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अब घर के पास ही नौकरी और बाजार! क्या है TOD पॉलिसी, जिसके जरिए दिल्ली को बदलने वाली है सरकार?

दिल्ली में TOD पॉलिसी के तहत ‘Walk-to-Work’ मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है. आखिर क्या है TOD पॉलिसी और यह दिल्ली को कैसे बदलने वाली है?

अब घर के पास ही नौकरी और बाजार! क्या है TOD पॉलिसी, जिसके जरिए दिल्ली को बदलने वाली है सरकार?
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( Image Source:  X-@ANI )

Delhi के उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत दिल्ली में 'वॉक-टू-वर्क' यानी घर के पास काम की व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. बुधवार को लोकनिवास में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों के साथ हुई हाई लेवल मीटिंग में उन्होंने कहा कि अगर लोगों के घर और कार्यस्थल आसपास होंगे, तो सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और लोग पैदल चलकर भी अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच सकेंगे.

उन्होंने कहा कि यह नीति प्रधानमंत्री Narendra Modi के “विकसित भारत” विजन से प्रेरित है और इससे दिल्ली के शहरी ढांचे और स्काईलाइन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

क्या इस नीति का मकसद?

एलजी ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे एकीकृत हब विकसित करना है, जहां लोग रहने, काम करने और खरीदारी जैसी जरूरतों के लिए निजी वाहनों पर कम निर्भर रहें. उनके मुताबिक इससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी और दिल्ली को अधिक हरित तथा टिकाऊ शहर बनाने में मदद मिलेगी. नई व्यवस्था के तहत मेट्रो और RRTS कॉरिडोर के 500 मीटर के दायरे में विकास कार्य किए जाएंगे. इस योजना के लागू होने के बाद दिल्ली का करीब 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र नियोजित विकास के दायरे में आ जाएगा.

क्या है TOD पॉलिसी?

Delhi में लागू की गई नई ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी 2026 को राजधानी के शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. यह नीति मुख्य रूप से तीन आधा हैं- घनत्व (Density), विविधता (Diversity) और डिजाइन (Design). इसका मकसद ऐसे इलाके विकसित करना है जहां लोग मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के पास रह सकें, पैदल चल सकें और निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो.

  • हाई डेंसिटी और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट

यह नीति मेट्रो से जुड़े 207 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर और करीब 30-40 वर्ग किलोमीटर जमीन पर केंद्रित है. इसके तहत ऊंची इमारतों और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट (रिहायशी, व्यावसायिक और सामाजिक सुविधाएं) को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि लोग निजी वाहनों की बजाय पैदल चलने और साइकिल का ज्यादा इस्तेमाल करें.

  • किफायती आवास पर जोर

कुल अनुमत FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) में से 65 प्रतिशत हिस्सा रिहायशी उपयोग के लिए तय किया गया है. इसके तहत 100 वर्गमीटर से छोटे घर बनाने पर फोकस रहेगा, जिससे किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ सके.

  • मंजूरी प्रक्रिया आसान

कारोबार को आसान बनाने के लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम लागू किया गया है. इसके तहत 60 दिनों के भीतर मंजूरी नहीं मिलने पर उसे स्वीकृत माना जाएगा.

  • चार्ज सिस्टम हुआ सरल

पहले अलग-अलग शुल्क देने पड़ते थे, जैसे भूमि उपयोग परिवर्तन, पानी-सीवर कनेक्शन और FAR शुल्क. अब इन सभी की जगह एकीकृत TOD शुल्क लागू किया गया है, जिसे एक ही प्राधिकरण को जमा किया जा सकेगा.

  • इंफ्रास्ट्रक्चर और मेट्रो नेटवर्क पर फोकस

इस नीति का उद्देश्य दिल्ली के बाहरी इलाकों पर बढ़ते दबाव को कम करना है. इसके लिए मध्य, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली में घनत्व बढ़ाकर मौजूदा मेट्रो नेटवर्क का बेहतर उपयोग किया जाएगा, ताकि सार्वजनिक परिवहन को और प्रभावी बनाया जा सके.

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