हरियाणा का रेहड़ी वाला बना करोड़ों का मालिक, दुबई फ्लैट से क्रिप्टो तक ऐसे की 8 करोड़ तक की ठगी, पुलिस ने धर दबोचा
पुलिस ने हरियाणा के राजेश कुमार को करीब 8 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है. इस नेटवर्क में सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे और नौकरीपेशा लोगों के भी पैसा लगाने की बात सामने आई है.
एक वक्त था जब राजेश कुमार उर्फ ‘नाना’ की पहचान सड़क किनारे कढ़ी और छोले-चावल बेचने वाले शख्स के तौर पर होती थी. साल 2019 के बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि वह कथित ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट नेटवर्क से जुड़ गया. देखते ही देखते निवेश पर मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों को जोड़ने का सिलसिला शुरू हुआ. आरोप है कि फर्जी ऐप में लोगों को उनके पैसे कई गुना बढ़ते हुए दिखाए जाते थे और कभी क्रिप्टो, तो कभी दुबई में फ्लैट-प्लॉट दिलाने का वादा किया जाता था. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से हरियाणा के कई जिलों में करीब 8 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की कथित ठगी का मामला सामने आया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला तब खुलकर सामने आया, जब पंचकूला के एक सरकारी ठेकेदार अशोक कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि शुरुआत में छोटा निवेश करने पर उन्हें रकम वापस मिल गई, जिससे भरोसा बढ़ा और बाद में उन्होंने लाखों रुपये लगा दिए. रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया, लेकिन जब पैसे निकालने की बारी आई तो कथित तौर पर नए-नए बहाने सामने आने लगे. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने राजेश समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और Mercedes, Audi और BMW जैसी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त कीं. अब इस मामले में दुबई से जुड़े कथित ऑपरेटरों की भूमिका भी जांच के घेरे में है.
राजेश कुमार क्या करता था?
पुलिस की जांच में सामने आया कि राजेश कुमार उर्फ ‘नाना’ की जिंदगी कभी एक साधारण रेहड़ी तक सीमित थी. साल 2019 तक वह कढ़ी और छोले-चावल बेचकर अपना घर चलाता था. इसके बाद उसकी पहचान ऑनलाइन इंवेस्टमेंट से जुड़े एक नेटवर्क से हुई और यहीं से उसकी कहानी ने नया मोड़ लिया.
कैसे ऑनलाइन इंवेस्टमेंट कंपनी से जुड़ा आरोपी?
दरअसल राजेश के दोस्त प्रमोद कांबोज ने उसे Bloom Company नाम के ऑनलाइन पोर्टल के बारे में जानकारी दी थी. राजेश ने शुरुआत में खुद करीब 7,500 रुपये लगाकर इस योजना को आजमाया. इसके बाद उसने दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी लगभग 2 लाख रुपये लगाए. निवेश के इस सिलसिले के साथ ही वह धीरे-धीरे खुद भी नए लोगों को इन योजनाओं से जोड़ने लगा. पुलिस के अनुसार, यहीं से वह इस नेटवर्क का हिस्सा बनता चला गया और लोगों को निवेश के लिए तैयार करने लगा.
कैसे करता था राजेश कुमार ठगी?
कथित ठगी के इस पूरे खेल में मोबाइल ऐप की भी अहम भूमिका बताई जा रही है. पुलिस के अनुसार, निवेश करने वाले लोगों को ऐप पर उनके खाते में रकम लगातार बढ़ती हुई नजर आती थी. स्क्रीन पर बढ़ता बैलेंस देखकर उन्हें भरोसा होने लगता था कि उनका पैसा सही जगह लगा है और उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा मिल रहा है. पुलिस का आरोप है कि ऐप में नजर आने वाले ये आंकड़े हकीकत में निवेशकों के खाते में मौजूद रकम नहीं थे. कथित तौर पर आंकड़ों में इस तरह बदलाव किया जाता था कि लोगों को लगातार फायदा होता हुआ दिखाई दे. इससे उनका भरोसा बढ़ता और वे दोबारा या पहले से ज्यादा रकम लगाने के लिए तैयार हो जाते. जांच में ऐसे एक मामले का भी जिक्र सामने आया, जिसमें करीब 30 लाख रुपये के निवेश को महज छह महीने के भीतर ऐप पर बढ़ाकर 68 लाख रुपये तक दिखाया गया था.
दुबई में फ्लैट से लेकर क्रिप्टो तक के वादे
लोगों को इस कथित नेटवर्क में सिर्फ बड़े रिटर्न का सपना दिखाकर नहीं जोड़ा जाता था. पुलिस के मुताबिक, निवेशकों से कहा जाता था कि उनके पैसे से दुबई में फ्लैट और प्लॉट तक बुक किए जा रहे हैं. ऐसे वादों के जरिए लोगों का भरोसा बढ़ाया गया और उन्हें अलग-अलग प्लान में रकम लगाने के लिए तैयार किया गया. इसके बाद निवेश का दायरा क्रिप्टोकरेंसी और दूसरी ऑनलाइन स्कीमों तक पहुंच गया.
पैसों की मांग करने पर क्या होता?
पुलिस के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी रकम वापस लेने की कोशिश करता था, तो उसे बताया जाता कि उसका पैसा पहले ही किसी दूसरी योजना या क्रिप्टो में लगाया जा चुका है. इसके बाद रकम को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर करने की बात कही जाती रही. जांच के दौरान Bloom Drive, LPNT Cryptocurrency, MSVP (Meta Soil Verse Plan), SOIL VERSE और Mechai FX जैसे प्लेटफॉर्म या योजनाओं के नाम सामने आए हैं.
कौन-कौन लोग बने शिकार?
इस निवेश घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब पंचकूला के सरकारी ठेकेदार अशोक कुमार पुलिस के पास पहुंचे. अशोक ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने महज 8,500 रुपये लगाकर इस योजना को आजमाया था. कुछ समय बाद जब उनकी रकम वापस मिल गई तो उन्हें लगा कि निवेश का यह तरीका भरोसेमंद है. इसी भरोसे के चलते साल 2021 में अशोक ने करीब 3.5 लाख रुपये और लगा दिए. इसके बाद उनके भाई और परिवार के दूसरे लोगों ने भी इस नेटवर्क में पैसे लगाना शुरू कर दिया. लेकिन बाद में हालात बदल गए और रकम वापस मिलना बंद हो गई. अशोक का आरोप है कि इस पूरे मामले में उन्हें करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके संपर्क से इस नेटवर्क में शामिल हुए 20-25 से ज्यादा अन्य लोग भी बाद में अपनी रकम निकाल नहीं पाए.
कंपनी का बनाया सीनियर प्रोजेक्ट हेड
पुलिस की जांच के अनुसार, राजेश सिर्फ मुनाफे के वादे नहीं करता था, बल्कि अपनी बदली हुई जिंदगी को भी लोगों के सामने मिसाल की तरह रखता था. बताया जाता है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग शुरुआत में साधारण बाइक से चलते थे, लेकिन बाद में महंगी Audi जैसी गाड़ियों में दिखाई देने लगे. राजेश की जिंदगी में भी ऐसा ही बदलाव नजर आया और बाद में उसके पास Mercedes होने की बात सामने आई. पुलिस के मुताबिक, ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को नेटवर्क में जोड़ने पर राजेश को कथित तौर पर मोटा हिस्सा मिलता था. आगे चलकर उसे सीनियर प्रोजेक्ट हेड की जिम्मेदारी भी दी गई. जांच में यह भी सामने आया कि राजेश ने कथित तौर पर दावा किया था कि उसने कम समय में करीब 2 करोड़ रुपये कमाए और उसे Mercedes भी मिली. ऐसी बातें सुनकर लोगों को यह भरोसा होने लगता था कि इस नेटवर्क में पैसा लगाकर वे भी तेजी से बड़ी कमाई कर सकते हैं.
कितने आरोपी हुए गिरफ्तार?
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें राजेश कुमार, उदहम सिंह, सुशील कुमार और संजीव कुमार के नाम शामिल हैं. जांच के दौरान सुशील कुमार की गिरफ्तारी दिल्ली एयरपोर्ट से हुई. बताया गया कि वह वहां से थाईलैंड के लिए रवाना होने की तैयारी में था, लेकिन उड़ान भरने से पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया.
राजेश कुमार के पास क्या-क्या मिला?
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित कमाई से जुड़ी कई महंगी चीजें भी मिलीं. कार्रवाई के दौरान राजेश की Mercedes के साथ Audi Q5, Audi Q3 और BMW जैसी गाड़ियां भी जब्त की गईं. इसके अलावा जांच के लिए कई लैपटॉप, मोबाइल फोन और Apple के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी कब्जे में लिए गए हैं. पुलिस अब इन गाड़ियों और दूसरी संपत्तियों का कनेक्शन कथित ठगी से मिली रकम से तलाश रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से भी अहम सुराग मिलने की उम्मीद है. वहीं, वाहनों को नीलाम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पुलिस अदालत से मंजूरी लेने की कोशिश कर रही है.
दुबई तक पहुंची जांच
जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा, पुलिस को इस कथित नेटवर्क के तार दुबई तक जुड़े होने के संकेत मिले. अधिकारियों को आशंका है कि मामले से जुड़े कुछ लोग जांच से बचने के लिए विदेश जा चुके हैं. पुलिस के मुताबिक, रविंदर बांगर और हैप्पी शेख के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है, ताकि उनके देश से बाहर जाने या वापस आने पर नजर रखी जा सके.
फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस इस पूरे मामले में पैसों के लेन-देन से लेकर इस्तेमाल किए गए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक हर कड़ी खंगाल रही है. साथ ही पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर कम समय में बहुत ज्यादा रिटर्न का दावा करने वाली योजनाओं पर तुरंत भरोसा न करें. खासकर क्रिप्टोकरेंसी और स्टॉक ट्रेडिंग से जुड़ी किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जानकारी और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है.




