविंद केजरीवाल, डिंपल यादव और दूसरे विपक्षी नेता वहां पहुंच सके. 22 जुलाई को विपक्षी खेमे में भी अलग-अलग प्रदर्शन हुए; एक ओर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी का प्रदर्शन था, दूसरी ओर केजरीवाल, शरद पवार और अन्य नेता CJP के आंदोलन में पहुंचे. लेकिन झारखंड में समीकरण उलट गया है. यहां छात्र बनाम INDIA गठबंधन की राज्य सरकार का सवाल खड़ा हो रहा है.

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने झारखंड के छात्रों के प्रति समर्थन जताया है, लेकिन दिल्ली जैसी बड़ी विपक्षी राजनीतिक लामबंदी यहां नजर नहीं आई. उन्होंने कहा कि मैं, हर जगह नहीं जा सकता. यह अंतर राजनीतिक तौर पर विपक्ष के लिए असहज सवाल पैदा करता है. दिल्ली में आंदोलन विपक्ष के लिए सरकार घेरने का मंच था; झारखंड में वही आंदोलन उसके सहयोगी को घेर रहा है. यही असली धर्मसंकट है.

6. राहुल-अखिलेश, डिंपल, केजरीवाल की ‘अनकही चुप्पी’?

इस मसले पर विपक्ष पर ‘पूरी चुप्पी’ का आरोप लगाना सही नहीं होगा. राहुल गांधी ने झारखंड में पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है. लेकिन सवाल समर्थन की तीव्रता और राजनीतिक लामबंदी का है.

दिल्ली में CJP आंदोलन इतना बड़ा राजनीतिक मंच बना कि डिंपल यादव प्रदर्शनकारियों के साथ मार्च करती हुई हिरासत में ली गईं. केजरीवाल भी CJP के आंदोलन में पहुंचे. विपक्षी नेताओं ने परीक्षा व्यवस्था और केंद्र सरकार की जवाबदेही को राजनीतिक मुद्दा बनाया.

झारखंड में 10 अगस्त को तस्वीर और ज्यादा गंभीर हुई. छात्रों ने बैरिकेड पार कर विधानसभा परिसर तक पहुंचने की कोशिश की. पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी रिपोर्ट है.

फिर भी दिल्ली जैसी विपक्षी एकजुटता नहीं दिखी. राजनीतिक वजह साफ समझ आती है- यहां विरोध का निशाना विपक्ष नहीं, विपक्ष के गठबंधन की सरकार है.

7. क्या ये विपक्ष का दोहरा रवैया है?

यही वह सवाल है जिसे बीजेपी सबसे ज्यादा आक्रामक तरीके से उठा रही है. विपक्ष कह सकता है कि राहुल गांधी ने छात्रों के पक्ष में आवाज उठाई है और झारखंड सरकार ने बातचीत के जरिए कई कदम उठाए हैं. यह तथ्य भी है कि सरकार ने तीन JPSC परीक्षाएं रद्द कीं और तीन JPSC सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार किए.

लेकिन दूसरी तरफ छात्र अभी संतुष्ट नहीं हैं. वे कह रहे हैं कि मूल मांगों का बड़ा हिस्सा लंबित है. विधानसभा मार्च के दौरान बल प्रयोग ने विवाद को और राजनीतिक बना दिया.

इसलिए ‘दोहरा रवैया’ एक राजनीतिक आरोप है, लेकिन विपक्ष के लिए सवाल गंभीर है- अगर छात्रों पर बल प्रयोग दिल्ली में लोकतंत्र का संकट था, तो रांची में वही कसौटी क्यों नहीं? विपक्ष को अब सिर्फ बयान नहीं, अपनी एक समान नीति दिखानी होगी.

8. BJP ने कैसे झारखंड में विपक्ष को फंसा दिया?

बीजेपी ने विपक्ष के सबसे मजबूत नैरेटिव को उसी के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की है. विपक्ष वर्षों से कहता रहा है कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ी युवाओं के भविष्य का सवाल है. बीजेपी अब पूछ रही है. अगर यही बात झारखंड में है, तो कांग्रेस और उसके सहयोगी कितने मुखर हैं?

29 जुलाई को बीजेपी सांसदों ने संसद में झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर प्रदर्शन किया और कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया. 10 अगस्त की पुलिस कार्रवाई ने बीजेपी को दूसरा हथियार दे दिया. इसके बाद उसने 11 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया.

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