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Democracy vs Mob Politics: अजय चौटाला की बातों से मचा सियासी तूफान, बोले- मौका आए तो शासकों को सड़कों पर उतारो | Video

जननायक जनता पार्टी (JJP) के सुप्रीमो अजय चौटाला का एक भड़काऊ भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने युवाओं से संगठित होकर शासकों को सत्ता से हटाने और सड़कों पर दौड़ाने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया. महेंद्रगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए इस बयान में चौटाला ने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश के उदाहरण दिए. बयान के सामने आने के बाद कानून-व्यवस्था, लोकतंत्र और राजनीतिक मर्यादा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है.

Democracy vs Mob Politics: अजय चौटाला की बातों से मचा सियासी तूफान, बोले- मौका आए तो शासकों को सड़कों पर उतारो | Video
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( Image Source:  X/SocialTamasha )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 2 Jan 2026 2:45 PM

हरियाणा की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब अजय चौटाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इस वीडियो में जननायक जनता पार्टी (JJP) के सुप्रीमो युवाओं से सीधे तौर पर टकराव और सत्ता को सड़कों पर उतारने की बात करते नजर आते हैं. यह भाषण अब महज राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि भड़काऊ भाषा के दायरे में रखकर देखा जा रहा है.

अजय चौटाला ने अपने भाषण में नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां युवाओं ने सरकारों का तख्तापलट कर शासकों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने संकेत दिया कि “मौका आने पर” भारत में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए. यह तुलना इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा इन देशों से अलग संवैधानिक प्रक्रियाओं पर आधारित है.

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‘संगठित होने’ का आह्वान

चौटाला ने युवाओं से खुद को संगठित करने और “इकट्ठा रहने” की अपील की. उनका कहना था कि जब सही समय आए, तो तैयार रहना होगा. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, संगठन की बात करना राजनीति में सामान्य है, लेकिन जब इसके साथ हिंसा और सत्ता को बलपूर्वक हटाने की भाषा जुड़ जाए, तो मामला गंभीर हो जाता है.

हिंसा की खुली भाषा ने बढ़ाई चिंता

भाषण का सबसे विवादित हिस्सा वह रहा, जहां चौटाला ने शासकों को “गद्दी से खींचकर सड़कों पर दौड़ाकर पीटने” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. इस तरह की भाषा न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि राजनीतिक असंतोष किस हद तक आक्रामक रूप ले सकता है.

कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला

अजय चौटाला ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुशासन के दावे कर रहे हैं, जबकि पिछले सवा साल में हालात और बिगड़े हैं. उनके मुताबिक, “गुंडा किस्म के लोग” व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों को धमका रहे हैं और प्रदेश में लूट मची हुई है.

मंच, माहौल और संदेश

यह वीडियो महेंद्रगढ़ जिले में 28 दिसंबर को आयोजित जेजेपी के “युवा योद्धा सम्मान” कार्यक्रम का बताया जा रहा है. मंच पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला, हरियाणवी सिंगर फाजलपुरिया और अन्य नेता भी मौजूद थे. इससे साफ है कि यह बयान किसी निजी बातचीत का नहीं, बल्कि सार्वजनिक राजनीतिक मंच का हिस्सा था.

JJP की रणनीति या सीमा लांघने की कोशिश?

राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या यह बयान JJP की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है या फिर यह संवैधानिक सीमाओं को लांघने का प्रयास. विपक्षी दल जहां इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं, वहीं समर्थक इसे “गुस्से की अभिव्यक्ति” कहकर बचाव कर सकते हैं.

बना बहस का केंद्र

यह पूरा मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है कि क्या राजनीतिक असहमति को हिंसक उदाहरणों और सड़कों की भाषा में व्यक्त किया जाना चाहिए? अजय चौटाला का यह भाषण अब सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि उस बहस का केंद्र बन चुका है, जहां लोकतांत्रिक विरोध और उग्र राजनीति के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आ रही है.

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