CCTV, 4000 जवान... जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर क्या है इस बार दिल्ली पुलिस की तैयारी; पिछली बार कहां हुई थी चूक?
दिल्ली में आज फिर से जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट हो रहा है. इस बार प्रोटेस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर किया जा रहा है. इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए हैं.
Jantar Mantar Protest
दिल्ली में 2 अक्टूबर आज जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर प्रोटेस्ट होने जा रहा है. जिसको लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. जुलाई में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान सामने आई चुनौतियों की समीक्षा के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस बार अपनी तैयारियों में कई बदलाव किए हैं. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की वापसी की घोषणा के बीच पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पिछली बार की तुलना में इस बार सुरक्षा इंतजाम ज्यादा कड़े हैं.
नई दिल्ली इलाके में करीब 4,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. सोमवार से कम से कम 20 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की कंपनियां भी इलाके में पहुंच चुकी हैं. संसद मार्ग समेत कई स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है और कुछ इलाकों को बंद कर दिया गया है.
क्या रही थी पिछली बार कमी?
पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जुलाई के प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा इंतजामों की विस्तृत समीक्षा की. अधिकारियों के मुताबिक, उस दौरान प्रदर्शन स्थल पर खाना-पानी पहुंचने की व्यवस्था को भी सुरक्षा के लिहाज से एक चुनौती के तौर पर देखा गया.
एक अधिकारी ने कहा "इजाज़त मिलने के बाद जंतर-मंतर पर सभी लोगों को बेरोक-टोक आने-जाने की छूट थी और साथ ही मुफ्त खाना भी मिल रहा था. हम आंदोलन में शामिल हुए छात्रों या आम नागरिकों का मज़ाक नहीं उड़ा रहे हैं, लेकिन कई लोग मुफ्त खाना और पानी मिलने की वजह से जंतर-मंतर पर ही रात भर रुके रहे. एक समय ऐसा भी आया जब आयोजकों को लोगों से खाना भेजने के लिए कहना बंद करना पड़ा. अलग-अलग समूहों ने भी मौके पर पानी और जूस पहुंचाया. यह व्यवस्था महीनों तक चल सकती थी. अपराधी इसका फायदा उठाते हैं."
टूटे फुटपाथों पर क्यों रहेगी नजर?
सुरक्षा समीक्षा के दौरान नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में ऐसे स्थानों को भी चिह्नित किया गया, जहां टूटे फुटपाथ या टूटी दीवारें सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं. अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने फुटपाथ से पत्थर निकालकर पुलिस और सुरक्षा बलों पर फेंके थे. पुलिस ने कई जगहों पर फुटपाथ की मरम्मत कराई है. जहां मरम्मत संभव नहीं हुई, वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इसके अलावा नई दिल्ली क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी को भी मजबूत किया गया है, ताकि हिंसा भड़काने या माहौल बिगाड़ने की कोशिशों पर नजर रखी जा सके.
क्या फिर होगा पेलेट गन का इस्तेमाल?
रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों से जुड़े कुछ मामलों पर भी चर्चा हुई. अधिकारियों के अनुसार, जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कुछ जवानों को इंटरव्यू देते हुए देखा गया था और कुछ पर प्रदर्शनकारियों को जानबूझकर गिराने के आरोप भी सामने आए थे. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरएएफ के जवान नई दिल्ली इलाके में वापस तैनात हैं, लेकिन 2 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल की संभावना नहीं है.
जुलाई के प्रदर्शन में क्या हुआ था?
20 जुलाई के सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ था. हालांकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की दैनिक डायरी में दंगा-रोधी बंदूकों और प्लास्टिक पेलेट के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया था. इस मुद्दे के बाद प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और खासतौर पर छात्रों पर पेलेट दागे जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठी.
2 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए क्या है तैयारी?
जुलाई के प्रदर्शनों के मुकाबले इस बार पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की ओर से जंतर-मंतर लौटने का ऐलान किया गया है. इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने कम से कम 20 सीएपीएफ कंपनियों को तैनात किया है. जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है. संसद मार्ग समेत नई दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और करीब 4,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.




